शिव अनुराग भवन में परमात्मा के महावाक्यों पर चिंतन का कार्यक्रम चल रहा है। गायत्री बहन ने बताया कि निराकार परमात्मा के अवतरण से ही संगमयुग की शुरुआत हो चुकी है।
बिलासपुर शिव अनुराग भवन में परमात्मा के महावाक्यों पर चिंतन का कार्यक्रम चल रहा है। गायत्री बहन ने बताया कि निराकार परमात्मा के अवतरण से ही संगमयुग की शुरुआत हो चुकी है। इस समय मनुष्य किसी न किसी कमी के कारण दु:खी हैं, संबंधों में खटास और परिवार में बिखराव इसकी प्रमुख वजह हैं। राजयोग के अभ्यास से हम परमात्मा से सभी संबंधों के सुख का अनुभव कर सकते हैं। परमात्मा कहते हैं कि इस सुख का अनुभव इस संगमयुग में ही किया जा सकता है। परमात्मा जिस सुख की दुनिया की रचना कर रहे हैं, उसमें दु:ख का कोई स्थान नहीं होगा। लेकिन इसका अनुभव करना वर्तमान में होगा ताकि अंत में सिर्फ एक परमात्मा की याद में ही शरीर छूटे। उन्होंने कहा कि इसके लिए सबसे आवश्यक गुण मधुरता का है। मधुरता के गुण से भिन्न संस्कारों वाले लोग सहज ही सामंजस्य बिठाकर खुशहाल जीवन जी सकते हैं। दूसरों के संस्कार को स्वीकार करने से विरोध स्वत: समाप्त हो जाता है।