
लाल बहादुर शास्त्री का अभिनन्दन करते गोविन्द नारायण शर्मा।
बीकानेर की शहर सरकार का इतिहास सिर्फ चुनावों और राजनीतिक उठापटक का नहीं, बल्कि तारीखों और महीनों का भी दिलचस्प रिकॉर्ड समेटे हुए है। आजादी के बाद के 79 साल के नगरीय इतिहास में 16 जनप्रतिनिधि 18 बार नगर पालिका अध्यक्ष, नगर परिषद सभापति या नगर निगम महापौर का दायित्व संभाल चुके हैं। इस इतिहास में नवंबर सबसे ‘भाग्यशाली’ महीना रहा है, जबकि फरवरी और जून ऐसे महीने हैं, जिनमें अब तक एक बार भी शहर की सरकार को नया अध्यक्ष, सभापति या महापौर नहीं मिला। इसी दिलचस्प संयोग में इस साल सितंबर एक बार फिर इतिहास दोहराने जा रहा है। 7 सितंबर 1972 को महेश सिंह ने नगर परिषद के सभापति के रूप में पदभार संभाला था। अब 9 सितंबर को नगर निगम का चुनाव होगा और इसी महीने शहर को नया महापौर मिलने वाला है।
नवंबर में अब तक 3 महापौर, 4 सभापति
नगर निगम बनने के बाद पिछले 18 वर्षों में नवंबर महीने में तीन महापौर ने पदभार संभाला। इनमें भवानी शंकर शर्मा, नारायण चौपड़ा और सुशीला कंवर राजपुरोहित शामिल हैं। इसी तरह नगर परिषद बीकानेर के इतिहास में नवंबर में चार सभापति ने पदभार संभाला। इनमें गोपाल कृष्ण जोशी, विजय कपूर, अखिलेश प्रताप सिंह और मकसूद अहमद शामिल हैं। यानी नवंबर के खाते में अब तक सात बार शहर की सरकार की कमान संभालने का रिकॉर्ड दर्ज है।
सितंबर में इस बार दूसरी बार ‘शहर की सरकार’
सितंबर में अब तक एक बार नगर परिषद की कमान बदली है। 7 सितंबर 1972 को महेश सिंह ने सभापति का पदभार संभाला था और अप्रैल 1973 तक इस पद पर रहे। अब 53 साल बाद सितंबर फिर चर्चा में है। 9 सितंबर को नगर निगम का चुनाव होना है और इसी माह नया महापौर चुना जाएगा। यानी सितंबर के कैलेंडर में दूसरी बार शहर की सरकार के मुखिया के पदभार संभालने का रिकॉर्ड जुड़ने जा रहा है।
फरवरी और जून का खाता अब तक खाली
79 वर्षों के नगरीय इतिहास में कैलेंडर के फरवरी और जून ऐसे दो महीने हैं, जिनमें अब तक एक बार भी बीकानेर नगर पालिका अध्यक्ष, नगर परिषद सभापति या नगर निगम महापौर ने पदभार नहीं संभाला। शहर की सरकार के मुखिया के पदभार की तारीखों में इन दोनों महीनों का नाम अब तक दर्ज नहीं हुआ है।
छह महीनों में सिर्फ एक-एक बार बदलाव
जनवरी: वैद्य गोविन्द नारायण शर्मा - 25 जनवरी 1964
मार्च: कांता खतूरिया - 1 मार्च 1963
अप्रैल: धूडाराम पारीक - 9 अप्रैल 1973
मई: द्वारका प्रसाद पुरोहित - 18 मई 1957
अगस्त: मकसूद अहमद - 22 अगस्त 2008, नगर निगम के पहले महापौर
सितंबर: महेश सिंह -7 सितंबर 1972
जुलाई-दिसंबर में भी दिलचस्प रिकॉर्ड
22 जुलाई 1952 को रावतमल पारीक नगर पालिका अध्यक्ष बने। इसके बाद 30 जुलाई 2001 को चतुर्भुज व्यास ने सभापति का कार्यभार संभाला। दिसंबर में भी दो अध्यक्षों ने पदभार संभाला। 2 दिसंबर 1947 को धनपतराय नगर पालिका अध्यक्ष बने, जबकि 9 दिसंबर 1954 को वैद्य गोविन्द नारायण शर्मा ने अध्यक्ष पद संभाला।
एक ही बोर्ड में सभापति भी, महापौर भी
बीकानेर के नगरीय इतिहास में मकसूद अहमद का रिकॉर्ड भी अलग है। उन्होंने एक ही बोर्ड के कार्यकाल में पहले सभापति और बाद में महापौर का दायित्व संभाला। वहीं वैद्य गोविन्द नारायण शर्मा ऐसे जनप्रतिनिधि रहे, जिन्हें नगर पालिका अध्यक्ष बनने का अवसर दो बार मिला।
तारीखों में दर्ज लोकतंत्र की कहानी
बीकानेर की शहर सरकार का यह रिकॉर्ड बताता है कि लोकतंत्र में सत्ता का बदलाव केवल राजनीतिक घटनाक्रम नहीं होता, उसकी अपनी एक तारीख और इतिहास भी बनता है। इस बार सितंबर में होने वाला महापौर चुनाव भी इसी इतिहास के कैलेंडर में एक नई तारीख जोड़ने जा रहा है।
Updated on:
29 Aug 2026 08:59 pm
Published on:
29 Aug 2026 08:59 pm
