बिलासपुर

CG Election 2018: तीसरी ताकत ने बदला समीकरण, बदल सकता है जीत – हार का फासला

2013 के विधानसभा चुनाव में जब तीसरी ताकत का ज्यादा बोलबाला नहीं था तब बिलासपुर और मुंगेली जिले के 9 विधानसभा सीटों में भाजपा और कांग्रेस के प्रत्याशियों के बीच हार-जीत का फासला करीब सवा लाख वोटों का रहा।
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Oct 15, 2018
patrika
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शैलेंद्र पांडेय/बिलासपुर. आगामी विधानसभा चुनाव कई लिहाज से महत्वपूर्ण होगा। 2013 के विधानसभा चुनाव में जब तीसरी ताकत का ज्यादा बोलबाला नहीं था तब बिलासपुर और मुंगेली जिले के 9 विधानसभा सीटों में भाजपा और कांग्रेस के प्रत्याशियों के बीच हार-जीत का फासला करीब सवा लाख वोटों का रहा। इस चुनाव में हालात बदलने की उम्मीद है। इस चुनाव में हार-जीत का फासला सिमटने और बदलाव के आसार हैं। पिछले चुनाव पर गौर करें तो केवल एक विधानसभा एेसी थी, जहां हार-जीत का अंतर सैकड़ों मे रहा। इसके अलावा सभी विधानसभाओं में हार-जीत का आंकड़ा हजारों को पार कर दिया था।

मरवाही में सबसे बड़ी जीत

जिले के मरवाही विधानसभा सीट से ही सर्वाधिक अंतर से जीत दर्ज हुई थी। यह क्षेत्र आदिवासी बाहुल्य है। यहां से कांग्रेस के अमित जोगी को 82, 909 वोट मिले थे। जबकि भाजपा प्रत्याशी समीरा पैंकरा को 36, 659 वोट मिले। इस चुनाव में परिस्थितियां बदल चुकी है। यहां से छजकां और बसपा गठबंधन के प्रत्याशी के अलावा आम आदमी पार्टी ने भी अपना उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतारा है।

कोटा में रोचक होगा मुकाबला
कोटा विधानसभा सीट से कांग्रेस प्रत्याशी रही डॉ. रेणु जोगी को 58 हजार 390 वोट मिले थे। उनके प्रतिद्वंदी भाजपा के काशी साहू को 53 हजार 301 वोट मिले थे। रेणु ने यहां से 5 हजार 89 वोटों से जीत दर्ज की थी। इस बार यहां से भी छजकां और आप के दावेदार मैदान में है। कोटा विधानसभा क्षेत्र जातिगत समीकरण के हिसाब से ओबीसी बाहुल्य इलाका है इसके बाद यहां आदिवासी वोटर की संख्या अधिक है, जिससे यहां से भी तीसरी ताकत और आप के आने से काफी बदलाव हो सकता है।

लोरमी में मिलेगी चुनौती
लोरमी विधानसभा सीट से पिछले चुनाव में भाजपा के प्रत्याशी तोखन साहू को 52 हजार 302 और प्रतिद्वंदी कांग्रेस प्रत्याशी धर्मजीत सिंह को 46 हजार 61 वोट मिले थे। तोखन चुनाव जीतने के बाद संसदीय सचिव बने। जातिगत समीकरण के हिसाब से लोरमी क्षेत्र साहू और कुर्मी बाहुल्य इलाका है। इसके अलावा लगभग 25 फीसदी आबादी आदिवासी समाज की है।

मुंगेली में मशक्कत
मुंगेली विधानसभा क्षेत्र अनुसूचित जाति बाहुल्य इलाका है। पिछले चुनाव में भाजपा के पुन्नू लाल मोहले को 61,026 वोट मिले थे। वहीं कांग्रेस के चंद्रभान को 58 हजार 281 वोट मिले थे। यहां इस बार छजकां और बसपा के गठबंधन के अलावा आप उम्मीदवार भी चुनावी मैदान में है। इनके आने से इस बार मोहले को अपनी सीट बचाने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ेगी।

बेलतरा सीट
बेलतरा विधानसभा क्षेत्र ओबीसी और ब्राम्हण बाहुल्य इलाका है। इस बार यहां से भी छजकां और बसपा गठबंधन ने और आप ने प्रत्याशी उतार रखा है। यहां रामेश्वर खरे 1998 में बसपा से विधायक बने थे।

मस्तूरी सीट
मस्तूरी विधानसभा क्षेत्र का इलाका जातिगत समीकरण के आधार पर अनुसूचित जाति बाहुल्य इलाका है। इस विधानसभा क्षेत्र में भी बसपा का खासा प्रभाव रहा है। इस बार आप और बसपा-छजकां गठबंधन से भाजपा-कांग्रेस दोनों को काफी संघर्ष करना पड़ेगा।

Published on:
15 Oct 2018 07:40 pm