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गोबर खाद खरीदी में बड़ा घोटाला: फर्जी हस्ताक्षर कर 14.77 लाख का गबन, वनमंडल अधिकारी जांच के घेरे में…

Cow Dung Scam: वन अफसरों ने गोबर खाद खरीदी का फर्जी प्रमाणक तैयार कर 14.77 लाख से अधिक की राशि की हेराफेरी कर दी है।

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गोबर खाद खरीदी में भ्रष्टाचार (फोटो सोर्स- पत्रिका)

गोबर खाद खरीदी में भ्रष्टाचार (फोटो सोर्स- पत्रिका)

Cow Dung Scam: वन अफसरों ने गोबर खाद खरीदी का फर्जी प्रमाणक तैयार कर 14.77 लाख से अधिक की राशि की हेराफेरी कर दी है। इसमें बिलासपुर से लेकर जीपीएम तक के वन अफसर शामिल हैं। मामले की उच्च अधिकारियों से शिकायत हुई है।

शिकायत के अनुसार, तत्कालीन वनमंडल अधिकारी रौनक गोयल ने गोबर खाद की खरीदी के 14.77 लाख रुपए गबन करने के लिए फर्जी प्रमाणक तैयार कराया। इस दौरान उन्होंने परिक्षेत्र अधिकारी मरवाही और उपवनमंडल अधिकारी पेण्ड्रा के कूटरचित हस्ताक्षर कराकर सरकारी लेखा में राशि समायोजित करवाई और बैंक खाते से राशि निकालवाकर स्वयं ले लिया।

अफसरों ने बताया कि मामले की जांच में यह पाया गया कि 2 मई 2022 से 11 मई 2022 तक गोबर खाद की खरीदी दिखाई गई, लेकिन वास्तविक में इतनी बड़ी मात्रा (1847 घन मीटर) एकत्र करना और दस दिनों में पौध रोपण हेतु खड़े गड्ढों में डालना व्यावहारिक रूप से असंभव था। प्रमाणक में वाहन, चालान, नाशवान पंजी और सामग्री वितरण की जानकारी नहीं थी। इसके अलावा उपवनमंडल अधिकारी पेण्ड्रा द्वारा स्थल सत्यापन या हस्ताक्षर नहीं किए गए।

Cow Dung Scam: खरीदी के 29 माह बाद राशि किया समायोजित

वन विभाग के अफसरों ने वन प्रबंधन समिति पिपरिया और खुरपा के सचिवों पर भी दबाव बनाया ताकि राशि खाते से निकल सके। 887200 रुपए पिपरिया समिति और 590400 रुपए खुरपा समिति के नाम पर गोबर खरीदी के 29 माह बाद अक्टूबर 2024 कैम्पा मद से राशि समायोजित की गई।

जांच समिति के अध्यक्ष चंद्रकांत टिकरिहा द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट में सुरेश कुमार राठौर वन चौकीदार पिपरिया द्वारा 550000 रुपए और श्रीकांत परिहार परिसर रक्षक चुवाबहरा द्वारा 450000 रुपए वनमंडल अधिकारी रौनक गोयल तक पहुंचाने की बात कही गई। रौनक गोयल से संपर्क किया गया, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाए।

पिपरिया और खुरपा समिति में 14.77 लाख से अधिक की जो गोबर खरीदी की राशि कैम्पा मद में समायोजित करने के लिए जो प्रमाणक तैयार कराए गए हैं, उसमें मेरा जो हस्ताक्षर है, वह फर्जी है। मैं 2023 में ही वहां से दूसरे स्थान पर ट्रांसफर हो गया था, जबकि प्रमाणक में किसी ने 2024 में मेरे नाम से हस्ताक्षर किए हैं। मैंने प्रमाणक देखा है, उसमें हस्ताक्षर फर्जी ही है। - नवीन निराला, उप प्रबंध संचालक, जिला वनोपज सरकारी संघ