
गोबर खरीदी घोटाला (photo source- Patrika)
Forest Officer Suspended: मरवाही वनमंडल में हुए बहुचर्चित गोबर खरीदी घोटाले में आखिरकार एक और बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की गई है। जांच रिपोर्ट के आधार पर नवा रायपुर स्थित प्रधान मुख्य वन संरक्षक कार्यालय ने मरवाही वन परिक्षेत्र के तत्कालीन रेंजर रमेश कुमार खैरवार को निलंबित कर दिया है। निलंबन अवधि के दौरान उन्हें बिलासपुर स्थित सीसीएफ कार्यालय से संबद्ध किया गया है। इससे पहले इसी मामले में कैंपा फंड शाखा के प्रभारी सहायक ग्रेड-दो भूपेंद्र कुमार साहू को भी निलंबित किया जा चुका है।
पूरा मामला वर्ष 2022 में पौधारोपण कार्य के नाम पर गोबर खाद खरीदी में कथित वित्तीय अनियमितता से जुड़ा है। आरोप है कि फर्जी बिल और दस्तावेज तैयार कर करीब 14 लाख 77 हजार 600 रुपए का भुगतान किया गया। जांच में यह बात सामने आई कि गोबर खाद खरीदी के नाम पर कागजी प्रक्रिया पूरी कर सरकारी राशि निकाल ली गई, जबकि कई दस्तावेज संदिग्ध पाए गए।
घोटाले में सबसे ज्यादा सवाल तत्कालीन डीएफओ रौनक गोयल की भूमिका को लेकर उठ रहे हैं। जांच में यह तथ्य सामने आया कि तत्कालीन एसडीओ के जाली हस्ताक्षर कर फाइलों का सत्यापन कराया गया था। आरोप है कि बाद में उन्हीं दस्तावेजों के आधार पर तत्कालीन डीएफओ ने भुगतान की मंजूरी दी। हालांकि अब तक उनके खिलाफ किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं हुई है, जिससे स्थानीय स्तर पर नाराजगी देखी जा रही है।
यह मामला उस समय और ज्यादा चर्चाओं में आ गया था जब छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र में भी इसकी गूंज सुनाई दी। बिलासपुर वृत्त के मुख्य वन संरक्षक मनोज कुमार पांडेय द्वारा की गई जांच में खुलासा हुआ कि वर्ष 2022 के मिश्रित प्रजाति पौधारोपण कार्य के लिए गोबर खाद खरीदी के नाम पर फर्जी बिल और वाउचर तैयार किए गए थे।
जांच के दौरान खुरपा (छुआबहरा बीट) के वन प्रबंधन समिति सचिव और फॉरेस्टर श्रीकांत परिहार ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए। उन्होंने अपने बयान में तत्कालीन डीएफओ रौनक गोयल, रेंजर रमेश खैरवार और कैंपा प्रभारी भूपेंद्र साहू पर गंभीर आरोप लगाए। परिहार ने बताया कि समितियों को भुगतान मिलने के बाद पूरी राशि वापस ले ली गई थी। आरोप है कि रेंजर ने यह रकम यह कहकर मंगाई थी कि पैसा “ऊपर तक पहुंचाना है।”
आरोपों के मुताबिक अक्टूबर 2024 में गोबर खाद खरीदी दिखाने के लिए कथित सप्लायरों की फर्जी सूची तैयार की गई। फॉरेस्टर श्रीकांत परिहार ने आरोप लगाया कि उन्हें निलंबन की धमकी देकर डीएफओ कार्यालय बुलाया गया और वहां खाली वाउचर पर हस्ताक्षर करवाए गए। इसके बाद कथित रूप से एसडीओ के जाली हस्ताक्षर कर दस्तावेज तैयार किए गए और उन्हीं के आधार पर भुगतान प्रक्रिया पूरी की गई।
21 अक्टूबर 2024 को एचडीएफसी बैंक के जरिए कथित सप्लायरों के खातों में 14.77 लाख रुपए ट्रांसफर किए गए। जांच में यह भी सामने आया कि भुगतान के तुरंत बाद संबंधित खातों से नकदी निकलवाई गई। आरोप है कि रेंजर ने फॉरेस्टर को पैसा निकालकर लाने के निर्देश दिए थे और बाद में यह रकम उन्हें सौंप दी गई। इस पूरे लेन-देन से जुड़ा एक कथित ऑडियो भी सोशल मीडिया में वायरल हुआ था, जिसने मामले को और ज्यादा चर्चा में ला दिया।
अब स्थानीय स्तर पर मांग उठ रही है कि तत्कालीन डीएफओ रौनक गोयल, रेंजर रमेश खैरवार और कैंपा प्रभारी भूपेंद्र साहू के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 318 के तहत धोखाधड़ी और जालसाजी का आपराधिक मामला दर्ज किया जाए। लोगों का कहना है कि यह सिर्फ आर्थिक गड़बड़ी नहीं, बल्कि एक जिम्मेदार राजपत्रित अधिकारी के हस्ताक्षर फर्जी तरीके से इस्तेमाल करने का गंभीर अपराध भी है।
Published on:
28 May 2026 02:57 pm
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