
बिलासपुर . सूचना के अधिकार अधिनियम को सकारात्मक रूप से लें। इससे कार्य करने में सुविधा होती है। छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग के मुख्य सूचना आयुक्त एमके राउत ने शनिवार को यहां आयोजित संभाग के प्रथम अपीलीय अधिकारियों की कार्यशाला को संबोधित करते हुए यह बातें कही। राउत ने सूचना अधिकार अधिनियम के क्रियान्वयन के संबंध में सहज-सरल रूप से अनेक व्यवहारिक बातें बताई। कार्यशाला में मुख्य सूचना आयुक्त ने कहा कि सूचना का अधिकार अधिनियम में पहला अधिकारी जनसूचना अधिकारी होता है। जानकारी मांगे जाने पर जिसे निर्धारित समयावधि में देना होता है। इस अधिनियम के बेहतर क्रियान्वयन के लिए मन में ठान लें कि निर्धारित समयावधि में लिखित में जानकारी देना है। इससे किसी प्रकार की दिक्कत नहीं होगी। उन्होंने कहा कि कार्यालय में व्यवस्थित ढंग से फाइलिंग करें। इससे जानकारी देने में सुविधा होगी। प्रथम अपीलीय अधिकारी 30 दिन और कारण सहित 45 दिन के अंदर आदेश कर जानकारी दे सकते हैं। साथ ही अपीलीय अधिकारियों को जनसूचना अधिकारी एवं आवेदकों दोनों की सुनवाई कर आदेश देना होता है। प्रथम अपील में समय पर आदेश किया गया है, तो सूचना आयोग आने की जरूरत नहीं होती। उन्होंने यह भी बताया कि सूचना के अधिकार के तहत् आवेदन के साथ राशन कार्ड लगाने से छूट नहीं मिलेगी। इसके लिए बीपीएल प्रमाण पत्र लगाना होगा। राउत ने कार्यशाला में प्रथम अपीलीय अधिकारियों की शंका का समाधन भी किया।
प्रजातंत्र को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका : छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग के सूचना आयुक्त अजय कुमार सिंह ने कहा कि सूचना के अधिकार अधिनियम की विस्तार से जानकारी देते हुए कहा, कि सूचना का अधिकार का देश में पारदर्शिता लाने और प्रजातंत्र को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि सतर्कता से कार्य करना सीखें। साथ ही नियम को ध्यान में रखकर कार्य करें। सूचना के अधिकार के तहत् आवेदन प्राप्त होता है, तो पहले आवक कराएं। हमेशा पंजी में दर्ज करें। आवेदक को शुल्क के संबंध में भी सूचित करना है। यदि आवेदक स्पष्ट जानकारी मांगा है, तो अवलोकन कराने की जरूरत नहीं हैं। यदि एक आवेदन में एक से अधिक जानकारी मांगी गई है, तो प्रथम विषय की जानकारी दें सकते हैं। कई ऐसी जानकारी भी मांगी जाती है, जो कार्यालय में उपलब्ध नहीं है। इस संबंध में भी जानकारी स्पष्ट रूप से दे दें। सिंह ने व्यक्तिगत जानकारी के संबंध में भी अवगत कराया।
अध्ययन से बेहतर क्रियान्व्यन : संभागायुक्त टीसी महावर ने कहा कि सूचना का अधिकार के तहत् जनसूचना अधिकारी द्वारा निर्धारित प्रावधान एवं प्रक्रिया का पालन नहीं करने पर अपील की स्थिति बनती है। उन्होंने प्रथम अपीलीय अधिकारियों से कहा कि निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार प्रकरण दर्ज कर निराकरण करें। उन्होंने कहा कि सूचना के अधिकार अधिनियम को ठीक से अध्ययन करेंगे, तो क्रियान्वयन की स्थिति भी बेहतर होगी।
सुशासन के लिए आरटीआई : कलेक्टर पी. दयानंद ने कहा कि सुशासन के लिए सूचना का अधिकार की भूमिका अहम है। उन्होंने कहा कि इस कार्यशाला में बेहतर मार्गदर्शन मिलेगा। इससे पारदर्शी तरीके से कार्य करने में सहुलियत होगी। छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग कार्यालय के चमन सिंह ठाकुर ने प्रथम अपीलीय अधिकारी के कार्यों के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। इसी तरह राज्य सूचना आयोग कार्यालय के आदिले ने कहा कि सूचना के अधिकार के तहत् आवेदन दिया जाता है, तो उसमें स्पष्ट हस्ताक्षर और दिनांक होना चाहिए। यदि आवेदन के साथ शुल्क अदा नहीं किया गया है, तो वह आवेदन पूर्ण नहीं माना जाएगा। कार्यशाला में यूके.रस्तोगी ने भी सूचना के अधिकार के क्रियान्वयन के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम का संचालन सत्यभामा अवस्थी ने किया। आभार व्यक्त अपर कलेक्टर केडी कुंजाम ने किया। कार्यशाला में संभाग के पांचों जिलों के प्रथम अपीलीय अधिकारी मौजूद थे।