बिलासपुर

CG High Court: फर्जी दाखिलों पर हाईकोर्ट सख्त… RTE में 74 बच्चों का एडमिशन सवालों में, शिकायतों में देरी पर सरकार से जवाब तलब

High Court: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने दुर्ग जिले में शिक्षा के अधिकार के तहत निजी स्कूलों में 74 बच्चों के फर्जी दाखिले और 2025 में 591 शिकायतों के निराकरण में देर पर नाराजगी जताई है।

2 min read
Bilaspur High Court
Bilaspur High Court(photo-patrika)

CG High Court: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने दुर्ग जिले में शिक्षा के अधिकार के तहत निजी स्कूलों में 74 बच्चों के फर्जी दाखिले और 2025 में 591 शिकायतों के निराकरण में देर पर नाराजगी जताई है। समाजसेवी सीवी भगवंत राव की याचिका पर कोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा है। इसके साथ ही 10 बच्चों को गलत तरीके से निकालने 118 बच्चों को अपात्र घोषित करने के मामले में भी 24 मार्च तक जवाब देने कहा गया है।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल प्रक्रिया का हवाला देकर देरी को उचित नहीं ठहराया जा सकता, क्योंकि यह मामला सीधे बच्चों के मौलिक अधिकार से जुड़ा है। उल्लेखनीय है कि प्रदेश भर में खास तौर पर दुर्ग में बीपीएल व अंत्योदय कार्ड का गलत इस्तेमाल कर अपात्र बच्चों का दाखिला और वेबसाइट हैकिंग के मामले सामने आए थे।

चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की डिवीजन बेंच ने इसे गंभीर मानते हुए राज्य सरकार से विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी। जवाब देने और कार्रवाई में देरी पर कोर्ट ने बुधवार को नाराजगी जताई। अगली सुनवाई में फर्जीवाड़े में शामिल लोगों के खिलाफ की गई कार्रवाई का विवरण अनिवार्य रूप से प्रस्तुत करने कहा है। उल्लेखनीय है कि यह पूरा मामला निजी स्कूलों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को आरटीई का लाभ न देने का है।

नियम और गाइड लाइन न होने पर आपत्ति

कोर्ट ने आरटीई के तहत स्कूलों के लिए नियम व दिशा-निर्देश अब तक तैयार नहीं किए जाने पर भी कड़ी टिप्पणी की है। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने स्पष्ट कहा कि बच्चों के हितों से जुड़े इस गंभीर विषय में सरकार को जल्द ठोस कदम उठाने होंगे। इससे पहले शिक्षा सचिव ने शपथ पत्र प्रस्तुत किया। इसमें बताया गया कि आरटीई अधिनियम की धारा 35(2) के तहत विस्तृत गाइडलाइन बनाने की प्रक्रिया चल रही है और इसके लिए विभागीय स्तर पर समिति गठित कर 5 जनवरी 2026 को बैठक भी की गई है।

निराकरण भी फर्जी, शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल

मामले में हस्तक्षेप याचिका दायर कर यह भी बताया गया कि कई स्कूलों में छात्रों के मिड-टर्म एडमिशन बिना प्रमाणपत्रों की जांच किए रद्द कर दिए गए, जो अत्यंत गंभीर मामला है। कोर्ट ने इसे शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करने वाला बताया। इसके अलावा, एक अन्य हस्तक्षेपकर्ता ने एंट्री स्कूलों में बच्चों के शोषण का मुद्दा उठाया, जिस पर कोर्ट ने गहरी चिंता व्यक्त की। शिक्षा विभाग की ओर से कोर्ट को बताया गया कि आरटीई पोर्टल पर प्राप्त शिकायतों के निराकरण में अधिकांश जिलों में प्रगति हुई है।

दुर्ग जिले में 183 शिकायतें, रायपुर जिले में 157 शिकायतें, बिलासपुर जिले में 100 शिकायतें प्राप्त हुई थीं। इनमें से बिलासपुर की 99 शिकायतें निपटा दी गई हैं, जबकि एक शिकायत आरटीई सर्वर में तकनीकी समस्या के कारण लंबित है। हालांकि, याचिकाकर्ता की ओर से यह आपत्ति उठाई गई कि केवल पोर्टल पर आई शिकायतों का निराकरण हुआ है, जबकि अधिकारियों को दी गई कई शिकायतें अब भी लंबित हैं।

Published on:
12 Mar 2026 11:52 am