बिलासपुर

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, बेटे-बहू को माता-पिता का घर खाली करना होगा, आदेश जारी

Chhattisgarh High Court: कोर्ट ने माता-पिता का घर खाली करने के ट्रिब्यूनल के आदेश को बरकरार रखा और कहा कि वरिष्ठ नागरिक अधिनियम का उद्देश्य बुजुर्गों को सम्मान, सुरक्षा और शांतिपूर्ण जीवन देना है।
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Jul 09, 2026
Bilaspur High court
बिलासपुर हाईकोर्ट (photo source- Patrika)

Bilaspur High court: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों और सुरक्षा को लेकर अहम फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने माता-पिता के घर से बेदखली के खिलाफ बेटे और बहू द्वारा दायर याचिका खारिज करते हुए मेंटेनेंस ट्रिब्यूनल और अपीलीय ट्रिब्यूनल के आदेश को बरकरार रखा है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वरिष्ठ नागरिक अधिनियम, 2007 का उद्देश्य केवल भरण-पोषण सुनिश्चित करना नहीं, बल्कि बुजुर्गों को जीवन के अंतिम पड़ाव में सम्मान, शांति और सुरक्षा प्रदान करना भी है।

बुजुर्ग मां ने प्रताड़ना का लगाया था आरोप

मामला बिलासपुर-मुंगेली रोड स्थित मिनोचा कॉलोनी का है। यहां रहने वाली 93 वर्षीय संतोष खन्ना ने मेंटेनेंस ट्रिब्यूनल में आवेदन देकर बताया था कि उनके बड़े बेटे देवेंद्र खन्ना और बहू नीरजा खन्ना, जो उनके मकान की पहली मंजिल पर रहते हैं, लगातार उन्हें प्रताड़ित और परेशान करते हैं। बुजुर्ग महिला ने आवेदन में यह भी आशंका जताई थी कि बेटे-बहू के व्यवहार से उनके जीवन को खतरा है। उन्होंने ट्रिब्यूनल से दोनों को घर से बेदखल करने और अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की थी।

ट्रिब्यूनल ने दिया था घर खाली करने का आदेश

मामले की सुनवाई के बाद मेंटेनेंस ट्रिब्यूनल ने 12 सितंबर 2024 को बुजुर्ग मां की शिकायत और प्रस्तुत दस्तावेजों के आधार पर बेटे और बहू को मकान खाली करने का आदेश दिया था। इस फैसले को चुनौती देते हुए दोनों ने अपीलीय ट्रिब्यूनल का दरवाजा खटखटाया, लेकिन वहां भी राहत नहीं मिली।अपीलीय ट्रिब्यूनल ने 25 नवंबर 2024 को उनकी अपील खारिज करते हुए बेदखली के आदेश को सही ठहराया।

हाईकोर्ट ने भी बरकरार रखा आदेश

इसके बाद बेटे-बहू ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में याचिका दायर की। मामले की सुनवाई जस्टिस ए.के. प्रसाद की एकलपीठ में हुई। सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने भी याचिका खारिज कर ट्रिब्यूनल और अपीलीय ट्रिब्यूनल के आदेश को बरकरार रखा। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि ट्रिब्यूनल ने किसी संपत्ति के मालिकाना हक का फैसला नहीं किया है, बल्कि एक बुजुर्ग मां की शांतिपूर्ण और सुरक्षित जिंदगी सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक निर्देश दिए हैं।

संपत्ति विवाद सिविल कोर्ट का विषय

हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि संपत्ति के अधिकार या स्वामित्व को लेकर कोई विवाद है, तो उसका समाधान सिविल कोर्ट में किया जा सकता है। हालांकि, वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करने के लिए मेंटेनेंस ट्रिब्यूनल द्वारा दिए गए आदेश पूरी तरह वैध हैं। इस फैसले को वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों की रक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अदालत ने अपने आदेश से यह संदेश दिया है कि यदि बुजुर्ग माता-पिता अपने ही घर में प्रताड़ना का सामना कर रहे हैं, तो कानून उनके सम्मान और सुरक्षा की रक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाने का अधिकार देता है।

Updated on:
09 Jul 2026 01:45 pm
Published on:
09 Jul 2026 01:44 pm