
बीकानेर . स्वास्थ्य विभाग नि:शुल्क जांच योजना के माध्यम से मरीजों को लाभान्वित करने के दावे करें मगर जिला अस्पताल में पहुंच रहे रोगियों को सोनोग्राफी के लिए एक-एक महीने इंतजार करना पड़ रहा है। ऐसे में मरीज अस्पताल से बाहर निजी लैबों में सोनोग्राफी कराने के लिए मजबूर हो रहे हैं।
अस्पताल में महज एक सोनोलॉजिस्ट की नियुक्ति के कारण सप्ताह में पांच दिन ही सोनोग्राफी हो रही है। एक दिन सोनोलॉजिस्ट का साप्ताहिक अवकाश होने व एक दिन रात्रिकालीन ड्यूटी पर होने के चलते सप्ताह में दो दिनों मरीजों की सोनोग्राफी नहीं होती है।
हर दिन 45 सोनोग्राफी
यहां पर एसपी मेडिकल कॉलेज के सोनोलॉजिस्ट डॉ. अमित अरोड़ा को डेपुटेशन पर लगाया गया है। हर दिन 45 से करीब सोनोग्राफी होती है। मरीजों की संख्या अधिक होने से उन्हें 25 से 30 दिन बाद की तारिख दी जाती है। एक चिकित्सक होने से अधिकतम प्रतिदिन 30 सोनोग्राफी ही हो पाती है। जबकि जिला अस्पताल में औसत ४५ से ५० मरीजों के सोनोग्राफी की आवश्यकता जताई जाती है।
सरकारी में नि:शुल्क, निजी में मोटी फीस
सरकारी अस्पतालों में मुख्यमंत्री नि:शुल्क जांच योजना के तहत सोनोग्राफी व एक्स-रे सहित कई तरह की जांचें नि:शुल्क की जाती है। सोनोग्राफी के निजी लैब में 800 से 1000 रुपए तक लिए जाते हैं। जिला अस्पताल में पहुंचने वाले अधिकांश मरीज सोनोग्राफी निजी लैब से कराते हैं।
कोई सुनवाई नहीं
तीन बार सोनोग्राफी के लिए आ चुके हैं। हर बार सोमवार या शुक्रवार को आने का जवाब मिलता हैं। सोनोग्राफी की जरूरत आज है और यहां कर ही नहीं रहे हैं। ऐसे में मजबूरन निजी लैब से जांच कराई है। डॉक्टरों को शिकायत की लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
सावित्री देवी, मरीज की परिजन
पीएमओ डॉ. बीएल हटीला से बातचीत
सवाल : सोनोग्राफी कितने दिन होती है और वर्तमान में क्या व्यवस्था है?
-भर्ती एवं इमरजेंसी मरीजों की रोजाना जांच करते हैं। शेष मरीजों को तारीख दी जाती है।
सवाल : रात्रिकालीन ड्यूटी लगाने से सप्ताह में दो दिन सोनोग्राफी जांच नहीं होती क्या?
-ऐसा नहीं है। इमरजेंसी के दौरान ही रात्रिकालीन ड्यूटी लगाई जाती है, हमेशा नहीं।
सवाल : रात को आने वाले मरीजों को रजिस्ट्रेशन कराने में परेशानी होती है।
-एक-दो दिन में स्थायी रूप से मरीजों के रजिस्ट्रेशन की सुविधा शुरू कर दी जाएगी।