
नगर निगम की जेसीबी किराया निविदा अब सवालों के घेरे में है। जिस फर्म को आठ घंटे के लिए महज एक रुपए की दर पर जेसीबी उपलब्ध कराने का कार्यादेश दिया गया, उसी फर्म ने अब निगम की ओर से 80 जेसीबी मशीनें उपलब्ध कराने के आदेश को अव्यावहारिक बताते हुए पुनर्विचार की मांग कर दी है। इससे निगम की टेंडर प्रक्रिया और निविदा स्वीकृति पर सवाल उठने लगे हैं। दरअसल, नगर निगम ने फरवरी 2025 में जेसीबी मशीनों के संचालन के लिए निविदाएं आमंत्रित की थीं। दो फर्मों ने भाग लिया। एक फर्म ने चार मदों के लिए कुल 7,650 रुपए, जबकि दूसरी ने 10,864 रुपए की दरें प्रस्तुत कीं। सबसे कम बोली लगाने वाली फर्म ने दो मदों में 3,288 और 4,344 रुपए प्रतिदिन की दर दी, जबकि जेसीबी एवं ब्रेकर से संबंधित दो मदों में आठ घंटे के लिए मात्र एक रुपए की दर अंकित की। सबसे कम बोली होने के कारण निगम ने इसी फर्म को दो वर्ष के लिए कार्यादेश जारी कर दिया।
मानसून से पहले निगम ने मांगी 80 जेसीबी
मानसून और संभावित आपदा प्रबंधन को देखते हुए नगर निगम आयुक्त सिद्धार्थ पलानीचामी ने 19 जून को भगवती रिफिलर सर्विस प्रा. लि. को पत्र लिखकर कचरा, मलबा हटाने, नाला सफाई, अतिक्रमण हटाने तथा आपातकालीन कार्यों के लिए चालक और पीओएल सहित 80 बैकहो लोडर (जेसीबी) तीन दिन के भीतर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
फर्म बोली…टेंडर में ऐसी शर्त नहीं
आयुक्त के पत्र के अगले दिन, 20 जून को फर्म ने जवाब भेजकर कहा कि तीन दिन के भीतर 80 जेसीबी मशीनों की व्यवस्था करना किसी भी सेवा प्रदाता की क्षमता से बाहर है। फर्म ने यह भी कहा कि न तो निविदा शर्तों और न ही लेटर ऑफ एक्सेप्टेंस में एक साथ 80 मशीनें उपलब्ध कराने का कोई प्रावधान है। इसलिए आदेश पर पुनर्विचार किया जाए।
अब निगम करेगा सुनवाई नगर निगम आयुक्त सिद्धार्थ पलानीचामी ने बताया कि मानसून की तैयारियों के मद्देनजर जेसीबी मशीनों की मांग की गई थी। फर्म का जवाब प्राप्त हो गया है। सोमवार को फर्म के प्रतिनिधियों को बुलाकर उनका पक्ष सुना जाएगा। आवश्यकता होने पर उन्हें अतिरिक्त समय देने पर भी विचार किया जाएगा।
जरूरत हुई, तो समय देने पर विचार
मानसून की तैयारियों के लिए जेसीबी मशीनों की आवश्यकता को लेकर पत्र भेजा गया था। फर्म का जवाब मिला है। सोमवार को उनका पक्ष सुनेंगे। जरूरत पड़ी तो समय देने पर भी विचार किया जाएगा।
पुनर्विचार का अनुरोध किया है
तीन दिन में 80 जेसीबी मशीनें, ऑपरेटर और अन्य संसाधन उपलब्ध कराना संभव नहीं है। इसलिए आदेश पर पुनर्विचार का अनुरोध किया गया है।