
नोखा (बीकानेर)। रोड़ा रोड पर काना महाराज की खेड़ी में जमीन धंसने से बस्ती के बीच 30 फीट चौड़ा और 35 फीट गहरा गड्ढ़ा बन गया। गनीमत रही कि हादसे के समय वहां कोई व्यक्ति मौजूद नहीं था। अन्यथा बड़ा हादसा हो सकता था। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई और सैकड़ों लोग मौके पर जमा हो गए। भू-धंसाव के बाद आसपास बने मकानों पर भी संकट के बादल मंडराने लगे हैं। इससे 100 से अधिक परिवार दहशत में हैं। उनका कहना है कि यदि जमीन धंसने का दायरा और बढ़ा तो कई मकान इसकी चपेट में आ सकते हैं।
हादसे के बाद क्षेत्र में भय का माहौल है। डर के चलते लोगों की रात आंखों में गुजरी। हालांकि शनिवार को प्रशासन सक्रिय हुआ और कार्यवाहक उपखंड अधिकारी व तहसीलदार चंद्रशेखर टांक ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने खतरे की जद में आए मकानों को खाली कराने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए नोटिस जारी कर मुनादी भी करवाई गई है।
इस घटना ने एक बार फिर पुराने जख्म हरे कर दिए हैं। करीब दस माह पहले भी इसी इलाके में एक मकान जमींदोज हो गया था, जिसमें एक टेंट व्यवसायी का लाखों रुपये का सामान मलबे में दब गया था। वहीं लगभग एक वर्ष पूर्व भी दो मकान जमीन धंसने से धराशायी हो गए थे। उस समय जिला प्रशासन ने जांच करवाई थी, लेकिन अब फिर हुए हादसे ने जांच और उसके परिणामों पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।
जमीन धंसने की लगातार घटना के बाद क्षेत्र के लोगों ने प्रभावित इलाके का तत्काल तकनीकी सर्वे कराने, गड्ढे के आसपास मजबूत बैरिकेडिंग करने तथा खतरे की जद में आए परिवारों को सुरक्षित स्थान पर विस्थापित करने की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो यह भू-धंसाव किसी बड़े हादसे का कारण बन सकता है।
कुछ लोग ने प्रशासन पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिस क्षेत्र में यह हादसा हुआ है, वहां प्रशासन की ओर से पूर्व में पट्टे जारी किए गए थे। ऐसे में बिना पर्याप्त भू-वैज्ञानिक जांच के आबादी बसाने को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय निवासी कमला देवी ने बताया कि जमीन धंसने के साथ इतनी तेज आवाज हुई कि पूरा मोहल्ला दहल गया। लोग रातभर जागते रहे कि कहीं और जमीन न धंस जाए। टेंट व्यवसायी श्रवण जोशी ने बताया कि करीब दस महीने पहले उसका टेंट का सामान जमीन धंसने से जमींदोज हो गया था।
जमीन धंसने की घटना के बाद खान एवं भू-विज्ञान विभाग बीकानेर की टीम ने मौके का निरीक्षण किया। टीम में शामिल भूवैज्ञानिक रामरतन बिश्नोई ने बताया कि जिस स्थान पर धंसाव हुआ है, वहां पुराने समय में बजरी का खनन किया गया था। खनन के दौरान छोड़े गए पिलर बारिश के पानी से कमजोर हो गए। जो भार को सहन करने में सक्षम नहीं हैं।
इससे धंसाव की स्थिति पैदा हो रही है। उन्हाेंने सुझाव दिए कि प्रभावित क्षेत्र में नए मकानों के निर्माण पर रोक लगाई जाए। जिन मकानों में दरारें आ चुकी हैं, उन्हें तत्काल खाली कराया जाए। खतरे की जद में आने वाले मकानों का पुनर्स्थापन (रिलोकेशन) कराया जाए। एहतियात के तौर पर धंसाव स्थल से करीब 50 मीटर तक के क्षेत्र को डेंजर जोन घोषित किया जा सकता है।
जो मकान खतरे की जद में हैं, उनके निवासियों को मकान खाली कर सुरक्षित स्थान पर जाने के निर्देश दिए गए हैं। कुछ परिवारों को नोटिस जारी कर मुनादी भी कराई गई है। साथ ही कुछ मकानों पर रेडक्रॉस निशान भी लगाए गए हैं। प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और आवश्यकतानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।