CG News: बिलासपुर जिले की सड़कों पर गड्ढे, धूल और ट्रैफिक की मार है, बिजली-पानी की किल्लत आम है और अपराध की घटनाएं चिंता बढ़ा रही हैं।
CG News: छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले की सड़कों पर गड्ढे, धूल और ट्रैफिक की मार है, बिजली-पानी की किल्लत आम है और अपराध की घटनाएं चिंता बढ़ा रही हैं। स्कूल-कॉलेजों में स्टाफ की कमी से पढ़ाई प्रभावित है, तो युवाओं को रोजगार और उद्योगों के लिए जमीन की तलाश में मशक्कत करनी पड़ रही है। युवा नशे की गिरत में आकर भविष्य को धुएं में उड़ा रहे हैं।
गणेश उत्सव के अवसर पर पत्रिका ने भगवान विघ्नहर्ता से काल्पनिक संवाद के जरिए इन समस्याओं और समाधान को महसूस करने की कोशिश की। मानो वे कह रहे हो कि हे बिलासपुर वालों, आपके विघ्न तभी दूर होंगे जब हर कोई अपना कर्तव्य निभाए। भगवान मंगलमूर्ति कहते हैं कि 9 दिनों तक आपके शहर में रहूंगा। खूब घुमूंगा। सोच रहा था कि मोदक खाऊँगा, भक्तों के घर जाऊँगा। लेकिन, यहां तो पहले ही दिन इतनी धूल खा ली कि अब मोदक की भूख ही नहीं रही।
ऽहे अधिकारीगण! तुम तो शहर की रीढ़ हो। लेकिन यहां तो ट्रैफिक ऐसा है जैसे सबको ‘फॉर्मूला वन रेस’ की प्रैक्टिस करनी हो। हेलमेट किसी को सूट नहीं करता, नियमों से सबको एलर्जी है। चाकूबाजी की खबरें सुनकर लगता है कि मानो ‘लाठी-तलवार प्रतियोगिता’ शुरू हो गई हो। यह लापरवाही नहीं चल सकती।
बिना किसी दबाव और भेदभाव के कानून को सती से लागू करो। ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों पर कड़ी कार्रवाई करो, अपराधियों को बशो मत। स्वच्छता और प्रदूषण नियंत्रण पर ठोस कदम उठाओ। जनता को भयमुक्त वातावरण देना ही तुहारा धर्म है।ऽजनता को डर-मुक्त और अनुशासित करो। नहीं तो लोग मंदिर में मुझसे ‘सड़क सुरक्षा’ की प्रार्थना करने लगेंगे।
तुमने जनता से वादा किया था, सड़कें चमकाएंगे, शहर सजाएंगे। लेकिन यहां तो सड़कों पर गड्ढे इतने हैं कि पंडाल लाते तक मेरा वाहन ‘मूषक महाराज’ भी गाड़ी बदलने का सोच रहा था। बिजली जब मन चाहे, आती-जाती है। जरा सी बारिश में शहर की सड़कें लबालब हो जाती है। पार्किंग ढूंढना तो वैसे ही है जैसे जंगल में मोदक खोजना।
धूल से लोग बीमार पड़ रहे हैं। यह सब तुहारी जिम्मेदारी है। याद रखो, नेतृत्व का अर्थ केवल वादे करना नहीं, बल्कि जनता की सुविधाओं को सुनिश्चित करना है। समाधान यही है कि आप योजनाओं को कागजों से निकालकर धरातल पर लाएं। जनहित के कार्यों में राजनीति को मत आने दो। विकास को ही धर्म मानो। बेटा, भाषण थोड़े म दो, काम थोड़ा ज्यादा करो। विकास भाषणों से नहीं, काम से दिखता है।