
जयपुर के व्यापारी पर 1.41 करोड़ के जड़ाऊ आभूषण हड़पने का आरोप (फोटो-एआई)
Rajasthan Crime News: बीकानेर: जयपुर के एक व्यापारी पर बीकानेर के सर्राफा कारोबारियों के करीब एक करोड़ 41 लाख 61 हजार 365 रुपए मूल्य के सोने के जड़ाऊ आभूषण हड़पने का आरोप लगा है। मामले में न्यायालय के आदेश पर नयाशहर थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
परिवादी मुरलीधर व्यास कॉलोनी निवासी योगेश कुमार सोनी ने परिवाद में बताया कि वह बीकानेर और जयपुर के सर्राफा कारोबारियों के बीच आभूषणों की ब्रोकरेज का काम करता है। करीब डेढ़ साल पहले उसकी मुलाकात जयपुर निवासी आरोपी से हुई थी। आरोपी ने खुद को सोने के आभूषणों का व्यापारी बताते हुए बीकानेर के जड़ाऊ आभूषण जयपुर के व्यापारियों तक पहुंचाने का प्रस्ताव दिया।
परिवादी के अनुसार, शुरुआत में छोटे स्तर पर हुए लेन-देन में समय पर भुगतान मिलने से उसका विश्वास बढ़ गया। इसके बाद स्टांप पर इकरारनामा करने और ब्रोकरेज बढ़ाने का भरोसा देकर बड़े स्तर पर कारोबार शुरू किया गया।
परिवाद के अनुसार, 27 फरवरी 2026 को आरोपी बीकानेर आया और विभिन्न कारीगरों व व्यापारियों के जड़ाऊ आभूषण देखे। आरोप है कि उसने 14 जड़ाऊ सेट पसंद किए, जिनकी कुल कीमत 1.41 करोड़ रुपए से अधिक थी। इनमें महेंद्र सोनी, इंद्र सोनी, ऋतुराज सोनी, किशन सोनी, रमेश सोनी, आनंद सोनी और परिवादी योगेश कुमार सोनी के आभूषण शामिल थे।
आरोप है कि आरोपी ने सभी आभूषणों का लिखित इकरारनामा तैयार कर हस्ताक्षर किए और 15 दिन में भुगतान करने अथवा आभूषण नहीं बिकने पर वापस लौटाने का आश्वासन दिया। इसी भरोसे पर आभूषण उसे सौंप दिए गए।
परिवादी का आरोप है कि तय अवधि गुजरने के बाद भी भुगतान नहीं किया गया। वह कई बार जयपुर जाकर आरोपी से मिला, लेकिन कभी आभूषण व्यापारियों के पास होने तो कभी भुगतान अटकने की बात कहकर उसे टालता रहा। बाद में आरोपी ने फोन बंद कर दिया और अपने निवास पर भी नहीं मिला। परिवादी ने आरोप लगाया कि बाद में उसे जानकारी मिली कि आरोपी ने कुछ आभूषण बेचकर उनकी राशि का गबन कर लिया। आभूषण वापस मांगने पर भी कथित रूप से उसने इनकार कर दिया।
योगेश कुमार सोनी ने पहले नयाशहर थाने और जिला पुलिस अधीक्षक को शिकायत दी, लेकिन कार्रवाई नहीं होने पर कोर्ट में इस्तगासा पेश किया। परिवाद में छल, आपराधिक न्यासभंग, धोखाधड़ी, कूटरचना और विश्वास में लेकर आभूषण हड़पने सहित कई आरोप लगाए गए हैं। कोर्ट के आदेश पर नयाशहर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की है।
जड़ाऊ, भारत की एक प्राचीन और पारंपरिक आभूषण कला है, जिसका उद्गम मुगल काल में हुआ था और बाद में यह राजस्थान (विशेषकर जयपुर, बीकानेर) और गुजरात में अत्यधिक लोकप्रिय हुई। इस कला की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें सोने को बिना पिघलाए, उसकी ढलाई किए बिना, कीमती पत्थरों को बहुत ही बारीक काम के साथ सोने के ढांचे में जड़ा जाता है।
जड़ाऊ केवल एक आभूषण नहीं, बल्कि कई तकनीकों का संयोजन है। इसके अगले हिस्से में कुंदन काम (सोने की पतली पन्नी से हीरे, माणिक या पन्ना को जड़ना) होता है और पिछले हिस्से में रंगीन मीनाकारी की नक्काशी की जाती है। पत्थरों को बैठाने के लिए अत्यधिक लचीले और शुद्ध सोने (22 से 24 कैरट) की पतली परतों या पट्टियों का उपयोग किया जाता है।
इसमें मुख्य रूप से बिना तराशे हुए हीरे (पोल्का), माणिक, पन्ना और सच्चे मोतियों का प्रयोग होता है। इसे बनाने में मशीनों का प्रयोग नहीं होता। एक जड़ाऊ आभूषण को तैयार करने में कई कारीगरों (चितेरे, मीनाकार, जड़िया) की महीनों की मेहनत लगती है।
कुंदन- यह पत्थरों को सोने में जड़ने की तकनीक है और पोलकी- इसमें इस्तेमाल होने वाले बिना तराशे हीरों को कहा जाता है। जड़ाऊ- यह उस पूरी शिल्पकला और अंतिम आभूषण को कहा जाता है, जिसमें कुंदन, पोलकी, मीनाकारी और कीमती रत्नों को एक साथ पिरोया जाता है। यह आभूषण भारतीय संस्कृति में राजसी ठाट-बाट का प्रतीक माना जाता है और आज भी शादियों तथा खास अवसरों पर दुल्हन के मुख्य आभूषणों के रूप में पहली पसंद है।
Updated on:
28 Aug 2026 02:54 pm
Published on:
28 Aug 2026 02:54 pm
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