Bilaspur Highcourt: बिलासपुर हाईकोर्ट ने मंगलवार को बीएड, डीएलएड व बीएससी एग्रीकल्चर व हार्टिकल्चर की लंबित काउंसिलिंग कराने का आदेश जारी किया है। सिंगल बेंच ने फैसला सुनाते हुए कहा कि शासन स्तर पर आरक्षण के नियमों पर फैसला बाद में भी लिया जा सकता है मगर इसके कारण छात्रों का साल बरबाद नहीं होना चाहिए।
Bilaspur Highcourt: हाईकोर्ट ने मंगलवार को बीएड, डीएलएड व बीएससी एग्रीकल्चर व हार्टिकल्चर की लंबित काउंसिलिंग कराने का आदेश दिया है। कालेज एसोसिएशन द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के बाद जस्टिस सैम कोशी(Bilaspur Highcourt)की सिंगल बेंच ने आदेश दिया है कि 31 दिसंबर से पहले हर हाल में काउंसिलिंग की प्रक्रिया पूरी की जाए। सिंगल बेंच ने कहा है कि शासन स्तर पर आरक्षण के नियमों पर फैसला बाद में भी लिया जा सकता है लेकिन छात्रों का साल बरबाद नहीं होना चाहिए।
छत्तीसगढ़ में वर्तमान में लागू आरक्षण व्यवस्था के हिसाब से काउंसिलिग की प्रक्रिया पूरी की जाए। बता दें कि बीएड, डीएलएड के कालेजों में एससीईआरटी और बीएससी एग्रीकल्चर व हार्टिकल्चर की सीटों पर एडमिशन की प्रक्रिया इंदिरा गांधी कृषि विवि द्वारा पूरी की जाती है। प्रवेश परीक्षा के बाद अक्टूबर तक काउंसिलिंग का पहला चरण तो पूरा हुआ। लेकिन बाद में हाईकोर्ट के 50 प्रतिशत तक ही आरक्षण लागू किए जाने के आदेश के बाद इस पर रोक लग गई थी।
काउंसिलिंग की मांग को लेकर बीएड, डीएलएड कालेज एसोसिएशन ने अधिवक्ता क्षितिज शर्मा के माध्यम से हाईकोर्ट (Bilaspur Highcourt)में याचिका दायर की। जानकारी के मुताबिक इस साल बीएड की 14 हजार 400 सीटें, डीएलएड की 6710 सीटें और एग्री-हार्टिकल्चर की 2600 सीटों पर काउंसिलिंग होनी है।
फार्मेसी की तरह ही होगी काउंसिलिंग प्रक्रिया
याचिका(Bilaspur Highcourt) में कहा गया कि प्रदेश में आरक्षण पर पेंच दो महीने से फंसा है। सुप्रीम कोर्ट ने 31 दिसंबर तक की डेडलाइन जारी की है। इस तिथि से पहले यदि काउंसिलिंग नहीं हो पाई तो सत्र जीरो ईयर घोषित हो जाएगा। कोर्ट में यह भी कहा गया कि एक दिन पहले ही हाईकोर्ट(Bilaspur Highcourt) की डिवीजन बेंच ने बी-फार्मेसी और डी-फार्मेसी की काउंसिलिंग करने के निर्देश दिए हैं।