
एसपी मेडिकल कॉलेज के नेत्र विभाग में रविवार का दिन चार नेत्र रोगियों के लिए यादगार बन गया, जब लाइव सर्जरी के दौरान उनको नेत्र ज्योति मिल गई। लाइव सर्जरी में शामिल नेत्र चिकित्सकों के साथ रोगियों के परिजनों के चेहरे भी खिल उठे, जब उन्हें पता चला कि लाइव सर्जरी सफल रही।
जयपुर से लाए कॉर्निया
विभागाध्यक्ष एवं आचार्य डॉ. जयश्री मुरली मनोहर ने बताया कि डॉ. धर्मवीर एवं स्थानीय चिकित्सकों की टीम ने नेत्रदान से प्राप्त एक कॉर्निया से दो परत निकालकर दो मरीजों के प्रत्यारोपित की। एक ही कॉर्निया दो मरीजों के काम आया। डॉ. धर्मवीर कॉर्निया जयपुर से लाए थे।
बताया उपयोगी
कार्यशाला का उद्घाटन एसपी मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉ. आरपी अग्रवाल ने किया। अध्यक्षता नेत्र विभाग की पूर्व आचार्य एवं विभागाध्यक्ष डॉ. अनिता चाहर ने की। विशिष्ट अतिथि डॉ. एमएस व्यास ने कहा कि ऐसी कार्यशाला व लाइव सर्जरी स्नातकोत्तर छात्र-छात्राओं के लिए उपयोगी है।
विशिष्ट अतिथि डॉ. एसपी व्यास ने नेत्र चिकित्सकों को नेत्रदान के लिए जागरूकता लाने तथा ओपीडी में आने वाले मरीजों को नेत्रदान के लिए प्रेरित करने का आह्वान किया। कार्यशाला में अतिरिक्त प्राचार्य डॉ. रंजन माथुर, डॉ. आरडी मेहता, डॉ. दीपचंद, डॉ. गौरव गुप्ता सहित नेत्र विभाग के सभी चिकित्सक व छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।
वरदान साबित
कुछ रोगों के कारण कॉर्निया में सूक्ष्म घाव हो जाते हैं, जिनको झिल्ली या कॉन्टेक्ट लेंस से बंद किया जाता है। अब नई तकनीक के तहत कॉर्निया को दूसरी परत 'बोमेन परत' कहते हैं, उसको प्रत्यारोपित कर छिद्र को बंद किया जाता है। यह मरीजों के लिए वरदान साबित होगी।
डॉ. धर्मवीर, कॉर्निया विशेषज्ञ जयपुर
डॉ. वशिष्ठ ने चीन में शोध प्रस्तुत किए
एसपी मेडिकल कॉलेज के ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग (ब्लड बैंक, पीबीएम अस्पताल) के रेजीडेंट डॉक्टर डॉ. शैलेंद्र वशिष्ठ ने चीन के ग्वांगझाऊ में हुई इंटरनेशनल सोसायटी ऑफ ब्लड ट्रांसफ्यूजन-2017 में शिरकत की। उन्होंने सम्मेलन में रक्तदान एवं अनियमित एंटीबॉडीज से संबंधित तीन शोध कार्य प्रस्तुत किए।
डॉ. वशिष्ठ ने 'युवा अन्वेषक चर्चा' विश्व में चल रहे नवीनतम शोध विषयों पर विचार-विमर्श किया। रेजीडेंट डॉक्टर के रूप में उन्होंने भारत का प्रतिनिधित्व किया। डॉ. वशिष्ठ भारतीय राष्ट्रीय ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन सोसायटी के सदस्य हैं। डॉ. वशिष्ठ ने शोधकार्य प्रोफेसर डॉ. देवराज आर्य, डॉ. एनएल महावर एवं डॉ. अरुण भारती के मार्गदर्शन में किया।