बिलासपुर

CG News: ‘मौत के कारखाने’ बनते उद्योग, लापरवाही से हर महीने 10 तक मजदूर गंवा रहे जान, आंकड़े बयां कर रहे भयावह सच्चाई

Bilaspur News: बीते कुछ माह में बिलासपुर में कई बड़े हादसे सामने आए, लेकिन हर मामले में कार्रवाई का अंजाम लगभग एक जैसा रहा कि जांच जारी है।

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‘मौत के कारखाने’ बनते उद्योग (फोटो सोर्स- Freepik)

CG News: बिलासपुर जिले और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में लगातार हो रहे हादसे अब गंभीर चिंता का विषय बन चुके हैं। सुरक्षा के दावों और बैठकों के बावजूद एक के बाद एक घटनाएं सामने आ रही हैं, जिनमें श्रमिकों की जान जा रही है या वे गंभीर रूप से घायल हो रहे हैं। तमाम कोशिशों और बैठकों के बावजूद बिलासपुर समेत पूरे प्रदेश में औद्योगिक हादसों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा।

हर बार की तरह इस बार भी तस्वीर वही है कि प्रबंधन की लापरवाही, सुरक्षा मानकों से समझौता और घटना के बाद मामले को दबाने की कोशिश। दूसरी ओर शासन-प्रशासन अपनी ओर से प्रयास कर रहे, उसके बाद भी लापरवाही जारी है। हकीकत यह है कि उद्योग मालिक मुनाफा बढ़ाने के लिए सबसे पहले श्रमिकों की सुरक्षा पर ही कटौती करते हैं। हेलमेट, ग्लब्स, फायर सेफ्टी, मॉनिटरिंग सिस्टम जैसे जरूरी इंतजाम या तो होते ही नहीं या सिर्फ दिखावे के लिए होते हैं। नतीजा यह कि हर महीने प्रदेश मेें औसतन 8 से 10 मजदूर हादसों का शिकार हो रहे हैं।

आंकड़े बयां कर रहे भयावह सच्चाई

  • राज्य विधानसभा में पेश आंकड़े औद्योगिक सुरक्षा की पोल खोलते हैं।
  • पिछले 3 साल में 296 श्रमिकों की मौत
  • 248 मजदूर घायल
  • प्रदेश में 7300 से ज्यादा फैक्ट्रियां संचालित
  • इनमें करीब 1000 खतरनाक श्रेणी की इकाइयां
  • सबसे ज्यादा हादसे स्टील, स्पंज आयरन और पावर सेक्टर में हो रहे हैं।
  • इन आंकड़ों से साफ है कि समस्या सिर्फ एक-दो फैक्ट्रियों की नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम में गहरी जड़ें जमा चुकी है।

हादसे से ज्यादा खतरनाक जानकारी छुपाना

मित्तल फर्नीचर में चौंकाने वाली बात यह रही कि घटना के काफी देर तक मामले को दबाने की कोशिश होती रही, यही हाल अनव इंडस्ट्री में हुआ। यह सिर्फ एक-दो मामला नहीं, बल्कि इस बात का संकेत है कि कई उद्योगों में हादसों को दबाने की कोशिश आम बात बन चुकी है। अन्य कई बड़े हादसो में जानकारी छिपाई जाती है। जब प्रबंधन के हाथ में कुछ नहीं रह जाता और उन्हे आर्थिक नुकसान होने का डर सताने लगता है तब वे पुलिस और दमकल को जानकारी देते हैं और घटना में कौन घायल हुआ या किसकी जान गई, इसकी जानकारी उसके बाद भी दबाई जाती है।

मित्तल-अनव इंडस्ट्रीज तक, हर हादसे की एक जैसी कहानी

बीते कुछ माह में बिलासपुर में कई बड़े हादसे सामने आए, लेकिन हर मामले में कार्रवाई का अंजाम लगभग एक जैसा रहा कि जांच जारी है। तकरीबन हर मामले में प्रबंधन की लापरवाही सामने आई है।

मित्तल फर्नीचर (सिरगिट्टी) 23 दिसबंर: आग में दो मजदूरों की मौत, 10 हजार लीटर ज्वलनशील पदार्थ के बीच काम, फिर भी ठोस कार्रवाई नहीं हुई। जांच ही जारी है।

अनव इंडस्ट्रीज (तिफरा) 16 फरवरी: केमिकल फैक्ट्री में भीषण आग, एक महिला चपेट में आई। सुरक्षा के नाम पर सिर्फ 3 छोटे फायर एक्सटिंग्विशर। जांच आज तक जारी।

नोवा प्लांट (बिल्हा) 10 मार्च: पिघला आयरन उछलने से 4 मजदूर झुलसे। मामले में क्या हुआ, किसी को पता नहीं। कार्रवाई के नाम पर केवल जांच जारी।

फिल स्टील एंड पावर (घुटकू-निरतू) 28 मार्च: बायलर/फर्नेस हादसा, घंटों तक पुलिस को सूचना तक नहीं। एक कर्मचारी चपेट में आया।

जांच होती है, लेकिन नतीजा नहीं आता

हर बड़े हादसे के बाद औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग और पुलिस जांच शुरू करती है। लेकिन अधिकतर मामलों में रिपोर्ट लंबित रहती है। दोषियों पर ठोस कार्रवाई नहीं हो पाती। मुआवजा देकर मामला शांत कर दिया जाता है। जिससे उद्योग संचालकों के हौसले और बढ़ते हैं। वहीं, सुरक्षा को लेकर जागरुकता की भी कमी बनी हुई है।

मुआवजा नहीं, जवाबदेही जरूरी

विशेषज्ञों का मानना है कि केवल मुआवजा देना समाधान नहीं है। जब तक जिम्मेदार अधिकारियों और प्रबंधन पर कड़ी कार्रवाई नहीं होगी। लाइसेंस निलंबन/रद्द जैसी सख्त कार्रवाई नहीं होगी। नियमित और अचानक निरीक्षण नहीं होंगे, तब तक हादसे रुकना मुश्किल है।

कांग्रेस का हमला: जीरो टॉलरेंस नीति लागू करो

बढ़ते हादसों को लेकर कांग्रेस भी आक्रामक हो गई है। शहर अध्यक्ष सिद्धांशु मिश्रा ने हालिया घटनाओं पर चिंता जताते हुए कहा कि, उद्योगों में लगातार हो रही जनहानि गंभीर लापरवाही का नतीजा है। दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन किया जाएगा। कांग्रेस शहर अध्यक्ष सिद्धांशु मिश्रा ने लगातार हो रहे हादसों पर चिंता जताते हुए कहा कि यह पूरी तरह से प्रबंधन और प्रशासन की लापरवाही का नतीजा है। सिर्फ मुआवजा देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि जिम्मेदारों पर कार्रवाई जरूरी है।

उद्योगों के खिलाफ कार्रवाई लगातार जारी

लापरवाही बरतने वाले उद्योगों के खिलाफ कार्रवाई लगातार की जा रही है, लेकिन केवल दंडात्मक कदमों से हादसों को पूरी तरह रोका नहीं जा सकता। इसके लिए जागरूकता, जिम्मेदारी और सतत निगरानी बेहद जरूरी है। उद्योग प्रबंधन को सुरक्षा मानकों को औपचारिकता नहीं, बल्कि प्राथमिकता के रूप में अपनाना होगा। प्रत्येक इकाई में निर्धारित एसओपी का कड़ाई से पालन और उसका नियमित फॉलोअप सुनिश्चित किया जाना चाहिए। साथ ही, कर्मचारियों को समय-समय पर सुरक्षा प्रशिक्षण देना और संभावित जोखिमों के प्रति सजग बनाना भी आवश्यक है।

प्रशासन की ओर से सुरक्षा को लेकर जागरूकता बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास

विजय सोनी, डिप्टी डायरेक्टर, औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग ने बताया कि प्रशासन की ओर से सुरक्षा को लेकर जागरूकता बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में कार्यशालाएं, मॉक ड्रिल और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, ताकि किसी भी आपात स्थिति में त्वरित और प्रभावी प्रतिक्रिया दी जा सके। सुरक्षा एक सामूहिक जिम्मेदारी है, सभी के समन्वय से ही दुर्घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण संभव है।

Updated on:
30 Mar 2026 06:32 pm
Published on:
30 Mar 2026 05:07 pm
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