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बारिश से पहले स्कूलों का सेफ्टी ऑडिटः जर्जर भवनों में पढ़ाई पर रोक

विभाग ने स्पष्ट किया है कि किसी भी जर्जर, असुरक्षित अथवा छत टपकने वाले कक्षा-कक्ष में विद्यार्थियों को नहीं बैठाया जाएगा।
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निदेशालय

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प्रदेश में तीन दिन बाद विद्यालय खुलने और मानसून की दस्तक से पहले शिक्षा विभाग ने सरकारी स्कूलों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर व्यापक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि किसी भी जर्जर, असुरक्षित अथवा छत टपकने वाले कक्षा-कक्ष में विद्यार्थियों को नहीं बैठाया जाएगा। साथ ही विद्यालय भवनों की छतों की सफाई, वर्षा जल निकासी की व्यवस्था दुरुस्त करने और जलभराव रोकने के निर्देश दिए गए हैं। शिक्षा निदेशक सीताराम जाट ने संस्था प्रधानों, जिला एवं ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि विद्यालय खुलते ही भवनों का सुरक्षा निरीक्षण कराया जाए। जर्जर दीवार, उखड़े प्लास्टर, कमजोर छत या अन्य किसी असुरक्षित स्थिति की पहचान होते ही तत्काल आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

असुरक्षित भवनों की होगी बैरिकेडिंग
विभाग ने स्पष्ट किया है कि जर्जर या जोखिम वाले भवनों एवं कक्षों में विद्यार्थियों का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। ऐसे स्थानों पर बैरिकेडिंग कर उन्हें बंद किया जाएगा तथा आवश्यकता पड़ने पर वैकल्पिक सुरक्षित भवनों में शिक्षण व्यवस्था संचालित की जाएगी। अत्यधिक जर्जर भवनों को नियमानुसार ध्वस्त कराने के भी निर्देश दिए गए हैं। निर्देशों में प्रत्येक विद्यालय में आपदा प्रबंधन की तैयारियों को अनिवार्य बताया गया है। विद्यालयों को सुरक्षित निकास योजना तैयार करने, विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को आग, बिजली, बाढ़, भूकंप, भूस्खलन और सड़क दुर्घटना जैसी आपात स्थितियों से निपटने का प्रशिक्षण देने तथा प्राथमिक उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है।

पेयजल, शौचालय और बिजली व्यवस्था पर भी फोकस
शिक्षा विभाग ने स्वच्छ पेयजल, पानी की टंकियों और वर्षा जल संचयन प्रणाली की नियमित सफाई, शौचालयों में पर्याप्त पानी, छात्राओं के लिए पृथक शौचालय तथा बिजली की सुरक्षित वायरिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। खुले बिजली के तारों और अन्य संभावित जोखिमों को तत्काल दूर करने को भी कहा गया है।

अस्पताल, पुलिस और फायर स्टेशन के नंबर होंगे प्रदर्शित
प्रत्येक विद्यालय में निकटतम अस्पताल, स्वास्थ्य केंद्र, पुलिस थाना और अग्निशमन केंद्र के संपर्क नंबर सूचना पट्ट पर प्रदर्शित किए जाएंगे। साथ ही संभाग, जिला और ब्लॉक स्तर के अधिकारियों को केवल कागजी रिपोर्ट पर निर्भर रहने के बजाय अधिक से अधिक विद्यालयों का आकस्मिक निरीक्षण कर सुरक्षा व्यवस्थाओं का भौतिक सत्यापन करने के निर्देश दिए गए हैं।