बिलासपुर

पत्नी की मौत मामले में पति 19 साल बाद दोषमुक्त, हाईकोर्ट में साबित नहीं हो सकी क्रूरता

Bilaspur High Court: न्यायमूर्ति राजनी दुबे की एकलपीठ ने वर्ष 2007 में ट्रायल कोर्ट द्वारा सुनाई गई सजा को रद्द करते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष दहेज मांग और मौत से ठीक पहले क्रूरता को साबित करने में असफल रहा है
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CG High Court: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी, ई-मेल के बाद साइबर टीम जांच में जुटी...(photo-patrika)
CG High Court: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी, ई-मेल के बाद साइबर टीम जांच में जुटी...(photo-patrika)

Bilaspur High Court: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने दहेज मृत्यु के एक पुराने मामले में अहम फैसला सुनाते हुए पति को दोषमुक्त कर दिया है। न्यायमूर्ति राजनी दुबे की एकलपीठ ने वर्ष 2007 में ट्रायल कोर्ट द्वारा सुनाई गई सजा को रद्द ( CG News) करते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष दहेज मांग और मौत से ठीक पहले क्रूरता को साबित करने में असफल रहा है।

Bilaspur High Court: 6 नवंबर 2006 का मामला

बालौदाबाजार निवासी उदय भारती की पत्नी सीमा की 6 नवंबर 2006 को फांसी लगने से मौत हो गई थी। इस मामले में ट्रायल कोर्ट ने उदय भारती को धारा 304-बी (दहेज मृत्यु) के तहत 7 साल और 498-ए (दहेज प्रताडऩा) के तहत 3 साल की सजा सुनाई थी। इसके खिलाफ उदय भारती ने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी।

आत्महत्या थी, न कि हत्या

हाईकोर्ट ने रेकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्यों का गहन परीक्षण करते हुए माना कि, मृतका की मौत आत्महत्या थी, न कि हत्या। दहेज मांग और प्रताड़ना को लेकर गवाहों के बयान सामान्य, विरोधाभासी और अप्रमाणित हैं। मौत से ठीक पहले दहेज के लिए क्रूरता का कोई ठोस प्रमाण नहीं है। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि मृतका के माता-पिता और परिजनों ने कथित प्रताड़ना के बावजूद कभी पुलिस में शिकायत दर्ज नहीं कराई, न ही परिवारों के बीच कोई बैठक या मध्यस्थता हुई।

स्वतंत्र गवाह ने नहीं किया समर्थन

मकान मालकिन, जो स्वतंत्र गवाह थीं, उसने भी अदालत में कहा कि पति-पत्नी सामान्य रूप से रह रहे थे। केवल शराब पीने की बात सामने आई, जिसे कोर्ट ने दहेज प्रताडऩा नहीं माना। हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि केवल सामान्य आरोपों के आधार पर दहेज मृत्यु का दोष सिद्ध नहीं किया जा सकता, जब तक कि कानून की अनिवार्य शर्तें पूरी न हों। हाईकोर्ट ने अपील स्वीकार करते हुए ट्रायल कोर्ट का फैसला निरस्त कर दिया है।

Updated on:
18 Jan 2026 04:31 pm
Published on:
18 Jan 2026 04:31 pm