निजी कंपनी ऐसी योजना तैयार कर रही है, जिसके तहत बिजली की जितनी खपत होगी, उतना पैसा संबंधित विभाग को जमा कराना पड़ेगा।
रोड लाइटों के जरिए खर्च होने वाली बिजली का भी अब हिसाब रखा जाएगा। उसके आधार पर ही बिजली का बिल तैयार किया जाएगा। शहरी क्षेत्र में बिजली आपूर्ति कर रही निजी कंपनी ऐसी योजना तैयार कर रही है, जिसके तहत बिजली की जितनी खपत होगी, उतना पैसा संबंधित विभाग को जमा कराना पड़ेगा।
कंपनी इसके लिए शहरभर में रोड लाइटों के अलग से मीटर लगाएगी। बिजली सप्लाई का कार्य कर रही निजी कंपनी ने नगर निगम और नगर विकास न्यास को हाल ही में इस बात से अवगत कराया है कि शहर में रोड लाइट के ऐसे कितने पोइंट है, जहां पर मीटर लगाए जाने प्रस्तावित हैं।
नहीं रहेगी बिलों की समस्या
रोड लाइटों पर मीटर लगने के बाद रोड लाइटों से खर्च होने वाली बिजली का वास्तविक बिल आएगा। इसमें किसी तरह का विवाद नहीं रहेगा। माना जा रहा है कि अब तक जिन रोड लाइटों पर मीटर नहीं लगे थे, वहां का बिजली बिल औसत के आधार पर ही आ रहा था। अब वास्तविक रीडिंग के आधार पर ही बिल आएगा।
खराब मीटर हटाएंगे
कॉलोनियों और पार्कों में लगी लाइटों का जिम्मा नगर विकास न्यास का है। इनमें कुछ के मीटर खराब है, बंद हो चुके हैं। कई क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। इस तरह के मीटरों को बदला जाएगा। उनके स्थान पर नए मीटर लगाए जाने की योजना है।
250 मीटर लगेंगे
जानकारी के अनुसार पहले चरण में करीब ढाई सौ मीटर लगाए जा सकते हैं। इसमें नगर निगम और नगर विकास न्यास की रोड लाइटें शामिल हैं। नगर निगम के सहायक अभियंता के अनुसार शहर में रोड लाइटों के करीब 681 पोइंट है। इनमें अधिकांश में मीटर लगे हुए हैं। बिजली कंपनी इसके लिए नगर निगम से फीडबैक लेने में जुटी हुई है।
अधिकांश रोड लाइटों पर ऑन-ऑफ का स्वीच है, एक-एक अलग-अलग लाइटें हैं। मीटर लगने की कवायद शुरू होने के साथ ही अब रोड लाइटों के कनेक्शन भी एक साथ किए जाएंगे। जिससे वो एक ही स्वीच से बंद और चालू की जाएगी। ताकि मीटर रीडिंग के आधार पर बिल तैयार किए जा सके। नगर निगम और न्यास ने इस व्यवस्था पर काम शुरू कर दिया है।
लगाए जाएंगे मीटर
रोड लाइटों के लिए भी मीटर लगाए जाएंगे ताकि सही बिलिंग हो सके। इससे किसी तरह की समस्या नहीं रहेगी। जितनी यूनिट खर्च होगी उतना ही बिल आएगा। शहरी क्षेत्र में रोड लाइटों पर जहां मीटर नहीं लगे है, वहां नए लगाए जाएंगे, मीटर पुराने हैं तो उनको दुरुस्त किया जाएगा।
डी.चटर्जी, अधिकारी, बीकेईसीएल