बिलासपुर

CG High Court: ‘महत्वपूर्ण चूक’ से कमजोर पड़ा टीचर का केस, हाईकोर्ट ने आरोपियों की बरी को दी मंजूरी

CG High Court: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने जाति आधारित गाली-गलौज और छेड़छाड़ के मामले में दो आरोपियों को बरी करने के ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा।
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CG High Court: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण फैसले में जाति आधारित गाली-गलौज और छेड़छाड़ के आरोपों से जुड़े मामले में दो आरोपियों को बरी करने के ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है। कोर्ट ने कहा कि आरोप साबित करने के लिए साफ, भरोसेमंद और ठोस सबूतों का अभाव है, इसलिए बरी किए जाने के फैसले में दखल देना उचित नहीं होगा।

CG High Court: जस्टिस राधाकिशन अग्रवाल की पीठ ने की सुनवाई

यह मामला एक महिला शिक्षक की अपील पर सुना गया। जस्टिस Radhakishan Agrawal की एकल पीठ उस अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें ट्रायल कोर्ट द्वारा दो आरोपियों को हैरासमेंट और क्रिमिनल इंटिमिडेशन के आरोपों से बरी किए जाने के फैसले को चुनौती दी गई थी। बता दें 2 मार्च को जारी आदेश में अदालत ने कहा कि महिला के क्रॉस-एग्जामिनेशन के दौरान कई महत्वपूर्ण चूकें और विरोधाभास सामने आए, जिससे उसके आरोपों की विश्वसनीयता कमजोर हुई।

FIR और बयान में कई अहम बातें गायब

कोर्ट ने पाया कि लिखित रिपोर्ट और एफआईआर में यह स्पष्ट उल्लेख नहीं था कि आरोपियों ने उसका हाथ, बांह या कमर पकड़ी थी। साथ ही जातिगत गाली-गलौज और धमकी के स्वरूप का भी विस्तार से जिक्र नहीं किया गया था। क्रॉस-एग्जामिनेशन के दौरान महिला ने स्वीकार किया कि लिखित रिपोर्ट उसकी अपनी हस्तलिपि में थी, लेकिन कोर्ट में दिए गए उसके कुछ बयान न तो रिपोर्ट में थे और न ही पहले दर्ज बयान में। अदालत ने इसे “बड़ी चूक” माना।

घटना के बाद दर्ज हुई थी रिपोर्ट

अदालत ने यह भी नोट किया कि घटना 20 सितंबर 2013 की बताई गई, जबकि रिपोर्ट चार दिन बाद दर्ज कराई गई। इस देरी को भी संतोषजनक तरीके से स्पष्ट नहीं किया जा सका। साथ ही रिकॉर्ड से यह भी सामने आया कि आरोपियों ने पहले महिला के पिता के खिलाफ मारपीट की शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके बाद यह मामला दर्ज कराया गया।

आरोप साबित करने में प्रॉसिक्यूशन नाकाम

कोर्ट ने कहा कि प्रॉसिक्यूशन यह बिना किसी संदेह के साबित नहीं कर सका कि आरोपियों ने महिला को गलत तरीके से रोका या उसकी इज्जत खराब करने के इरादे से बल प्रयोग किया। सार्वजनिक स्थान पर जाति के आधार पर अपमान किए जाने का आरोप भी स्पष्ट और लगातार सबूतों से साबित नहीं हो पाया।

अपील खारिज

CG High Court: इन सभी परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट का फैसला तर्कसंगत और संभव प्रतीत होता है। इसलिए उसमें हस्तक्षेप करने का कोई कारण नहीं बनता। अदालत ने अंततः महिला द्वारा दायर बरी करने के खिलाफ अपील को खारिज कर दिया और आरोपियों को मिली राहत को बरकरार रखा।

Updated on:
06 Mar 2026 04:57 pm
Published on:
06 Mar 2026 04:56 pm