
भारतीय संस्कृति में साधना और आराधना के लिए हर वर्ष चार नवरात्र मनाए जाने का विधान है, इनमें चैत्र शुक्ल के वासंतिक नवरात्र, आश्विन शुक्ल के शारदीय नवरात्र और आषाढ़ एवं माघ शुक्ल के गुप्त नवरात्र शामिल हैं। इस वर्ष चैत्र नवरात्र का आरंभ आज से हो रहा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार नवरात्र में आदि शक्ति माता भगवती की पूजा एवं मंत्र जाप आदि अनुष्ठान करने से धन-धान्य, सौभाग्य और संतान सुख की प्राप्ति होती है।
नौ स्वरूपों की पूजा-आराधना
अथर्ववेद में कहा गया है कि पृथ्वी के साथ समस्त देवी-देवताओं की अधिष्ठात्री भगवती दुर्गा हैं, इसलिए नवरात्र में विधि-विधान के साथ देवी की आराधना करने से सभी देवी-देवताओं की पूजा का फल मिलता है। नवरात्र में देवी भगवती के नौ स्वरूपों की क्रम से पूजा-आराधना की जाती है। ये नौ स्वरुप हैं-शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंधमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री।
नवरात्र में देवी के स्वरूपों की आराधना से जीवन में पवित्रता की भावना बलवती होती है। नवरात्र में कन्या और लांगुरों का पूजन करके भोजन करा भेंट आदि देने से देवी भगवती की कृपा से सुख-समृद्धि, आरोग्य, ऐश्वर्य, विजय और मनोरथ सिद्धि, संतान सुख, शांति आदि की प्राप्ति होती है।
नवग्रहों में कन्या और लांगुरों का पूजन और भोजन करा भेंट देने से देवी भगवती की कृपा से सुख-समृद्धि, आरोग्य, ऐश्वर्य, और मनोरथ सिद्धि प्राप्त होती है।
ऐसे करें आराधना
नवरात्र के प्रथम दिन घट स्थापना कर मां शैलपुत्री की आराधना लाल पुष्प, लाल वस्त्र, नारियल, शुद्ध घी आदि अर्पित करें। दूसरे दिन ब्रह्मचारिणी देवी की आराधना करते हुए उनको श्वेत पुष्प एवं वस्त्र, नारियल, शक्कर आदि अर्पित करते हैं। तीसरे दिन देवी के चंद्रघंटा स्वरूप का पूजन किया जाता है।
चौथे दिन माता कूष्मांडा की आराधना करते हुए उनको पेठा और मालपुआ का भोग लगाया जाता है। पांचवें दिन स्कंदमाता की पूजा अर्चना की जाती है। जिसमें उन्हें कदली फल का भोग लगाते हैं। छठे दिन माता कात्यायनी की पूजा करते हुए शहद अर्पित किया।
सातवें दिन माता कालरात्रि की आराधना गुड़ से करते हैं। आठवें दिन माता गौरी की आराधना में नारियल का भोग लगाकर बांटा जाता है। नवें दिन सिद्धिदात्री का पूजन करके व्रत का पारायण किया जाता है।
-ज्यो. प्रमोद अग्रवाल