
कैंसर सेंटर में मरीजों की भीड़
आचार्य तुलसी कैंसर अनुसंधान केन्द्र में पिछले दो दिन से इंटरनेट सेवा बंद होने के कारण कैंसर रोगियों और उनके परिजनों की परेशानी बढ़ गई है। यहां अधिकांश काम ऑनलाइन होता है, ऐसे में इंटरनेट बंद होने का सीधा असर मरीजों की जांच, पंजीयन और अन्य चिकित्सकीय प्रक्रियाओं पर पड़ रहा है। दूर-दराज से उपचार के लिए पहुंच रहे मरीजों को इन कामों को लेकर इंतजार करना पड़ रहा है। कैंसर सेंटर में प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज उपचार, फॉलोअप और जांच के लिए पहुंचते हैं। ऑनलाइन व्यवस्था के माध्यम से मरीजों का रिकॉर्ड देखने, चिरंजीवी योजना के कार्ड बनाने, आरजीएचएस की पर्चियां तथा पंजीयन करने एवं जांच संबंधी प्रक्रिया और रिपोर्ट से जुड़े अन्य कार्य किए जाते हैं। इंटरनेट सेवा बाधित होने से कर्मचारियों को भी काम करने में दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है।
दो दिन से हो रहे परेशान
इलाज कराने के लिए बाहर से आए मरीजों के परिजनों का कहना है कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारी में उपचार की प्रक्रिया में देरी मरीजों के लिए परेशानी का कारण बनती है। कई मरीज पहले से निर्धारित समय पर उपचार और जांच के लिए सेंटर पहुंचते हैं, लेकिन इंटरनेट बंद होने से उन्हें अतिरिक्त समय तक इंतजार करना पड़ रहा है। जल्दी नंबर आने के चक्कर में सुबह से ही मरीज तथा परिजन कतार में लग जाते हैं। लेकिन जब कंप्यूटर पर काम शुरू किया जाता है तो इंटरनेट बंद मिलता है। ऐसे में मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है।
बाहर के मरीज ज्यादा
कैंसर सेंटर में बाहर के मरीजों की संख्या अधिक है। यहां श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, पंजाब, हरियाणा सहित कई राज्यों के मरीज इलाज कराने आते हैं। ऐसे में इंटरनेट बंद होने के कारण मरीजों को यहां पर रुकना पड़ता है। इस वजह से उन्हें मानसिक के साथ-साथ आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ता है।
व्यवस्था सुचारू कर दी गई
ट्रॉमा सेंटर के पीछे पेड़ गिरने से इंटरनेट की लाइन टूट गई थी। बाद में अस्पताल के सर्वर रूम के कार्मिकों को बुलाकर लाइन को दुरुस्त कराया गया। मरीजों को कोई परेशानी नहीं होने दी। अब चिरंजीवी की एक भी फाइल बकाया नहीं है।
-डॉ. नीति शर्मा, निदेशक कैंसर सेंटर
Updated on:
26 Aug 2026 07:49 pm
Published on:
26 Aug 2026 07:49 pm
