
प्रदेश के निजी विद्यालय अब शिक्षा विभाग की डिजिटल निगरानी के दायरे में होंगे। माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने राज शाला संबलन मोबाइल ऐप के जरिए सभी निजी स्कूलों के नियमित निरीक्षण और ऑनलाइन मॉनिटरिंग की व्यवस्था लागू कर दी है। अब संभाग, जिला और ब्लॉक स्तर के अधिकारियों को हर माह तय लक्ष्य के अनुसार स्कूलों का निरीक्षण करना होगा और पूरी रिपोर्ट ऐप पर अपलोड करनी होगी। नई व्यवस्था का उद्देश्य निजी विद्यालयों में राजस्थान विद्यालय (फीस का विनियमन) अधिनियम-2016, नियम-2017, आरटीई अधिनियम, स्कूल बस संचालन और विद्यार्थियों को पाठ्य सामग्री उपलब्ध कराने सहित सभी विभागीय निर्देशों की प्रभावी पालना सुनिश्चित करना है। निरीक्षण की पूरी प्रक्रिया डिजिटल होने से रिपोर्टिंग में पारदर्शिता भी बढ़ेगी।
इन बिंदुओं पर होगी सख्त जांच
निरीक्षण के दौरान अधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि फीस विनियमन अधिनियम एवं नियमों की पालना हो रही है या नहीं। आरटीई के तहत प्रवेशित विद्यार्थियों से किसी प्रकार की अवैध वसूली तो नहीं की जा रही। अभिभावकों पर किसी विशेष दुकान से किताबें, यूनिफॉर्म या जूते खरीदने का दबाव तो नहीं बनाया जा रहा। हर वर्ष अनावश्यक रूप से पुस्तकें बदली तो नहीं जा रहीं। अभिभावक-शिक्षक संघ (पीटीए) और फीस समिति का गठन नियमानुसार हुआ है या नहीं।
बसों, भवन और सुरक्षा प्रमाण-पत्र भी जांच के दायरे में
निरीक्षण के दौरान स्कूल बसों के फिटनेस प्रमाण-पत्र, परिवहन नियमों की पालना, अग्नि सुरक्षा, भवन सुरक्षा प्रमाण-पत्र, बाल सुरक्षा उपाय, स्वच्छ पेयजल, शौचालय, प्रयोगशालाएं, पुस्तकालय, शिक्षक-विद्यार्थी अनुपात, दिव्यांग सुविधाएं तथा विद्यालय की मान्यता संबंधी दस्तावेजों की भी जांच होगी। यदि किसी विद्यालय के खिलाफ विभागीय जांच लंबित है, तो उसका रिकॉर्ड भी देखा जाएगा।
75 प्रतिशत निरीक्षण अनिवार्य, नहीं तो शून्य अंक
शिक्षा विभाग ने प्रत्येक स्तर के अधिकारियों के लिए मासिक निरीक्षण लक्ष्य तय किए हैं। अधिकारियों को आवंटित निजी विद्यालयों में से कम से कम 75 प्रतिशत का निरीक्षण करना अनिवार्य होगा। निर्धारित लक्ष्य से कम निरीक्षण होने पर संबंधित अधिकारी के अंक शून्य माने जाएंगे और लक्ष्य पूरा नहीं माना जाएगा। प्रत्येक निरीक्षित विद्यालय के लिए एक अंक निर्धारित किया गया है।
हर 15 दिन में होगी समीक्षा
निरीक्षण अभियान की प्रगति की समीक्षा के लिए संभाग, जिला और ब्लॉक स्तर पर हर 15 दिन में वर्चुअल बैठक आयोजित की जाएगी। राज्य स्तर पर भी समय-समय पर समीक्षा कर आवश्यक निर्देश जारी किए जाएंगे। अधिकारियों को ओटीपी आधारित लॉगिन के माध्यम से ऐप पर निरीक्षण रिपोर्ट ऑनलाइन दर्ज करनी होगी।