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राजस्थान में खाकी का घटता क्रेज…5 साल में 2,178 पुलिसकर्मियों ने छोड़ी नौकरी, सुकून की तलाश में चुनी अलग राह

Rajasthan Police: कभी युवाओं के लिए सम्मान, स्थायित्व और रुतबे की पहचान मानी जाने वाली पुलिस की नौकरी अब तेजी से अपना आकर्षण खो रही है। निजी जिंदगी में सुकून की चाह में जवानों का ड्यूटी से भरोसा टूट रहा है।

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राजस्थान पुलिस के जवान सुकून की तलाश में छोड़ रहे नौकरी, तनाव और दबाव से ड्यूटी से टूट रहा भरोसा

राजस्थान पुलिस मुख्यालय, पत्रिका फाइल फोटो

Rajasthan Police Job Stress: कभी युवाओं के लिए सम्मान, स्थायित्व और रुतबे की पहचान मानी जाने वाली पुलिस की नौकरी अब तेजी से अपना आकर्षण खो रही है। प्रदेश में पिछले 5 वर्षों में 2,178 पुलिस जवान खाकी छोड़ चुके हैं। इनमें अधिकांश ने प्रतियोगी परीक्षाएं पास कर शिक्षा, बैंकिंग और अन्य सरकारी विभागों का रुख किया। कारण सिर्फ बेहतर नौकरी नहीं, बल्कि अनियमित ड्यूटी, लगातार मानसिक दबाव, सीमित अवकाश, अफसरशाही का दबाव और परिवार से बढ़ती दूरी भी है। हालात यह हैं कि अब कई युवा पुलिस सेवा को करियर का अंतिम विकल्प मानने लगे हैं।

औसतन 40 से ज्यादा जवान सालाना छोड़ रहे सेवा

पुलिस विभाग के आंकड़ों के अनुसार 2021 से 2025 के बीच 2,178 जवान नौकरी छोड़ चुके हैं। वहीं पांच सालों में बीकानेर, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, चूरू व भरतपुर जिले में 291 जवानों ने नौकरी छोड़ी। इनमें अधिकांश ने विभाग को पूर्व सूचना देकर अन्य सरकारी सेवाओं में नियुक्ति ली। अकेले बीकानेर जिले में हर साल 12 से 15 पुलिसकर्मी नौकरी छोड़ रहे हैं।

आखिर क्यों हो रहा जवानों का मोहभंग

  • तय ड्यूटी समय का अभाव
  • छुट्टियों की भारी कमी
  • 24 घंटे ड्यूटी जैसा माहौल
  • लगातार मानसिक दबाव
  • अफसरशाही और अनुशासनात्मक कार्रवाई का भय
  • परिवार और सामाजिक जीवन के लिए समय नहीं
  • अन्य विभागों की तुलना में कम सुविधाएं

‘खाकी छोड़ी, क्योंकि सुकून चाहिए था’

झुंझुनूं निवासी एक जवान ने पुलिस सेवा जॉइन करने के बाद शिक्षक भर्ती परीक्षा पास की और शिक्षा विभाग में नियुक्ति ले ली। विभागीय नियमों के तहत उसे प्रशिक्षण और वेतन मद में खर्च राशि जमा करवाकर इस्तीफा देना पड़ा। इसी तरह श्रीकोलायत, लूणकरनसर और सूरतगढ़ के कई जवान प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता मिलने के बाद दूसरे विभागों में चले गए।

नौकरी छोड़ने के नियम भी आसान नहीं

पुलिस सेवा छोड़ने से पहले जवानों को लंबी विभागीय प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। इसमें पूर्व अनुमति के साथ प्रशिक्षण व अन्य खर्च की राशि जमा करवानी पड़ सकती है। बिना अनुमति दूसरी नौकरी जॉइन करने पर कार्रवाई भी संभव। विभागीय स्वीकृति के बाद ही इस्तीफा स्वीकार होता है।

अफसरशाही का दबाव भी बड़ी वजह

महकमे में निचले स्तर के कर्मचारियों पर अत्यधिक दबाव और अनुशासनात्मक कार्रवाई का भय असंतोष बढ़ा रहा है। कई जवानों का कहना है कि अच्छे काम का श्रेय अक्सर वरिष्ठ अधिकारी ले जाते हैं, जबकि छोटी चूक पर कार्रवाई का सामना जवानों को करना पड़ता है।

एक्सपर्ट बोले: सुधार नहीं हुआ, तो बढ़ेगा संकट

सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी ओमप्रकाश जोशी का कहना है कि पुलिस विभाग में कार्य संस्कृति, अवकाश व्यवस्था और व्यावहारिक सुधार की तत्काल जरूरत है। जवानों को सम्मानजनक कार्य वातावरण, मानसिक स्वास्थ्य सहायता और संतुलित ड्यूटी सिस्टम नहीं मिला, तो युवाओं का रुझान लगातार घटेगा।

एक नजर में: किस जिले से कितने जवानों ने छोड़ी नौकरी

जिलानौकरी छोड़ने वाले जवान
बीकानेर76
श्रीगंगानगर58
चूरू46
हनुमानगढ़36
भरतपुर75

बीकानेर सबसे ऊपर, हनुमानगढ़ सबसे नीचे

रेंज के चार जिलों में बीकानेर में सबसे ज्यादा 76 जवानों ने नौकरी छोड़ी, जबकि हनुमानगढ़ में सबसे कम 36 जवानों ने सेवा छोड़ी। श्रीगंगानगर दूसरे और चूरू तीसरे स्थान पर है। भरतपुर में भी पांच साल में 75 जवानों ने पुलिस की नौकरी को अलविदा कहा है।