तखतपुर विधानसभा क्षेत्र के शहर से लगे अधिकतर गांवों में एक तरफ कालोनियों की कतार दिखती है, दूसरी तरफ भारी बदहाली। जर्जर स्कूलों में गंदगी के बीच पढ़ाई हो रही हैं। चिकित्सा सुविधाओं का भी कमोबेश ऐसा ही हाल है।
बिलासपुर. तखतपुर विधानसभा क्षेत्र के शहर से लगे अधिकतर गांवों में एक तरफ कालोनियों की कतार दिखती है, दूसरी तरफ भारी बदहाली। जर्जर स्कूलों में गंदगी के बीच पढ़ाई हो रही हैं। चिकित्सा सुविधाओं का भी कमोबेश ऐसा ही हाल है। गांव वाले कहते हैं- अस्पताल है तो पर डॉक्टर नहीं। निजी डाक्टरों के नाम पर नीम हकीम खतरे जान हैं, उनसे ही किसी तरह इलाज कराते हैं।
सरकार की जिन कल्याणकारी योजनाओं का ढिंढोरा पीटा जा रहा, उनका फायदा नहीं मिलता। पत्रिका की टीम ने बुधवार को तखतपुर विधानसभा क्षेत्र के शहर से लगे गांवों घुरू, अमेरी, उसलापुर, हांफा और संकरी में आगामी विधानसभा चुनाव की सरगर्मी और चिकित्सा, शिक्षा, विकास कार्य, मनरेगा समेत सरकार की योजनाओं का हाल जाना तो हालत चौकाने वाले दिखे। पढ़िए तखतपुर से शैलेन्द्र पाण्डेय की ग्राउंड जीरो रिपोर्ट
विधायक को नहीं जानते, कभी देखा ही नहीं
गांव हांफा में सडक़ किनारे पेड़ के नीचे बैठे विष्णु प्रजापति, सुखदेव सिंह ध्रुव, अशोक केंवट, रघुनंदन ध्रुव और समेलाल कौशिक से जब विधायक का नाम पूछा गया तो किसी ने संतोष कौशिक तो किसी ने संतोष भौमिक का नाम बताया। फिर एक ने राजू क्षत्री का नाम बताया। ग्रामीणों ने बताया कि गांव में अस्पताल नहीं है निजी प्रेक्टिशनरों का ही सहारा है।
लकड़ी में पक रहा मध्यान्ह भोजन
स्कूल जर्जर भवन में लग रहा है। 6 वीं से 8 वीं तक की कक्षा लगती है जिसमें 202 बच्चे हैं, लेकिन शौचालय की व्यवस्था नहीं है। मध्यान्ह भोजन तैयार करने के लिए गैस चूल्हा नहीं है लकड़ी जलाकर भोजन तैयार करते हैं।
स्कूल और अस्पताल दोनों बेहाल
सडक़ के किनारे लगभग एक एकड़ के दायरे में फैले शासकीय पूर्व माध्यमिक स्कूल अवैध कब्जे के कारण 25 डिसमिल में सिमट गया है। कक्षा 6 वीं से 8 वीें तक की क्लास लगती है जहां 9 शिक्षक और 167 बच्चे पढ़ते हैं। स्कूल में बाउंड्रीवाल शौचालय समेत कुछ भी नहीं है। अमेरी भले गांव है, पर शहर का ही एक हिस्सा है। लेकिन यहां की सडक़ें चलने लायक नहीं हैं। बिजली और पानी का भी ऐसा ही हाल है। गांव के निवासी धमेंद्र सुनहरे कहते हैं कि गांव में शासकीय अस्पताल की सुविधा नहीं है।