बिलासपुर

Chhattisgarh High Court: 22 साल बाद संतान की उम्मीद जगी, पति 57 के फिर भी छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने दी IVF की मंजूरी

IVF Age Limit: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने 22 साल से संतान का इंतजार कर रहे मनेंद्रगढ़ के दंपती को बड़ी राहत दी है। पति की उम्र 57 वर्ष होने के बावजूद कोर्ट ने पत्नी को IVF उपचार की अनुमति दी और कहा कि संयुक्त आयु की कोई सीमा कानून में नहीं है।
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Chhattisgarh High Court
हाई कोर्ट ने उम्र को लेकर साफ किया नियम (Photo Source- Patrika File Photo)

Chhattisgarh High Court: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने संतान की चाह रखने वाले एक दंपती को बड़ी राहत दी है। मनेंद्रगढ़ के इस दंपती को पति की उम्र 55 वर्ष से अधिक होने के कारण सहायक प्रजनन तकनीक यानी IVF उपचार की अनुमति नहीं दी गई थी। अब हाई कोर्ट ने इस आदेश को रद्द कर दिया है।

जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की अदालत ने कहा कि संबंधित कानून में महिला और पुरुष के लिए अलग-अलग आयु सीमा तय की गई है। कानून में पति-पत्नी की संयुक्त आयु को उपचार की पात्रता का आधार नहीं बनाया गया है। इसलिए केवल पति की उम्र 55 वर्ष से अधिक होने के कारण ऐसी महिला को उपचार से वंचित नहीं किया जा सकता, जो खुद निर्धारित आयु सीमा के भीतर है।

IVF Permission: 22 साल से संतान का इंतजार कर रहा था दंपती

मनेंद्रगढ़ के सिविल लाइंस निवासी अर्चना तिवारी और उनके पति प्रदीप कुमार तिवारी करीब 22 साल से संतान की उम्मीद कर रहे हैं। अर्चना की उम्र करीब 47 वर्ष और प्रदीप की उम्र 57 वर्ष है। दंपती ने पहले भी संतान प्राप्ति के लिए उपचार कराया था। वर्ष 2013 में अर्चना ने गर्भधारण के लिए अंतर्गर्भाशयी गर्भाधान यानी IUI उपचार कराया था। वर्ष 2015 में वह गर्भवती भी हुईं, लेकिन करीब चार महीने बाद गर्भपात हो गया। इसके बाद भी दंपती ने उम्मीद नहीं छोड़ी और आगे उपचार के लिए रायपुर स्थित आयुष टेस्ट ट्यूब सेंटर से संपर्क किया।

जांच के बाद IVF के लिए उपयुक्त पाया गया

रायपुर के आयुष टेस्ट ट्यूब सेंटर में चिकित्सकीय जांच और जरूरी परामर्श के बाद अर्चना और प्रदीप को उपचार के लिए उपयुक्त माना गया। इसके बाद दंपती ने 24 जून को सक्षम प्राधिकारी के सामने IVF उपचार की अनुमति के लिए आवेदन किया। हालांकि 31 जुलाई 2026 को उनका आवेदन खारिज कर दिया गया। आवेदन खारिज करने की मुख्य वजह पति की उम्र बताई गई। उस समय प्रदीप की उम्र 57 वर्ष थी, जबकि संबंधित कानून में पुरुष के लिए अधिकतम आयु सीमा 55 वर्ष निर्धारित है। इसके बाद दंपती ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

हाई कोर्ट में दंपती ने क्या दलील दी?

दंपती की ओर से अधिवक्ता गगन तिवारी ने अदालत में कहा कि कानून में महिला और पुरुष के लिए अलग-अलग आयु सीमा निर्धारित है। महिला के लिए 50 वर्ष और पुरुष के लिए 55 वर्ष की सीमा है। उन्होंने तर्क दिया कि कानून में पति-पत्नी की संयुक्त आयु को लेकर कोई अलग सीमा नहीं है। ऐसे में पति की उम्र 57 वर्ष होने के आधार पर 47 वर्षीय पत्नी को IVF उपचार से पूरी तरह वंचित नहीं किया जा सकता। अधिवक्ता ने यह भी कहा कि संतान प्राप्ति और प्रजनन से जुड़े निर्णय व्यक्ति की निजता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़े हैं। इन्हें संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिले अधिकारों के दायरे में देखा जाना चाहिए।

सरकार ने उम्र की सीमा का दिया हवाला

राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ता अनमोल शर्मा ने याचिका का विरोध किया। सरकार की ओर से कहा गया कि संबंधित कानून में पुरुष की अधिकतम उम्र 55 वर्ष स्पष्ट रूप से तय की गई है। सरकार का तर्क था कि जब कानून में उम्र की सीमा तय है तो व्यक्तिगत परिस्थितियों के आधार पर अदालत उस सीमा को बदलकर उपचार की अनुमति नहीं दे सकती।

हाई कोर्ट ने कानून की भाषा को माना अहम

दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद हाई कोर्ट ने संबंधित कानून की व्यवस्था पर विचार किया। अदालत ने कहा कि कानून में महिला और पुरुष के लिए अलग-अलग आयु सीमा तय की गई है। अदालत ने यह भी कहा कि कानून में पति-पत्नी की संयुक्त आयु को लेकर कोई रोक नहीं लगाई गई है। ऐसे में ऐसी अतिरिक्त शर्त जोड़ना उचित नहीं होगा, जिसे कानून बनाने वाली संस्था ने खुद कानून में शामिल नहीं किया है। कोर्ट ने यह भी देखा कि अर्चना चिकित्सकीय जांच के बाद IVF उपचार के लिए उपयुक्त पाई गई थीं। पति की उम्र के अलावा उपचार रोकने का कोई अन्य चिकित्सकीय कारण सामने नहीं आया था।

प्रजनन संबंधी फैसला निजता और स्वतंत्रता से जुड़ा

हाई कोर्ट ने प्रजनन संबंधी निर्णय को व्यक्ति की निजता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़ा महत्वपूर्ण पहलू माना। अदालत ने कहा कि किसी व्यक्ति के प्रजनन संबंधी निर्णय को केवल ऐसी शर्त के आधार पर नहीं रोका जा सकता, जो कानून में स्पष्ट रूप से मौजूद ही नहीं है। इसी आधार पर कोर्ट ने 31 जुलाई 2026 को दंपती के आवेदन को खारिज करने वाला आदेश रद्द कर दिया।

उपचार के दौरान पत्नी की उम्र 50 होने पर भी नहीं रुकेगा इलाज

हाई कोर्ट ने दंपती को राहत देते हुए एक महत्वपूर्ण स्थिति को भी स्पष्ट किया है। अदालत ने कहा कि यदि इस आदेश के बाद उपचार शुरू होता है और उपचार की प्रक्रिया के दौरान अर्चना की उम्र 50 वर्ष हो जाती है, तो केवल उम्र बढ़ जाने के कारण चल रहा उपचार बंद नहीं किया जाएगा। हालांकि कोर्ट ने यह भी साफ किया कि उपचार तभी जारी रहेगा, जब सभी चिकित्सकीय, नैतिक और वैधानिक शर्तें पूरी होंगी। यानी अदालत ने उम्र को अकेली बाधा मानने से इनकार किया है, लेकिन बाकी जरूरी नियमों के पालन को अनिवार्य रखा है।

IVF सेंटर को भी कोर्ट से मिली सुरक्षा

हाई कोर्ट ने उपचार करने वाले केंद्र को भी राहत दी है। अदालत ने कहा कि यदि IVF सेंटर इस आदेश के अनुसार सभी जरूरी शर्तें पूरी करते हुए दंपती का उपचार करता है, तो केवल पति की उम्र 55 वर्ष से अधिक होने के आधार पर उसके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।

22 साल के इंतजार के बाद फिर जगी उम्मीद

हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद करीब 22 साल से संतान की उम्मीद कर रहे दंपती के लिए उपचार का रास्ता खुल गया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि पति की उम्र 55 वर्ष से अधिक होने मात्र से पत्नी, जो खुद निर्धारित आयु सीमा के भीतर है, IVF उपचार के अवसर से स्वतः वंचित नहीं होगी। फैसले में यह भी स्पष्ट किया गया है कि कानून में जो शर्तें लिखी हैं, उन्हीं के आधार पर पात्रता तय की जानी चाहिए। ऐसी अतिरिक्त पाबंदी नहीं लगाई जा सकती, जिसका कानून में स्पष्ट उल्लेख नहीं है।

Updated on:
07 Oct 2026 02:49 pm
Published on:
07 Oct 2026 02:49 pm