
काजल किरण कश्यप/ बिलासपुर . मां की ममता को सलाम है, मां का कर्ज बच्चा चाहे कितने भी जन्म ले नहीं उतार सकता। नारी शक्ति को परिभाषित करना कठिन है। उसी नारी का एक रूप होता है मां का। मां जितनी कठिनाई सहकर अपने बच्चे को जन्म देती है, उतने ही कठिनाई से उसकी परवरिश भी करती है। इसका जीता जागता उदाहरण है शहर की ई-रिक्शा चालक मधु तिवारी। घर की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए मासूम बच्चे को साथ लेकर ई-रिक्शा चलाती है। इस दौरान बच्चे का ख्याल रखते हुए वह यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाती है। इमलीभाठा काछी बाड़ा के पास रहने वाली मधु के तीन बच्चे, एक बेटी है और दो बेटे हैं। बेटी नानी के पास रहती है। वहीं बेटा 5 साल का है जो स्कूल जाता है। दूसरा बेटा 1 साल का है। उसकी देखभाल के लिए घर में कोई नहीं होता। पति भी अपने काम पर चले जाते हैं। एेसे में मधु अपने बच्चे 1 साल के छोटू को अपने साथ ले जाती है। ई-रिक्शा में सामने अपने सीट के पास ही एक छोटा चेयर रखकर उस पर उसे बिठाए रखती है। रस्सी से बांधकर उसकी सुरक्षा का ख्याल रखती हुई सवारी लेकर शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में जाती है। इस दौरान बीच-बीच में बच्चे को खाना खिलाना, सुलाना जैसे काम भी करती है।
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सुबह से शाम तक बच्चा होता है साथ : सुबह घर का सारा काम पूरा करने के बाद 9 बजे से मधु बच्चे को लेकर अपने काम पर निकलती है। इस दौरान वह अपने बच्चे को पूरा समय देती है। उसकी सुरक्षा का ध्यान रखती है। दोपहर में घर जाकर 3 घंटे आराम के बाद शाम को एक बार फिर ई-रिक्शा लेकर निकलती है। इस दौरान पति भी साथ रहकर बच्चे को देखता है।
पति ने बढ़ाया मेरा हौसला : मधु का पति महावीर मिस्त्री का काम करता है। उसके सहयोग से ही मधु आत्मनिर्भर बन परिवार के आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने के लिए आगे आई। मधु बताती हैं, कि कुछ महीनों पहले सिटी बस के लिए महिलाओं को ट्रेनिंग देकर आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया गया था। उसी के तहत पति के प्रोत्साहित करने पर मैंने प्रशिक्षण लिया।