बिलासपुर

गांव के नाम में ‘भूत’ कोई डोली ले जाता न सजते सेहरे, नाम बदलने की मांग

आलम यह है कि यहां के लगभग 40 से 45 युवक-युवतियां शादी के लिए तैयार हैं।

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गांव के नाम में 'भूत' कोई डोली ले जाता न सजते सेहरे, नाम बदलने की मांग

श्यामकिशोर/निक्कू जायसवाल/ लोरमी. लड़के हैं कुंवारे, नहीं आती दुल्हनिया, सास को नहीं मिल पाती बेटों के लिए बहुरानियां, इस गांव का नाम ही ऐसा कि लड़के नहीं चढ़ पा रहे हैं घोड़ी। वहीं नहीं उठ रही है बेंटियों की डोली। गांव का नाम ही वहां रहने वाले लोगों के लिए परेशानी का सबब बन गया है। यहां न कोई अपनी बेटियां देता है और न ही यहां से ब्याह कर ले जाता है। आलम यह है कि यहां के लगभग 40 से 45 युवक-युवतियां शादी के लिए तैयार हैं। चौकिंए नहीं, यहां बात हो रही है लोरमी विधानसभा के ग्राम भूतकछार की। मैकल पर्वत श्रेणी की तलहटी में लोरमी से 25 किमी की दूरी पर बसे हुए कठौतिया पंचायत के इस आश्रित ग्राम में 7 सौ लोग निवास करते हंै। जो अपने गांव के नाम से ही परेशान हैं। गांव के युवक कहते हैं कि न तो कोई यहां अपनी बेटी देना चाहता है और न ही अपने घर यहां से बेटी ब्याह कर ले जाना चाहता है। यहां के कई युवक-युवतियों का रिश्ता सिर्फ भूतकछार नाम की वजह से टूट गया है। इससे परेशान ग्रामीण अफसरों से गांव का नाम बदलने की गुहार भी लगा चुके है। वे अपने गांव का नाम देवगढ़ रखने की भी गुजारिश कर चुके हंै। गांव के बुजुर्ग व युवक बताते हंै कि गांव के नाम से उन्हें बाहर दूसरे के सामने शर्मिंदा तक होना पड़ता है। नाम प्रभाव कुछ इस तरह है कि गांव के लोगों को बाहर जाकर नाम बताने पर नौकरी पर भी नहीं रखता है। बुजुर्ग से जब पूछा गया कि आखिर भी ऐसा नाम इस गांव का क्यो पड़ा तो बताया कि यहां पर भूतों का डेरा था। 70-80 वर्ष पहले उक्त गांव घनघोर जंगल से घिरा हुआ था। जंगली जानवरों का बसेरा रहता था। कठौतिया गांव का आबादी बढऩे से लोग एक-एक कर इसी कछार में आकर बसना शुरू कर दिए। 40 वर्ष पूर्व यहां हैजा व चिकनपॉक्स की महामारी फैली, जिसमें कई लोगों की मौत हो गई। लोगों के घर से बच्चों सहित बड़ों की अर्थियां उठने लगी। लगभग 1 घर से 2 से 3 लोग मरते चले गए। इस तरह वहां से दर्जनों लोगो की भयावह मौत हो गई। गांव में भूत प्रेत का साया मंडराने लगा। तब से इस गांव का नाम भूतकछार पड़ गया।

बढ़ रही है बेटे-बेटियों की आयु : भूतकछार के नाम सुनते ही वहां पर रिश्ते लेकर नहीं पहुंचते हैं। ऐसे में यहां अपनी अपनी बेटे-बेटियों की शादी की राह देखते-देखते उनकी आंखे भर आती हैं। बेटे-बेटियों की आयु बढ़ती जा रही है।
नाम बदलने जनदर्शन में दिया आवेदन : गांव के नाम से परेशान ग्रामीण लोक सुराज से लेकर कलेक्टर जनदर्शन तक में आवेदन लगा चुके हैं, लेकिन गांव वालों की समस्या जस की तस बनी हुई है। ग्रामीणों को आस है कि गांव का नाम बदल कर देवगढ़ रखा जाए।

Published on:
25 Jul 2018 04:05 pm
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