CG Bilaspur Flight: बिलासपुर में हवाई सेवा विस्तार से जुड़ी जनहित याचिकाओं पर हाईकोर्ट ने सुनवाई जुलाई के अंतिम सप्ताह तक टाल दी है। राज्य सरकार को तब तक एयरपोर्ट विकास कार्यों की प्रगति पर नया शपथ पत्र पेश करना होगा।
CG Bilaspur Flight: छत्तीसगढ़ के बिलासपुर हाईकोर्ट में बिलासपुर के हवाई सेवा विस्तार से जुड़ी जनहित याचिकाओं पर सुनवाई फिलहाल टाल दी गई है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने मामले की अगली सुनवाई जुलाई के अंतिम सप्ताह में करने के निर्देश दिए हैं। इस दौरान राज्य सरकार को अब तक की प्रगति पर नया शपथ पत्र प्रस्तुत करना होगा।
बिलासपुर एयरपोर्ट के विकास को लेकर हाईकोर्ट लगातार निगरानी कर रहा है। कोर्ट के निर्देशों के बाद रनवे कारपेटिंग, बाउंड्री वॉल सहित कई बुनियादी कार्यों को मंजूरी दी गई है। राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता प्रवीण दास ने जानकारी दी कि अब तक एयरपोर्ट विकास पर लगभग 100 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं।
सरकार ने स्पष्ट किया कि फिलहाल निजी एयरलाइंस कंपनियों को बिलासपुर से उड़ान शुरू करने के लिए कोई आमंत्रण नहीं दिया जाएगा। हालांकि, यदि कोई एयरलाइन व्यावसायिक रूप से उड़ान संचालन करना चाहती है तो उस पर कोई रोक नहीं है। राज्य सरकार वर्तमान में केवल सरकारी कंपनी एलायंस एयर को ही सब्सिडी दे रही है, जबकि निजी कंपनियों के लिए ऐसी कोई योजना लागू नहीं की गई है।
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता सुदीप श्रीवास्तव ने दलील दी कि केंद्र सरकार की उड़ान योजना की तर्ज पर राज्य सरकार को भी ओपन टेंडर जारी कर निजी एयरलाइंस को आमंत्रित करना चाहिए। इससे हवाई सेवाओं का विस्तार तेजी से हो सकता है। हालांकि, राज्य सरकार ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया और अपने रुख पर कायम रही।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने स्पष्ट किया कि याचिकाओं में 4C श्रेणी के एयरपोर्ट के निर्माण की मांग की गई है। इस पर याचिकाकर्ताओं ने कहा कि वर्तमान में केवल 3C स्तर का एयरपोर्ट विकसित हुआ है और 4C के लिए कोई ठोस कार्य शुरू नहीं हुआ है। वहीं, राज्य सरकार का कहना है कि याचिकाओं का उद्देश्य काफी हद तक पूरा हो चुका है और आगे की सुनवाई की आवश्यकता नहीं है।
राज्य सरकार ने कोर्ट से मामले में ठोस प्रगति के लिए अधिक समय देने की मांग की थी। इस पर विचार करते हुए हाईकोर्ट ने सुनवाई को जुलाई के अंतिम सप्ताह तक स्थगित कर दिया। तब तक सरकार को नई प्रगति रिपोर्ट दाखिल करनी होगी।
राज्य सरकार के इस रुख का याचिकाकर्ताओं ने कड़ा विरोध किया। वरिष्ठ अधिवक्ता आशीष श्रीवास्तव और सुदीप श्रीवास्तव ने कहा कि जब तक 4C एयरपोर्ट के निर्माण की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए जाते, तब तक याचिकाओं का उद्देश्य पूरा नहीं माना जा सकता।