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शिक्षकों को एक और जिम्मेदारी: पढ़ाई के साथ करनी होगी बच्चों की विजन स्क्रीनिंग

राज्य सरकार ने 1 से 15 जुलाई के बीच सभी सरकारी स्कूलों में स्नेलेन चार्ट के माध्यम से विद्यार्थियों की दृष्टि जांच कराने के निर्देश जारी किए हैं।
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बीकानेर

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Brijesh Singh

•

Updated: 27 Jun 2026, 8:54 PM IST

स्नेलेन चार्ट का प्रारूप

स्नेलेन चार्ट का प्रारूप

सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को अब एक और गैर-शैक्षणिक जिम्मेदारी सौंपी गई है। पहले से जनगणना, चुनाव, मिड-डे मील, विभिन्न जागरूकता अभियानों सहित अनेक प्रशासनिक कार्यों में लगे शिक्षकों को अब विद्यार्थियों की आंखों की प्रारंभिक जांच भी करनी होगी। राज्य सरकार ने 1 से 15 जुलाई के बीच सभी सरकारी स्कूलों में स्नेलेन चार्ट के माध्यम से विद्यार्थियों की दृष्टि जांच कराने के निर्देश जारी किए हैं। हालांकि, शिक्षक संगठनों ने इस पर यह कहते हुए सवाल उठाए हैं कि जिस जांच के लिए अस्पतालों में प्रशिक्षित तकनीकी कार्मिक नियुक्त किए जाते हैं, वही जिम्मेदारी बिना विशेष प्रशिक्षण के शिक्षकों को कैसे सौंपी जा सकती है। राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद की अतिरिक्त राज्य परियोजना निदेशक सीमा शर्मा ने सभी मुख्य जिला शिक्षा अधिकारियों एवं पदेन जिला परियोजना समन्वयकों को निर्देश जारी कर स्कूलों में अध्ययनरत प्रत्येक विद्यार्थी की दृष्टि का प्रारंभिक परीक्षण कराने को कहा है। इसके लिए स्कूलों को स्नेलेन चार्ट कंपोजिट ग्रांट सहित उपलब्ध मदों से खरीदने होंगे।

ऐसे होगी आंखों की जांच
निर्देशों के अनुसार, कक्षा में स्नेलेन चार्ट दीवार पर लगभग पांच फीट ऊंचाई पर लगाया जाएगा। विद्यार्थी को चार्ट से छह मीटर दूर खड़ा किया जाएगा। एक आंख बंद कर 6/12 लाइन के 'ई' अक्षर की दिशा (ऊपर, नीचे, दाएं या बाएं) बतानी होगी। यदि विद्यार्थी सही दिशा नहीं बता पाता है, तो उसे दृष्टि दोष की आशंका वाला मानकर आगे चिकित्सकीय जांच के लिए चिन्हित किया जाएगा। ऐसे विद्यार्थियों का विवरण निर्धारित प्रपत्र में दर्ज किया जाएगा।

अस्पतालों में प्रशिक्षित कर्मी करते हैं यह जांच
विशेषज्ञों के अनुसार स्नेलेन चार्ट से दृष्टि परीक्षण सामान्य प्रक्रिया जरूर है, लेकिन अस्पतालों में यह कार्य प्रशिक्षित ऑफ्थैल्मिक टेक्नीशियन, ऑफ्थैल्मिक असिस्टेंट, विजन टेक्नीशियन अथवा ऑप्टोमेट्रिस्ट करते हैं। इन पदों के लिए डिप्लोमा इन ऑफ्थैल्मिक टेक्नीशियन (डीओटी), डिप्लोमा इन ऑफ्थैल्मिक असिस्टेंट (डीओए) अथवा विजन असिस्टेंट जैसे पाठ्यक्रम आवश्यक माने जाते हैं। इन पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए 12वीं (पीसीबी/पीसीएम) न्यूनतम योग्यता होती है तथा दो वर्षीय प्रशिक्षण दिया जाता है।

शिक्षक संगठनों ने उठाए सवाल
शिक्षक संगठनों का कहना है कि सरकार लगातार शिक्षकों पर गैर-शैक्षणिक कार्यों का बोझ बढ़ा रही है। उनका तर्क है कि यदि किसी कार्य के लिए तकनीकी प्रशिक्षण और डिप्लोमा आवश्यक माना जाता है, तो उसी कार्य के लिए बिना प्रशिक्षण शिक्षकों को जिम्मेदारी देना उचित नहीं है। उनका कहना है कि इससे शिक्षण कार्य भी प्रभावित होगा और अनावश्यक जवाबदेही भी शिक्षकों पर आएगी।