Pakistani Spy: बीकानेर जिले में ढाई साल में दूसरी बार एक और कबूतर पकड़ा गया है, जिस पर जासूसी का शक है। इन बेजुबान पक्षियों के पकड़े जाने पर उन्हें कैद काटनी पड़ती है।
बीकानेर. Pakistani Spy: पाकिस्तान अपनी नापाक हरकतों से बाज नहीं आ रहा। वह जासूसी के लिए पक्षियों को मोहरा बनाता है। बीकानेर जिले में ढाई साल में दूसरी बार एक और कबूतर पकड़ा गया है, जिस पर जासूसी का शक है। इन बेजुबान पक्षियों के पकड़े जाने पर उन्हें कैद काटनी पड़ती है। हालात यह हैं कि इन पक्षियों के जासूस होने या नहीं होने का पता करने की प्रक्रिया बेहद जटिल है, जिसके चलते पक्षियों को खुले आसमान में उड़ने की जगह लोहे के पिंजरों में जिंदगी गुजारनी पड़ती है। करीब पौने तीन साल पहले छतरगढ़ थाना क्षेत्र के मोतीगढ़ गांव में भी एक कबूतर मिल चुका है। दुर्योग से उसके बाद कोरोना काल आ गया। सवा दो साल तक कोई पता करने ही नहीं आया। सात-आठ महीने पहले कबूतर की स्कैनिंग और दूसरी जांचे हुईं, जिसमें साबित हुआ कि कबूतर पालतू है। फिर उसे छोड़ दिया गया।
दो साल इतनी आवभगत कि उड़ना ही भूला
छतरगढ़ के मोतीगढ़ गांव में मिले कबूतर के पंखों पर भी मुहर लगी थी। मुहर पर चारणपुर टू लाहौर 225 अंकित था। इस कबूतर की करीब सवा दो साल तक थाने में आवभगत की गई। बाकायदा एक सिपाही की ड्यूटी लगाई गई, जो कबूतर के दाना-पानी व सुरक्षा का ख्याल रखता था। पुलिस ने कबूतर के संबंध में सुरक्षा एजेंसियों को जानकादी दी लेकिन कोरोना की वजह से लॉकडाउन लगने से सुरक्षा एजेंसियां देरी से पहुंचीं। आवभगत का नतीजा यह हुआ कि कबूतर का वजन भी बढ़ गया और वह उड़ना तक भूल गया। करीब सवा दो साल बाद जांच में प्रमाणित हुआ कि यह जासूस कबूतर नहीं किसी का पालतू है। इसके बाद कबूतर को वन विभाग के सुपुर्द किया गया।
पहले भी पकड़े जा चुके हैं पक्षी
राजस्थान के बीकानेर, गंगानगर, जोधपुर शहरों में पिछले कुछ साल में इस तरह के कई मामले सामने आ चुके हैं। ऐसे अधिकतर मामले बीकानेर और जोधपुर से आए हैं। बीकानेर में कभी हरे रंग के गुब्बारे तो कभी कबूतर को पकडा जा चुका है। गुब्बारों पर हरे और नीले रंग के बीच उर्दू भाषा में शब्द लिखे मिले। कुछ समय पहले पकडी गई एक चील के शरीर से तो ट्रांसमीटर जैसा उपकरण भी बरामद हो चुका है। गुब्बारों से भी कई बार ट्रांसमीटर बरामद हुआ है।
पुलिस इस तरह के पकड़े जाने वाले पक्षियों के बारे में सीआईडी सहित अन्य सुरक्षा एजेंसियों व सेना के अफसरों को जानकारी देती है, ताकि अगर ये जासूसी का उपक्रम है, तो इसे समय रहते काबू किया जा सके। बज्जू सीआई भूपसिंह व एक अन्य सुरक्षा एजेंसी से जुड़े अधिकारी के मुताबिक अगर कोई पक्षी संदिग्ध पकड़ा जाता है, तो उसकी जांच प्रक्रिया पूरी अपनानी पड़ती है फिर चाहे वह पालतू ही क्यों न हो।