बीकानेर

आबादी बढ़ी, अपराध बढ़े… लेकिन 15 साल से नहीं बढ़ी श्रीडूंगरगढ़ थाने की नफरी

राष्ट्रीय राजमार्ग पर बढ़ता यातायात, नशे का कारोबार, साइबर अपराधों में इजाफा, हत्या और हत्या के प्रयास जैसे गंभीर अपराधों की बढ़ती घटनाएं पुलिस के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर रही हैं, लेकिन इन सबके बावजूद पुलिस विभाग ने श्रीडूंगरगढ़ थाने की स्वीकृत नफरी में पिछले 15 वर्षों में कोई वृद्धि नहीं की है।
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Jul 29, 2026
पुलिस थाना श्रीडूंगरगढ़।
पुलिस थाना श्रीडूंगरगढ़।

श्रीडूंगरगढ़ में पिछले डेढ़ दशक में क्षेत्र की आबादी तेजी से बढ़ी है। इसके साथ अपराधों की संख्या, उनका स्वरूप और अपराधियों के तौर-तरीके भी बदल गए हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग पर बढ़ता यातायात, नशे का कारोबार, साइबर अपराधों में इजाफा, हत्या और हत्या के प्रयास जैसे गंभीर अपराधों की बढ़ती घटनाएं पुलिस के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर रही हैं, लेकिन इन सबके बावजूद पुलिस विभाग ने श्रीडूंगरगढ़ थाने की स्वीकृत नफरी में पिछले 15 वर्षों में कोई वृद्धि नहीं की है।

जानकारी के अनुसार वर्ष 2011 में पूरे क्षेत्र की आबादी करीब 2 लाख 41 हजार तथा थाना क्षेत्र की आबादी लगभग 1 लाख 70 हजार थी। वर्ष 2021 तक आबादी में करीब 23 प्रतिशत की वृद्धि हुई। वर्तमान अनुमान के अनुसार वर्ष 2026 में पूरे क्षेत्र की आबादी करीब 3 लाख 25 हजार पहुंच चुकी है। इसमें श्रीडूंगरगढ़ थाना क्षेत्र की आबादी लगभग 2 लाख 30 हजार तथा सेरुणा थाना क्षेत्र की आबादी करीब 95 हजार है। वर्ष 2012 में सेरुणा थाना बनने के बाद श्रीडूंगरगढ़ थाना क्षेत्र से करीब 86 हजार आबादी अलग हो गई, लेकिन इसके बावजूद श्रीडूंगरगढ़ थाने का कार्यभार कम नहीं हुआ।
15 साल से स्वीकृत नफरी यथावत

सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि वर्ष 2011 में श्रीडूंगरगढ़ थाने की स्वीकृत नफरी 50 थी और वर्ष 2026 में भी यह संख्या 50 ही बनी है। इससे भी अधिक गंभीर स्थिति यह है कि वर्तमान में केवल 35 पुलिसकर्मी ही कार्यरत हैं तथा 15 पद रिक्त हैं। दूसरी ओर सेरुणा थाने में 49 पद स्वीकृत हैं, जिनमें से 42 पर ही कार्मिक कार्यरत हैं। यानी दोनों थानों में कुल 22 पद खाली हैं। ऐसे में सीमित पुलिस बल के भरोसे कानून व्यवस्था बनाए रखना पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।
अपराधों का बदलता चेहरा

बीते वर्षों में अपराध केवल चोरी और मारपीट तक सीमित नहीं रहे। नशे के कारोबार, हत्या, हत्या के प्रयास, महिला अपराध, साइबर ठगी, ऑनलाइन फ्रॉड और संगठित अपराध जैसी घटनाओं में बढ़ोतरी हुई है। केवल वर्ष 2026 में अब तक श्रीडूंगरगढ़ थाने में हत्या के प्रयास के आठ मुकदमे दर्ज हो चुके हैं। ऐसे गंभीर मामलों की विवेचना, गिरफ्तारी और न्यायालयीन प्रक्रिया में भी पर्याप्त पुलिस बल की आवश्यकता होती है।
हाईवे और हादसे, पुलिस पर दोहरा दबाव

श्रीडूंगरगढ़ कस्बे के बीच से गुजरने वाला राष्ट्रीय राजमार्ग पुलिस की जिम्मेदारी को और बढ़ा देता है। लगातार बढ़ते यातायात के कारण सड़क दुर्घटनाओं में वृद्धि हुई है। दुर्घटनाओं के दौरान यातायात सुचारू कराना, घायलों को अस्पताल पहुंचाना, मौके की कार्रवाई, जाम खुलवाना और कानूनी प्रक्रिया पूरी करना भी स्थानीय पुलिस के जिम्मे रहता है। हाईवे होने के कारण वीआईपी मूवमेंट, दुर्घटनाएं और आपातकालीन स्थितियों में भी पुलिस बल की लगातार आवश्यकता रहती है।
सीमित स्टाफ, असीमित जिम्मेदारियां

पुलिसकर्मियों की कमी का सीधा असर कानून व्यवस्था पर दिखाई देता है। एक ही पुलिसकर्मी को कानून व्यवस्था, गश्त, न्यायालय पेशी, विवेचना, वीआइपी ड्यूटी, त्योहारों की व्यवस्था, धरना-प्रदर्शन, दुर्घटना, साइबर शिकायतों और अन्य प्रशासनिक कार्यों में लगाया जाता है। लगातार अतिरिक्त ड्यूटी के कारण पुलिसकर्मियों पर मानसिक और शारीरिक दबाव भी बढ़ रहा है। इससे कई बार शिकायतों के त्वरित निस्तारण, नियमित गश्त, अपराधियों पर निगरानी तथा जांच कार्यों में भी देरी की स्थिति बन जाती है।
आंकड़े बता रहे बढ़ता दबाव

वर्ष 2011 में श्रीडूंगरगढ़ थाने में कुल 624 मुकदमे दर्ज हुए थे। वर्ष 2012 में सेरुणा थाना बनने के बाद भी श्रीडूंगरगढ़ थाने का मुकदमों का भार अपेक्षित रूप से कम नहीं हुआ। वर्ष 2021 में 374 तथा वर्ष 2024 में 565 मुकदमे दर्ज हुए। यह दर्शाता है कि थाना क्षेत्र छोटा होने के बावजूद अपराधों का दबाव लगातार बना है।
अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण

रिक्त पदों और आवश्यकताओं की जानकारी समय-समय पर उच्चाधिकारियों को भेजी जाती है। आमजन के सहयोग और आधुनिक तकनीक के बेहतर उपयोग से पुलिस अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए निरंतर कार्य कर रही है।
निकेत पारीक, वृताधिकारी, श्रीडूंगरगढ़

लगातार प्रयास जारी
थाने में उपलब्ध पुलिस बल के साथ कानून व्यवस्था बनाए रखने और अपराधियों पर निगरानी रखने का कार्य किया जा रहा है। स्टाफ की कमी के बावजूद प्रत्येक शिकायत पर गंभीरता से कार्रवाई की जाती है। जनता के सहयोग से अपराध नियंत्रण और बेहतर पुलिसिंग के लिए लगातार प्रयास जारी हैं।

कश्यप सिंह राघव, थानाधिकारी, श्रीडूंगरगढ़।

Updated on:
29 Jul 2026 08:12 pm
Published on:
29 Jul 2026 08:12 pm