
Health Alert: अब गंजापन केवल पुरुषों की समस्या नहीं रहा। तेजी से बदलती जीवनशैली, पोषण की कमी और बढ़ता मानसिक तनाव महिलाओं के सिर से भी घने बाल छीन रहा है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े चौंकाते हैं…छत्तीसगढ़ में 61 प्रतिशत महिलाएं एनीमिया से पीड़ित हैं, जबकि बिलासपुर जिले में 40 प्रतिशत से अधिक महिलाएं इसकी शिकार हैं। वहीं लगभग 30 प्रतिशत महिलाएं थायरॉइड विकार से जूझ रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यही कारण महिलाओं में तेजी से बढ़ते हेयर फॉल और गंजेपन का बड़ा कारण बन रहा है।
बाल झड़ना अब सामान्य समस्या नहीं, बल्कि शरीर के भीतर चल रही गंभीर गड़बड़ी का संकेत है। पोषण की कमी, आयरन की कमी से होने वाला एनीमिया और हार्मोनल असंतुलन (थायरॉइड) सीधे बालों की जड़ों को कमजोर करते हैं। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट बताती है कि राज्य में हर दूसरी से अधिक महिला खून की कमी से जूझ रही है। ऐसे में बालों का पतला होना, टूटना और आगे चलकर गंजापन स्वाभाविक परिणाम बनता जा रहा है।
डॉक्टरों के अनुसार, थायरॉइड हार्मोन का असंतुलन बालों की ग्रोथ साइकिल को प्रभावित करता है। हाइपोथायरॉइडिज्म में बाल रूखे, बेजान और तेजी से झड़ने लगते हैं। इसके साथ यदि तनाव जुड़ जाए तो स्थिति और गंभीर हो जाती है। लगातार मानसिक दबाव से हेयर फॉलिकल्स ‘रेस्टिंग फेज’ में चले जाते हैं, जिससे बाल तेजी से गिरने लगते हैं।
डॉक्टरों के अनुसार, गंजापन केवल सौंदर्य का नहीं, सेहत का संकेत है। यदि समय रहते जांच, संतुलित आहार और सही इलाज अपनाया जाए तो बालों को दोबारा मजबूत बनाया जा सकता है। महिलाएं सतर्क रहें, क्योंकि स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ और घने बाल संभव हैं।
डॉक्टरों के अनुसार दोनों समस्याओं से बचने हरी पत्तेदार सब्जियां, चुकंदर, गुड़, दालें, अनार, अंडा व आयरन सप्लीमेंट (डॉक्टर की सलाह से) लें।
अक्सर महिलाएं बाल झडऩे को केवल कॉस्मेटिक समस्या मानती हैं, जबकि यह शरीर में आयरन, विटामिन बी 12, फोलिक एसिड की कमी या थायरॉइड गड़बड़ी का संकेत हो सकता है। समय रहते जांच और उपचार न कराया जाए तो स्थायी गंजापन हो सकता है। बदलती जीवनशैली, अनियमित खानपान, जंक फूड और पर्याप्त नींद न लेना भी बड़ी वजह हैं। खासकर प्रसव के बाद और 30 वर्ष की उम्र के बाद महिलाओं में यह समस्या तेजी से बढ़ती देखी जा रही है।