
बीकानेर के खिलाड़ियों ने सीमित संसाधनों के बावजूद राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी पहचान बनाई है। कई खिलाड़ी एशियाई खेलों जैसी बड़ी प्रतियोगिताओं में पदक जीत चुके हैं। लेकिन जिस शहर में खेल प्रतिभाओं की कमी नहीं, वहां खिलाड़ियों को अभ्यास के लिए सुविधायुक्त मैदान तक नहीं मिल पा रहे। कहीं बड़े मैदान में घास की जगह कंकड़ हैं, कहीं ट्रैक में गड्ढे हैं तो कहीं शौचालय, पेयजल, प्रकाश और चेंजिंग रूम जैसी बुनियादी सुविधाएं भी नहीं हैं। ऐसे में सवाल सीधा है, जब मैदान ही खेलने लायक नहीं होंगे तो खिलाड़ी अपने प्रदर्शन को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक कैसे ले जाएंगे? खेल दिवस पर यह तस्वीर इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि प्रतिभाओं को तराशने के लिए सिर्फ प्रतिभा और मेहनत पर्याप्त नहीं होती। नियमित अभ्यास के साथ सुरक्षित मैदान, बेहतर उपकरण और खेल के अनुकूल आधारभूत ढांचा भी जरूरी है। बीकानेर में यही हिस्सा सबसे कमजोर नजर आ रहा है।
सबसे बड़े स्टेडियम में शौचालय तक नहीं
राजस्थान बास्केटबॉल टीम के पूर्व कप्तान दानवीर सिंह भाटी के अनुसार, शहर का सबसे बड़ा डॉ. करणी सिंह स्टेडियम होने के बावजूद यहां शौचालय जैसी मूलभूत सुविधा का अभाव परेशानी पैदा करता है। मैदान में घास सहित अन्य सुविधाओं की भी कमी है। उनका कहना है कि स्टेडियम में एथलेटिक्स ट्रैक और फुटबॉल मैदान को खेलने योग्य स्थिति में लाना जरूरी है। मौजूदा स्थिति में इन मैदानों पर नियमित अभ्यास करना मुश्किल है। हालांकि मल्टीपरपज हॉल बनने से खिलाड़ियों को लाभ मिलेगा, लेकिन शहर के दूसरे खेल परिसरों में भी सुविधाओं और रखरखाव पर ध्यान देने की जरूरत है।
मैदान बहुत, खेलने लायक कम
फुटबॉल खिलाड़ी भैरूरतन ओझा के अनुसार शहर में मैदानों की कमी नहीं है, लेकिन खेल इन्फ्रास्ट्रक्चर अधूरा है। फुटबॉल के लिए चैनसिंह स्टेडियम को छोड़कर अन्य स्थानों पर अभ्यास के दौरान खिलाड़ियों के चोटिल होने का खतरा बना रहता है। उनका कहना है कि केवल मैदान उपलब्ध करा देना पर्याप्त नहीं है। उसकी सतह, रखरखाव और दूसरी जरूरी सुविधाएं भी खेल के अनुरूप होनी चाहिए। बहुद्देश्यीय हॉल बने हैं, लेकिन वातानुकूलित नहीं होने से खिलाड़ियों को अभ्यास के दौरान परेशानी होती है।
300 से ज्यादा साइक्लिस्ट, वेलोड्रम अब भी अधूरा
बीकानेर में साइकिलिंग का आधार भी मजबूत है। साइकिल कोच किशन पुरोहित के अनुसार शहर में 300 से अधिक साइक्लिस्ट अभ्यास करते हैं, लेकिन उनके लिए वेलोड्रम की स्थिति संतोषजनक नहीं है। एक समय डॉ. करणी सिंह स्टेडियम में साइकिल वेलोड्रम था, जहां 10 से अधिक बड़ी प्रतियोगिताएं आयोजित हो चुकी हैं। बाद में इसे हटा दिया गया। इसके बाद महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय में वेलोड्रम तैयार किया गया, लेकिन यह तकनीकी रूप से अधूरा है और साइकिलिंग के लिहाज से पूरी तरह उपयोगी नहीं है। अब स्थिति यह है कि ट्रैक पर भी गड्ढे होने लगे हैं। ऐसे में साइकिलिस्टों के लिए सुरक्षित और मानक अभ्यास की सुविधा का सवाल फिर खड़ा हो गया है।
खेल प्रतिभा को चाहिए मैदान का साथ
बीकानेर के खिलाड़ियों की उपलब्धियां बताती हैं कि प्रतिभा और मेहनत दोनों मौजूद हैं। कमी यदि है, तो उन्हें बेहतर प्रशिक्षण देने वाले खेल के आधारभूत ढांचे की। मैदानों का नियमित रखरखाव, खेल उपकरण, पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था, पेयजल, शौचालय, चेंजिंग रूम और खेल के अनुरूप सतह जैसी सुविधाएं किसी भी खिलाड़ी के लिए अतिरिक्त सुविधा नहीं, बल्कि बुनियादी जरूरत हैं।
खेल दिवस पर सबसे बड़ा सवाल
बीकानेर पदक जीतने वाले खिलाड़ी तो तैयार कर रहा है, लेकिन क्या शहर उनके अगले पदक की तैयारी के लिए मैदान भी तैयार कर पा रहा है? खिलाड़ियों की प्रतिभा को पहचान और अवसर मिल रहा है, अब जरूरत है कि मैदान भी उस प्रतिभा के स्तर के हों।