High Court: बिलासपुर के बृहस्पति बाजार में 450 से अधिक सब्जी व्यापारियों को हटाने की नगर निगम की कार्रवाई पर फिलहाल रोक लग गई है।
Bilaspur High Court: बृहस्पति बाजार के सब्जी व्यापारियों को हटाने पर बिलासपुर हाईकोर्ट ने रोक लगाते हुए यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। नगर निगम ने बाजार के 450 से अधिक चबूतरे वालों को सात दिन में जगह खाली करने का नोटिस जारी किया था।
व्यापारियों को नोटिस में निगम ने नए रिवर व्यू और मुन्नूलाल शुक्ला स्कूल में शिफ्ट होने कहा था। इसके खिलाफ व्यापारियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर निगम के नोटिस को गलत बताया था। व्यापारियों की ओर से कहा गया कि बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के निगम सब्जी व्यापारियों को हटा रहा है। नई जगह पर निगम ने शेड और चबूतरे नहीं बनाए गए और न कोई व्यवस्था की है।
याचिका में कहा गया कि निगम नई जगह पर शिफ्टिंग के साथ ही मल्टी लेवल सब्जी बाजार बनाए जाने के बाद व्यापारियों को फिर से जगह आवंटित करने की बात कह रहा है लेकिन निगम ने इसके लिए पहले से कोई गाइडलाइन तय नहीं की है। नया बाजार बन जाने के बाद किन व्यापारियों को कितनी जगह, किन शर्तों पर दी जाएंगी इस बारे में निगम का कोई अधिकारी बोलने को तैयार नहीं है। अगर नई दुकान का किराया या प्रीमियम लिया जाएगा तो कितना होगा, इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी जा रही है।
शहर के प्रमुख चिल्हर सब्जी बाजारों में से एक बृहस्पति बाजार को मल्टी लेवल सब्जी बाजार बनाए जाने की योजना दो साल से चल रही है। इस अवधि में निगम जगह ही तय नहीं कर सका। अब अधिकारी इसे नए सिरे से शुरू करने की बात कह रहे हैं। इसके लिए निगम की टीम पिछले कुछ दिनों से बृहस्पति बाजार का सर्वे कर रही है।
इस दौरान दुकानों में क्या कारोबार हो रहा, किराएदार हैं कि मालिक और कितने वर्गफीट की दुकानें हैं, आदि रिपोर्ट तैयार की गई है। 16 दिसंबर 2025 को निगम अमले ने बाजार क्षेत्र की सभी दुकानों में नोटिस चस्पा किया था कि सात दिनों में जगह खाली कर दी जाए नहीं तो निगम एकतरफा तोड़फोड़ कार्रवाई करेगा।
निगम के नोटिस का व्यापारी विरोध करते हुए इसे तानाशाही बता रहे हैं। उन्होंने कहा है कि निगम ने जबरदस्ती जगह खाली करने दबाव डाला तो शहर में सब्जी आपूर्ति ठप कर दी जाएगी। इसके साथ ही हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा कि निगम मनमानी कर रहा है। नोटिस देने की प्रक्रिया का पालन नहीं किया।
पहले नोटिस में कम से कम 30 दिनों की मोहलत दी जाती है लेकिन निगम ने सिर्फ सात दिनों में हटने को कहा। यह किसी तरह से जायज और संभव ही नहीं है। व्यापारी सालों से इसी जगह पर कारोबार करके अपना परिवार पालते हैं। बाहर से आ रही सब्जियां भी बड़ी गाडिय़ों में आकर यहीं रुकती हैं। अब नई जगह पर बिना किसी व्यवस्था के शिफ्ट होना कैसे संभव होगा। कई व्यापारी लीजधारी हैं इसके बाद भी हटाया जा रहा है।