पुलिस मुख्यालय में स्वेच्छा सेवानिवृत्ति की अर्जी लगाई तब तक उनके चुनाव लडऩे की बात फैल चुकी थी।
बिलासपुर. गिरिजाशंकर जौहर इंस्पेक्टर की नौकरी छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए थे चुनाव लडऩे के लिए। लेकिन पुलिस मुख्यालय ने ऐसी लंगड़ी मारी कि जौहर की नौकरी भी गई और टिकट भी। जौहर मस्तूरी विधान सभा क्षेत्र से टिकट की मांग कर रहे थे। वे कांग्रेस से नामांकन फार्म भी खरीद लिए हैं। राहुल गांधी के रायपुर दौरे में डीएसपी विभोर सिंह के साथ जौहर ने भी कांग्रेस का दामन थामा था। मस्तूरी से उनकी चुनाव लडऩे की योजना भी थी। बताते हैं कि फील्ड सर्वे के आधार पर कांग्रेस भी उनको टिकट देने की इच्छुक थी। जौहर ने जब पुलिस मुख्यालय में स्वेच्छा सेवानिवृत्ति की अर्जी लगाई तब तक उनके चुनाव लडऩे की बात फैल चुकी थी।
लिहाजा, पीएचक्यू ने जौहर को वीआरएस देने से दो टूक इंकार कर दिया। इसके खिलाफ जौहर ने हाईकोर्ट में फरियाद की। हाईकोर्ट की नोटिस पर डीजीपी एएन उपध्याय कोर्ट में शपथ पत्र दिए कि जौहर की सेवा की अभी शासन को जरूरत है। इसलिए, उन्हें रिटायर नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट ने इस पर जौहर की याचिका खारिज कर दी। जौहर ने इसके बाद डबल बेंच में अपील कर कहा कि पुलिस महकमा उन्हें प्रताडि़त करने के लिए वीआरएस नहीं दे रहा है। डबल बेंच में जौहर की अपील पर सुनवाई शुरू हो पाती, इससे पहले कांग्रेस ने मस्तूरी में दिलीप लहरिया को रिपीट करने का ऐलान कर दिया। कांग्रेस की सूची जारी होते ही पीएचक्यू भी हरकत में आया और सोमवार को जौहर की वीआरएस मंजूर कर ली। तब तक जौहर के लिए खेत चिडिय़ा चुग चुकी थी। मस्तूरी में अब उनके लिए नो चांस हो गया। हालांकि, कांग्रेस की एक लॉबी फिर उनके लिए जुट गई है कि प्रत्याशी बदल दिया जाए।
टिकट मिलने का कर रहा हंू इंतजार : सोमवार को वीआरएस मिली है। मैं कांग्रेस से टिकट मिलने का इंतजार कर रहा हूं। नाम फायनल होने से कुछ नहीं होता। कांग्रेस का इतिहास देखिए कुछ भी हो सकता है।
जीएस जौहर, रिटायर्ड इंस्पेक्टर