बिलासपुर

Jaggi Murder Case: जग्गी हत्याकांड में बड़ा फैसला! अमित जोगी को 3 हफ्ते में सरेंडर का आदेश

Jaggi Murder Case: जग्गी हत्याकांड मामले में हाईकोर्ट ने अमित जोगी को दोषी मानते हुए 3 सप्ताह के भीतर सरेंडर करने के निर्देश दिए। फैसले पर जोगी ने नाराजगी जताते हुए सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कही।

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अमित जोगी जग्गी हत्याकांड में दोषी करार (photo source- Patrika)

Jaggi Murder Case: जग्गी हत्याकांड से जुड़े बहुचर्चित मामले में एक बार फिर बड़ा मोड़ आया है। हाईकोर्ट ने इस मामले में अहम फैसला सुनाते हुए अमित जोगी को तीन सप्ताह के भीतर सरेंडर करने के निर्देश दिए हैं। अदालत के इस फैसले के बाद प्रदेश की राजनीति और कानूनी हलकों में हलचल तेज हो गई है।

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Jaggi Murder Case: बिना सुनवाई के ही मान लिया गया दोषी

फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए अमित जोगी ने गहरी नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय ने केंद्रीय जांच एजेंसी (CBI) की अपील को महज 40 मिनट के भीतर स्वीकार कर लिया और उन्हें अपनी बात रखने का कोई अवसर नहीं दिया गया। उनका कहना है कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिस व्यक्ति को पहले अदालत द्वारा दोषमुक्त कर दिया गया था, उसे बिना सुनवाई के ही दोषी मान लिया गया।

अमित जोगी ने इसे अपने साथ हुआ गंभीर अन्याय बताया है। उन्होंने कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है और वे इस फैसले के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे। उन्होंने विश्वास जताया कि अंततः उन्हें न्याय जरूर मिलेगा। उन्होंने अपने समर्थकों से शांत रहने और उनके लिए प्रार्थना करने की अपील भी की। साथ ही उन्होंने कहा कि वे पूरे धैर्य, आस्था और संयम के साथ आगे की कानूनी प्रक्रिया का सामना करेंगे और सत्य की जीत निश्चित है।

मामले को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में लाया…

यह मामला साल 2003 के चर्चित जग्गी हत्याकांड से जुड़ा हुआ है। 4 जून 2003 को एनसीपी नेता रामावतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी, जिससे पूरे प्रदेश में सनसनी फैल गई थी। इस केस में कुल 31 लोगों को आरोपी बनाया गया था। इनमें से बल्टू पाठक और सुरेंद्र सिंह सरकारी गवाह बन गए थे, जबकि बाकी आरोपियों पर मुकदमा चला।

Jaggi Murder Case: अमित जोगी को छोड़कर अन्य 28 आरोपियों को दोषी ठहराया गया था। हालांकि 31 मई 2007 को रायपुर की विशेष अदालत ने सबूतों के अभाव में अमित जोगी को बरी कर दिया था। इस फैसले को चुनौती देते हुए मृतक रामावतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की थी। उस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने अमित जोगी के पक्ष में स्टे दे दिया था।

बाद में सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले को पुनः सुनवाई के लिए हाईकोर्ट को भेज दिया था। अब हाईकोर्ट द्वारा दिए गए इस ताजा फैसले ने पूरे मामले को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अमित जोगी इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में क्या कदम उठाते हैं और आगे कानूनी प्रक्रिया किस दिशा में जाती है।

Updated on:
02 Apr 2026 12:54 pm
Published on:
02 Apr 2026 12:53 pm
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