बीकानेर

देश में चुनाव आयोग की तर्ज पर बने उच्च शिक्षा आयोग

बीकानेर. देश में उच्च शिक्षा की स्थिति संतोषजनक नहीं है। जैसे चुनाव आयोग स्वतंत्र है, इसी तर्ज पर देश में उच्च शिक्षा आयोग बने। इसे संवैधानिक अधिकार हो और शिक्षा सम्बन्धी सभी निर्णय करने में स्वतंत्र हो। यह मन्तव्य बुधवार को अखिल भारतीय कुलपति एवं शिक्षाविद् संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व कुलपति प्रो. लोकेश कुमार शेखावत ने यहां पत्रिका के साथ विशेष बातचीत में जताया।
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Special conversation with Professor Lokesh Kumar Shekhawat
Special conversation with Professor Lokesh Kumar Shekhawat


बीकानेर. देश में उच्च शिक्षा की स्थिति संतोषजनक नहीं है। जैसे चुनाव आयोग स्वतंत्र है, इसी तर्ज पर देश में उच्च शिक्षा आयोग बने। इसे संवैधानिक अधिकार हो और शिक्षा सम्बन्धी सभी निर्णय करने में स्वतंत्र हो। यह मन्तव्य बुधवार को अखिल भारतीय कुलपति एवं शिक्षाविद् संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व कुलपति प्रो. लोकेश कुमार शेखावत ने यहां पत्रिका के साथ विशेष बातचीत में जताया।

उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा कि किसी भी राजनीतिक दल ने सत्ता संभाली हो, लेकिन सरकार ने विवि की शिक्षा को प्राथमिकता में नहीं रखा। सरकारों के पास विश्वविद्यालयी शिक्षा मद में हमेशा बजट का अभाव रहता है। स्कूली शिक्षा के लिए तो बजट यूएनओ से आता है तो सरकारें वह बजट दे देती हैं। विवि शिक्षा की हालत यह है कि राज्य में नए विवि के भवन नहीं है। प्रदेश में किसी भी विवि के पास यूजीसी नाम्र्स के अनुसार स्टाफ नहीं है। नए विवि के लिए आधारभूत संसाधनों का अभाव है।

तीन कमरों में कॉलेज
उन्होंने कहा कि अजमेर में एक कॉलेज तीन कमरों की धर्मशाला में चल रहा है। जोधपुर कृषि विवि के पास पर्याप्त भवन नहीं है। जोधपुर विवि में २० वर्षों से परीक्षा नियंत्रक एवं पुस्तकालय अध्यक्ष नहीं है। संघ का मानना है कि विवि में राज्य सरकार को फर्क नहीं करना चाहिए। इसमें स्वपोषित विवि, डीम्ड यूनिवर्सिटी, केन्द्रीय व राज्य विवि तथा निजी विवि को एक ही दृष्टि से देखा जाना चाहिए। इनका रेग्यूलेटरी कमीशन भी एक होना चाहिए।

राजनीतिक विचारधारा में नहीं बंधें
प्रो. शेखावत ने कहा कि शिक्षाविदों को किसी राजनीतिक विचाराधारा से नहीं बांधना चाहिए। शिक्षाविद् भी एेसी दासता को स्वीकार नहीं करें। उन्होंने कहा कि भाजपा ने नॉलेज कमीशन और यशपाल कमेटी बनाई। यूजीसी के एक सदस्य ने उनसे औपचारिक बातचीत में स्वीकार किया कि आयोग के मुद्दे पर विचार-विमर्श में उनको शामिल नहीं किया गया है।

Published on:
02 Aug 2018 10:09 am