कमलेश रजक बिलासपुर. खेल मैदान से अपने जौहर से प्रदेश और राष्ट्र का प्रतिनिधित्व करने वाले खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सफलता अर्जित कर देेश का नाम रौशन भी किया है, लेकिन इन खिलाड़ियोें को उनके प्रदर्शन के अनुसार सम्मान नहीं मिल रहा है। शहर के कई ऐसे खिलाड़ी हैं जिन्होंने राष्ट्रीय और अतराष्ट्रीय स्पर्धाओं में कई ग

6 साल में 29 पदक, देेश का प्रतिनिधित्व भी, लेकिन चला रहा आटो
सरकंडा निवासी द्वारिका प्रसाद जांगड़े दोनों पैसों से 100 बूते दिव्यांग हैं। सन 2011 में उन्होंने व्हीलचेयर फेंसिंग स्पर्धाओं में भाग लेना शुरू किया। 2011 - 16 तक 6 वर्षों में राष्ट्रीय स्तर पर अपने जौहर का प्रर्दशन करते हुए 16 स्वर्ण,4 रजत और 9 कास्य पदक जीते हैं। इसके साथ ही द्वारिका ने वर्ष 2015 में कनाडा में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय स्पर्धा में देश का प्रतिनिधित्व भी किया था। उनकी उपलब्धियों के लिए मेजर ध्यानचंद आौर शहीद राजीव पांडेय पुरस्कार भी दिए दिए गए। खेल के सााथ द्वारिका ने पढ़ाई का दामन थामे रखा और बीए तक की शिक्षा ग्रहण की। खेल में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने के बाद भी द्वारिका को खेल कोटे से किसी विभाग में नौकरी नहीं मिली। वर्तमान में द्वारिका डीजल आटो चलाकर अपने और अपने परिवार का भरण पोषण कर रहे हैं।
दोनों पैरों से दिव्यांग, जीते 13 पदक, अब कोई पूछने वाला नहीं
सरकंडा चिंगराजपारा निवासी दीक्षा तिवारी दोनों पैरों सेे100 फीसदी दिव्यांग हैं। सन 2014 से उन्होंने व्हीलचेयर फेंसिंग स्पर्धओं में भाग लेना शुरू किसा था। वर्ष 2014 - 2019 तक अलग-अलग वर्षों में हुई राष्ट्रीय स्पर्धाओं में दीक्षा नेे कुल 11 स्वर्ण, 1 रजत और 1 कास्य पदक जीते हैं। पढ़ाई में एमए की परीक्षा उत्तीर्ण दीक्षा को खेल में इतनी उपलब्धियों के बाद भी सरकारी विभाग में नौकरी नहीं मिली है। दीक्षा के पिता पुजारी है। वह प्राइवेट कंपनी में काम कर अपने परिवार का का आर्थिक सहयोेग कर रही हैै।
6 नेशनल गेम्स में 12 मेडल, अब प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी
जरहाभाठा निवासी व दिव्यांग व्हीलचेयर फेंसिंग खिलाड़ी सतरूपा सोनवानी ने सन 2012-17 तक आधा दर्जन नेशनल गेम्स में 8 गोल्ड,1 सिल्वर और 3 ब्रांज मैडल जीते हैं। राज्य का प्रतिनिधत्व करते हुए सतरूपा ने अपने प्रदर्शन से छत्तीसगढ़ को व्हील चेयर फेंसिंग में ओवर ऑल चैंपियन तक का खिताब दिलाया था। खेल के साथ-साथ पढ़ाई में भी समरूपा ने मुकाम हासिल किए हैं। एम तक की पढाई करने वाली सतरूपा को खेल कोटे, दिव्यांग कोटे से किसी विभाग में नौकरी नहीं मिली। अब वे खेल छोड़कर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रही हैं।
शिवाक्ष, रूद्राक्ष और यश का सफर जारी
शहर के तैराक रूद्राक्ष, शिवाक्ष साहूू और यश तिवारी का विजय अभियान जारी है। शिवाक्ष और रूद्राक्ष साहूू सगे भाई हैं। शिवाक्ष नेे तैराकी में लगातार सफलताएं अर्जित की है और इसी सफलता के कारण वे आज इंडियन नेवी में अपनी सेवाएं दे रहे है। नौकरी के साथ वे लगातार राष्ट्रीय स्पर्धाओं में कई मैडल जीते हैं। उनने छोटे भाई रूद्राक्ष साहू ने भी अंतर्राष्ट्रीय स्तर की स्पर्धओं में मदक जीत चुके हैं। रूद्राक्ष और शिवाक्ष का चयन गुवाहाटी और राजकोट में आयोजित नेशनल गेम्स में हुआ है। इसके साथ ही तैराक यश तिवारी भी लगातार 5 वर्षों से छत्तीसगढ़ का राष्ट्रीय स्तर की स्पर्धाओं में करते आ रहे हैं। यश ने भी प्रदेश के लिए कई मैडल जीते हैं। उनका चयन आगामी राष्ट्रीय स्पर्धा के लिए हुआ है।
आरव के 13 साल की उम्र में 7 गोल्ड मैडल, मुदित भी 15 वें मेडल की तलाश में
शहर के आरव शर्मा ने 13 साल की उम्र में स्वीमिंग में उत्कृष्ट प्रर्दशन किया है। अब तक वे जूनियर स्तर की 5 राष्ट्रीय स्पर्धाओं में 7 गोल्ड मैडल जीत चुके हैं। आरव खेल के साथ-साथ पढ़ाई में भी मेघावी छात्र रहे हैं। उनका चयन आगामी राष्ट्रीय स्तर स्पर्धा में जूनियर वर्ग में हुआ है। इसी तरह शहर के मुदित सिंह पलेरिया भी अपने 15 वें मेडल की तलाश में हैं। अब तक मुदित ने राज्य और राष्ट्रीय स्तर की तैराकी स्पर्धाओं में 9 गोल्ड ,5 सिल्वर और 1 ब्रांज मैडल जीत चुके हैं। आगामी राष्ट्रीय स्पर्धा में उनका चयन प्रदेश से हुआ है।