Indian Railway: कोरबा के बीच मेमू स्पेशल ट्रेन चलाने का निर्णय लिया है। यह ट्रेन 23 से 28 मार्च तक चलेगी और इस दौरान 63 स्टेशनों पर रुकेगी। पूरी दूरी तय करने में ट्रेन को करीब 14 घंटे 30 मिनट लगेंगे।
Indian Railway: चैत्र नवरात्रि के दौरान डोंगरगढ़ स्थित मां बम्लेश्वरी मंदिर में लगने वाले नवरात्रि मेले में आने-जाने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए रेलवे प्रशासन ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस (इतवारी) कोरबा के बीच मेमू स्पेशल ट्रेन चलाने का निर्णय लिया है। यह ट्रेन 23 से 28 मार्च तक चलेगी और इस दौरान 63 स्टेशनों पर रुकेगी। पूरी दूरी तय करने में ट्रेन को करीब 14 घंटे 30 मिनट लगेंगे।
रेलवे के अनुसार ट्रेन नंबर 06883 नेताजी सुभाष चंद्र बोस (इतवारी)–कोरबा मेमू स्पेशल सुबह 5 बजे इतवारी से रवाना होगी और मध्यवर्ती स्टेशनों से होते हुए शाम 7.30 बजे कोरबा पहुंचेगी। इसी तरह ट्रेन नंबर 06884 कोरबा–नेताजी सुभाष चंद्र बोस (इतवारी) मेमू स्पेशल कोरबा से सुबह 5.10 बजे रवाना होकर निर्धारित स्टेशनों पर रुकते हुए शाम 7.30 बजे इतवारी पहुंचेगी।
इतवारी से चलकर ट्रेन सुबह 9.06 बजे डोंगरगढ़ पहुंचेगी और 9.11 बजे आगे के लिए रवाना होगी। वापसी में कोरबा से आने वाली ट्रेन दोपहर 1.41 बजे डोंगरगढ़ पहुंचेगी और 5 मिनट ठहराव के बाद इतवारी के लिए रवाना होगी।
इस बार नवरात्रि को लेकर उत्साह केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि देश-विदेश से भी श्रद्धालु जुड़ रहे हैं। कई एनआरआई और विदेशी भक्तों ने पहले से ही ज्योति कलश जलाने के लिए ऑनलाइन बुकिंग कराई है। इससे यह स्पष्ट होता है कि छत्तीसगढ़ के धार्मिक स्थलों की पहचान अब वैश्विक स्तर पर भी मजबूत हो रही है।
डोंगरगढ़ स्थित माँ बम्लेश्वरी मंदिर में हर साल की तरह इस बार भी भारी भीड़ की उम्मीद है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए रेलवे ने 10 एक्सप्रेस ट्रेनों को अस्थायी स्टॉपेज दिया है, वहीं 19 से 27 मार्च तक 4 लोकल ट्रेनों का विस्तार किया गया है। इसके अलावा डोंगरगढ़ और दुर्ग के बीच स्पेशल ट्रेन चलाई जा रही है। पैदल यात्रियों के लिए बस सेवा, निशुल्क भंडारा, पेयजल और स्वास्थ्य सुविधाओं की व्यवस्था भी की गई है, ताकि किसी को असुविधा न हो।
छत्तीसगढ़ को देवी उपासना की भूमि माना जाता है, जहां नवरात्रि पर्व विशेष श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। बस्तर से लेकर रतनपुर और डोंगरगढ़ तक फैले शक्तिपीठों की ऐतिहासिक और धार्मिक मान्यता है, जो सदियों पुरानी परंपराओं से जुड़ी हुई है।
नवरात्रि के दौरान ज्योति कलश जलाने की परंपरा यहां की खास पहचान है, जिसमें श्रद्धालु अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए दीप प्रज्ज्वलित करते हैं। बदलते समय के साथ अब इस परंपरा में आधुनिक तकनीक भी जुड़ गई है, जिससे ऑनलाइन बुकिंग के जरिए देश-विदेश के लोग भी इस धार्मिक आयोजन का हिस्सा बन पा रहे हैं।