8 नवंबर से हुई नोटबंदी ने जनता की जेब खाली कर दी थी। इससे ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों के खिलाफ ट्रैफिक पुलिस की चालानी कार्रवाई ठप रही। 10 महीने तक हुई चालानी कार्रवाई का 30 फीसदी भी नोटबंदी के बाद पुलिस वसूल नहीं कर पाई। हालांकि वर्ष 2016 में ट्रैफिक पुलिस ने डेढ़ करोड़ रुपए राजस्व वसूली की है। 8 नवंबर से नोटबंदी के बाद ट्रैफिक पुलिस की चालानी कार्रवाई से खासा असर पड़ा। नगदी मिलने में दिक्कत की वजह से पुलिस ने बाइक और चार पहिया वाहन चालकों पर कार्रवाई करना बंद कर दिया था। पकड़े जाने पर लोग हजार-पांच सौ के पुराने नोट देने लगे थे। इन्हें बैंक में जमा करने के झंझट से बचने के लिए पुलिस को अपनी कार्रवाई रोकनी पड़ी थी।
नवंबर में पुलिस ने 1387 प्रकरणों में चालान करके 5 लाख 29 हजार 500 रुपए जुर्माना वसूल किया। वहीं दिसंबर में 1895 प्रकरणों में 5 लाख 19 हजार रुपए वसूल किए। जबकि अक्टूबर और उससे पहले 9 महीनों में प्रतिमाह औसतन 15 लाख रुपए वसूल किए गए थे। वर्ष 2016 में 52285 प्रकरणों में ट्रैफिक पुलिस ने 1 करोड़ 56 लख 81 हजार 600 रुपए राजस्व वसूल किया।
नोट जमा करने पहुंचे तो आई ये दिक्कत
ट्रैफिक पुलिस द्वारा प्रतिदिन वसूल की राशि दूसरे दिन बैंक में जमा की जाती है। 8 नवंबर को ट्रैफिक पुलिस द्वारा वसूल की गई राशि को दूसरे दिन पुलिस कर्मी खाते में जमा करने बैंक पहुंचे तो बैंक कर्मियों ने आईडी प्रूफ के बिना रकम लेने से इनकार कर दिया था। इसके बाद एक सप्ताह तक बैंक के चक्कर लगाने पड़े थे। इसके बाद पुलिस ने पुराने नोटों के जमा करने के झंझट से मुक्ति पाने के लिए चालानी कार्रवाई बंद कर दी थी।
सीटबेल्ट, हेलमेट, रेड सिग्नल जंप, व नो-पार्किंग की कार्रवाई ने बचाई लाज
नवंबर और दिसंबर में ट्रैफिक पुलिस ने चालानी कार्रवाई का टारगेट के अनुरूप वसूली करने के लिए हेलमेट, सिग्नल जंप, तीन सवारी, नो पार्किंग और सीट बेल्ट की कार्रवाई करते हुए चालान वसूल किया था। नवंबर महीने में पुलिस ने नो पार्किंग के 527, रेड सिग्नल जंप के 277, तीन सवारी के 271, बिना हेलमेट के 64 और सीट बेल्ट के 261 प्रकरणों में चालान किया था। वहीं दिसंबर महीने में नो पार्किंग के 172, रेड सिग्नल जंप के 142, तीन सवारी के 144, बिना हेलमेट के 423 और सीट बेल्ट के 167 प्रकरणों में चालान किया है।
12 महीनों में चालानी कार्रवाई