फारेस्ट विभाग के बीट गार्ड को 22 साल बाद हाईकोर्ट से न्याय मिला। हाईकोर्ट ने निचली अदालत से भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा (7),(13) के तहत सुनाई गई सजा को निरस्त कर बीट गार्ड को दोषमुक्त कर दिया।
बिलासपुर. फारेस्ट विभाग के बीट गार्ड को 22 साल बाद हाईकोर्ट से न्याय मिला। हाईकोर्ट ने निचली अदालत से भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा (7),(13) के तहत सुनाई गई सजा को निरस्त कर बीट गार्ड को दोषमुक्त कर दिया। पर याचिकाकर्ता दोषमुक्त हो जाने के बाद न्याय को देखने, सुनने के लिए जिंदा नही रहा। कोर्ट ने परिजनों की याचिका पर मृत बीट गार्ड के देयकों का भुगतान परिवार को देने अभ्यावेदन के निराकरण के निर्देश दिए हैं। पीड़ित बीट गार्ड की दिसंबर 2019 में मौत हो चुकी है।
प्रकरण के अनुसार शिवप्रसाद दुर्ग जिले में 1999 में फारेस्ट बीट गार्ड के पद पर पदस्थ थे। उन्हें लकड़ी चोरी की सूचना मिली। बताए गए स्थान पर वह लकड़ी जब्ती के लिए पहुंचे। उसी दौरान उल्टे आरोपी ने उन पर एक हजार रुपए घूस मांगने का आरोप लगा दिया। शिवप्रसाद का मामला विशेष अदालत में चला। जहां से भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा (7) धारा (13) के तहत उन्हें सजा सुनाई गई। इस पर उनको नौकरी से भी निकाल दिया गया।
सजा के विरुद्ध 2003 में की हाईकोर्ट में अपील
शिव प्रसाद ने विशेष न्यायाधीश द्वारा सुनाई गई सजा के विरुद्ध 2003 में वकील विवेक शर्मा के माध्यम से हाईकोर्ट में अपील प्रस्तुत की। दिसंबर 2019 में याचिकाकर्ता की मृत्यु हो गई। मामले की सुनवाई अब 2021 में हुई। इस दौरान मृतक के परिवार को काफी समस्याओं का सामना भी करना पड़ा। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता के तर्क को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने दिए फैसले में मृत याचिकाकर्ता को दोषमुक्त पाया और निचली अदालत के द्वारा सुनाई गई सजा को निरस्त कर दिया।