सरगुजा की तीन सीटों पर गुरु की भक्ति और रियासत की शक्ति के बल पर उम्मीदवार चुनावी रण में ताल ठोंकने को तैयार हैं।
राजीव द्विवेदी/बिलासपुर. सरगुजा की तीन सीटों पर गुरु की भक्ति और रियासत की शक्ति के बल पर उम्मीदवार चुनावी रण में ताल ठोंकने को तैयार हैं। अंबिकापुर क्षेत्र में जहां टीएस सिंहदेव (बाबा ) राजपरिवार का होने की वजह से जनता के प्रिय हैं, वहीं लुंड्रा और सामरी का इलाका ऐसा है, जहां गहिरा गुरु के प्रति आस्था का असर मतदान पर पड़ता है। यही वजह है कि गहिरा गुरु के पुत्र चिंतामणि महाराज कांग्रेस के विधायक होते हुए भी भाजपा में भी मान रखते हैं। कांग्रेस जहां उनको इस बार भी चिंतामणि महाराज को मनचाही जगह से टिकट देने को तैयार है, तो भाजपा भी उनके लिए पलकें बिछाए बैठी है।
गहिरा गुरु की शरण में भाजपा
लुंड्रा, सामरी इलाके में गहिरा गुरु का बड़ा असर है। अंबिकापुर से सटे कुछ इलाकों में भी इनके अनुयायी हैं। भाजपा का मानना है कि पिछली बार कांग्रेस को कम से कम लुंड्रा और सामरी सीट जीतने के पीछे इस फैक्टर ने काम किया है। इसलिए भाजपा का फोकस इन वोटों पर और कांग्रेस विधायक चिंतामणि महाराज पर है। अंबिकापुर से पिछली बार के प्रत्याशी और इस बार भी टिकट के दावेदार अनुराग सिंहदेव स्वीकारते हैं कि गहिरा गुरु के पुत्र चिंतामणि महाराज का कांग्रेस को समर्थन और उनके टिकट से चुनाव लडऩे का असर पड़ा है।
भाजपा इस नुकसान की भरपाई करने में जुटी है। इसीलिए सरगुजा यूनिवर्सिटी का नाम राजमोहिनी देवी से बदलकर गहिरा गुरु विवि कर दिया। चिंतामणि महाराज कहते हैं कि कांग्रेस ने बिना शर्त और सम्मान के साथ पिछली बार टिकट दिया। इस बार अगर वे सीट बदलना चाहेंगे तो इसके लिए भी पार्टी राजी है, भाजपा के कहने और करने में अंतर महसूस होता है। इसलिए फिलहाल तो कांग्रेस ठीक है।
लोकतंत्र के पर्व में राजमहल का जोर
अंबिकापुर, लुंड्रा और सामरी में आम जनता से बात करने पर साफ़ पता चलता है कि इन चुनावों में भक्ति की भी शक्ति नजर आएगी । अंबिकापुर की अधिकतर सड़कें खराब हैं, पूरे शहर में धूल उड़ रही है, पेयजल और बिजली व्यवस्था चौपट है। फिर भी शायद राजमहल के प्रति आस्था ही है जो टीएस बाबा को हराना मुश्किल रहता है। दूसरी तरफ भाजपा नगेशिया जाति और गहिरा गुरु आश्रम की आस्था को अपनी तरफ मोडऩे की कोशिश चल रही है। अंबिकापुर में दुकानों, पान ठेलों में खड़े लोगों से चर्चा की जाए तो जवाब मिलता है कि जनता की आस्था ही राजमहल को जीत की वजह है, वर्ना एक चुनाव में तो जनता ने ही ऐसा माहौल कर दिया था कि 900 के आसपास ही लीड सिमट गई थी। लोग यह भी कहते हैं कि यह जीत तभी तक है जब तक आस्था कायम है।
नगेशियों के वोट पर किसका हक़
सरगुजा, अंबिकापुर से लेकर बलरामपुर तक नगेशिया आदिवासी समुदाय के की आबादी लगभग डेढ़ लाख है। इन पर कांग्रेस भाजपा दोनों की नजर है। इनमें से लगभग 50 हजार ऐसे हैं, जिनके नाम के साथ जाति में किसान लिखा होने के कारण उनको आदिवासियों को मिलने वाली सुविधाएं नहीं मिल रहीं थीं। भाजपा ने इस वर्ग पर डोरे डालने शुरू किए। केंद्र और राज्य शासन से इनके आदिवासी होने की अधिसूचना जारी होने के बाद उनके लिए आदिवासी जाति प्रमाणपत्र देना भी शुरू कर दिया गया है। हाालांकि नगेशिया समुदाय के नेता रामजीवन नगेशिया जकांछ के पाले में जाते दिख रहे हैं।