पांच साल विधायक और 15 साल कैबिनेट मिनिस्टर का पॉवर बिलासपुर जैसे शहर के चेहरे को बदलने की ताकत रखता है लेकिन गौर करिए तो इन दो दशकों में शहर का विकास ठहर सा गया है।
शिव सिंह/बिलासपुर. पांच साल विधायक और 15 साल कैबिनेट मिनिस्टर का पॉवर बिलासपुर जैसे शहर के चेहरे को बदलने की ताकत रखता है लेकिन गौर करिए तो इन दो दशकों में शहर का विकास ठहर सा गया है। नाली-सडक़ और गलियों के कांक्रीटीकरण का काम तो पार्षद कराते हैं लेकिन वह भी ढंग से नहीं हो रहा। ध्यान से देखिए, यह कहीं से भी नगरीय प्रशासन मंत्री का शहर लगता है क्या? इसलिए अब चेहरे की जरूरत है,तब शायद शहर संवरेगा। केशव राव के चेहरे पर यह कहते हुए गुस्सा दिखने लगता है...
पहले प्रत्याशी तय हो, फिर देखेंगे
रिवर व्यू पांइट में दोस्तों संग घूमने आए युवाओं से चर्चा की तो उन्होंने कहा वे पहले पार्टियां उम्मीदवार तो घोषित करें, फिर देखेंगे किसे वोट देना है और किसे सपोर्ट करना है। विधानसभा क्षेत्र के अलग-अलग इलाकों के मतदाताओं का मूड भी अल-अलग नजर आया लेकिन सबकी चिंता यही दिखी कि अपने बिलासपुर का विकास होना चाहिए।
काम तो ठीक कर रहें
मंगला क्षेत्र गंगानगर निवासी बालेश्वर प्रसाद धीवर का कहना है कि वर्तमान विधायक अमर अग्रवाल ठीक हैं। मोहल्ले की गलियां व नालियां स्थानीय पार्षद बनवा ही देते हैं। धीवर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के फैन हैं। उनका कहना है कि चार साल में मोदी ने एक भी दिन भी छुट्टी नहीं ली। उन्हें और उनकी टीम को पांच साल और मौका देना चाहिए।
नगर का मंत्री फिर भी संकट में नगरीकरण
चुनावी आहट के बीच शहर के मतदाताओं का मिजाज जानने निकली पत्रिका टीम से केशव राव ने लंबी चर्चा की। वे बिलासपुर विधानसभा क्षेत्र के सरकंडा इलाके में रहते हैं। वे कहते हैं अभी वोट मांगने लोग नहीं आए हैं। लेकिन हमारे विधायक तो नगरीय प्रशासन मंत्री हैं, फिर भी शहर में उस स्तर का विकास नहीं दिखाई देता। केशव राव दो टूक कहते हैं कि ऐसा नहीं है कि काम नहीं हुए लेकिन मंत्री स्तर के काम शहर में नहीं हुए हैं। कार्यों में गुणवत्ता नहीं दिखती। सडक़े बनती हैं फिर उधड़ जाती हैं। कई काम बरसों से अधूरे ही हैं। एयरपोर्ट व पार्किंग जैसी सुविधा की जरूरत है। इसलिए इस विधानसभा चुनाव में किसी नए चेहरे को नेतृत्व करने का मौका मिलना चाहिए।
बार बार अमर अग्रवाल
विधानसभा चुनाव की रंगत धीरे धीरे गली-मोहल्लों दिखायी देने लगी है। हालांकि टिकट फाइनल न होने के कारण घर-घर वोट मांगने का सिलसिला अभी जोर नहीं पकड़ रहा है। चुनाव आयोग की सख्ती के कारण शहर की दीवारों पर अभी सियासी रंग नहीं चढ़े हैं। कहीं-कहीं दीवार लेखन हुआ था, उसे भी आयोग के निर्देश पर पोत दिया गया है।
कुदुदंड निवासी अमित श्रीवास का कहना है कि अमर अग्रवाल लंबे समय से विधायक हैं। अब किसी दूसरे को मौका मिलना चाहिए। 26 साल के इस युवा मतदाता का कहना है कि भाजपा हो या कांग्रेस पार्टी, दोनों को चाहिए पुराने चेहरे न उतारें। जीत-हार तो मतदाता तय करेंगे। वहीं इंदिरा ब्रिज के किनारे बैठे युवाओं ने कहा कि वे किसी व्यक्ति या दल विशेष के समर्थन में वोट नहीं करेंगे बल्कि स्वच्छ व ईमानदार छवि वाले उम्मीदवार को ही मत देंगे।