
जिला अस्पताल।
प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में मरीजों के इलाज की प्रक्रिया अब पूरी तरह डिजिटल होने जा रही है। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिला, उप जिला, सैटेलाइट अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) में 31 जुलाई 2026 तक इंटीग्रेटेड हेल्थ मैनेजमेंट सिस्टम (आईएचएमएस) के डॉक्टर डेस्क मॉड्यूल का शत-प्रतिशत संचालन सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए हैं। नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक मरीज का आभा लिंक्ड इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड (ईएचआर) तैयार किया जाएगा। डॉक्टर परामर्श, जांच और दवाओं का पूरा विवरण आईएचएमएस के डॉक्टर डेस्क मॉड्यूल में दर्ज करेंगे। इससे मरीज का उपचार इतिहास प्रदेश के सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में डिजिटल रूप से उपलब्ध रहेगा।
ओपीडी में अनिवार्य होगा डॉक्टर डेस्क मॉड्यूल
विभाग ने स्पष्ट किया है कि डॉक्टर डेस्क मॉड्यूल को सभी सरकारी अस्पतालों की ओपीडी सेवाओं का नियमित हिस्सा बनाया जाएगा। प्रत्येक चिकित्सक को लॉगिन आईडी, कंप्यूटर, इंटरनेट और अन्य तकनीकी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, ताकि डिजिटल परामर्श और ई-प्रिस्क्रिप्शन निर्बाध रूप से जारी किए जा सकें।
डेटा एंट्री में मिलेगा सहयोग, निर्णय डॉक्टर का होगा
डॉक्टरों की सहायता के लिए डेटा एंट्री ऑपरेटर, कंप्यूटर ऑपरेटर, जीएनएम, नर्सिंग कर्मी, इंटर्न और अन्य उपलब्ध मानव संसाधनों की सेवाएं ली जा सकेंगी। हालांकि मरीज की जांच, उपचार का निर्णय, दवा का चयन और ई-प्रिस्क्रिप्शन जारी करने की अंतिम जिम्मेदारी संबंधित चिकित्सक की ही होगी।
मरीजों को होंगे ये प्रमुख लाभ
प्रत्येक मरीज का डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड सुरक्षित रहेगा। ई-प्रिस्क्रिप्शन मिलने से पर्ची का डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध होगा। किसी भी सरकारी अस्पताल में मरीज का उपचार इतिहास देखा जा सकेगा। उपचार प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, व्यवस्थित और त्वरित होगी। आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के क्रियान्वयन को गति मिलेगी।
सीएमएचओ और पीएमओ की बढ़ी जिम्मेदारी
चिकित्सा विभाग ने सभी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों (सीएमएचओ) और प्रमुख चिकित्सा अधिकारियों (पीएमओ) को निर्देश दिए हैं कि वे 31 जुलाई तक सभी संस्थानों में डॉक्टर डेस्क मॉड्यूल का शत-प्रतिशत संचालन सुनिश्चित करें। आवश्यक मानव संसाधन का पुनर्समायोजन करें। ई-प्रिस्क्रिप्शन और आभा लिंक्ड ईएचआर की नियमित मॉनिटरिंग करें। समयबद्ध अनुपालन सुनिश्चित करें। सीएमएचओ डॉ. पुखराज साध ने बताया कि जिला एवं ब्लॉक स्तर पर तकनीकी अधिकारियों के माध्यम से प्रशिक्षण, हैंडहोल्डिंग और तकनीकी सहायता दी जा रही है। जिन स्वास्थ्य संस्थानों में कंप्यूटर, लैपटॉप, टैबलेट या अन्य आईटी उपकरणों की कमी होगी, वहां नियमानुसार उनकी खरीद कर उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी।
Updated on:
09 Jul 2026 07:23 pm
Published on:
09 Jul 2026 07:23 pm
