
बिलासपुर. कोरोना के बीच ब्लैक और व्हाइट फंगस (White Fungus) बीमारी इन दिनों लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। हाल ही में केंद्र सरकार ने सभी राज्यों को अलर्ट जारी कर इसकी जानकारी लोगों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी दी है। जिला महामारी नियंत्रण इकाई टीम के अनुसार जिले में इस तरह के एक भी केस नहीं है। लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने अलर्ट जारी कर दिया है।
सिम्स मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. पंकज टेम्भुनिकर ने कहा कि यह तथ्य सामने आया कि ब्लैक फंगस किसी को भी हो सकता है, लेकिन घबराने की बात नहीं है, लक्षण दिखे और तत्काल डॉक्टरों से संपर्क कर इलाज कराएं, सावधानी बरतें तो इससे बच सकते हैं। इसे लेकर जागरूकता व समय पर जांच कराना अत्यंत जरूरी है अन्यथा परेशानी बढ़ सकती है।
व्हाइट फंगस शरीर के इन अंगों पर अटैक करता है
डाक्टर सिद्दार्थ वर्मा ने बताया व्हाइट फंगस फेफड़ों के संक्रमण की मुख्य वजह है। इसके अलावा यह स्किन, नाखून, मुंह के अंदरुनी हिस्से आमाशय-आंत, किडनी, गुप्तांग और ब्रेन, नाक या मुंह के रास्ते शरीर को भी संक्रमित करता है। फेफड़ों के संक्रमण के लक्षण एचआरसीटी में कोरोना के लक्षणों जैसे ही दिखते हैं।
फंगस के प्रांरभिक लक्षण को नजरअंदाज न करें। चेहरे पर सूजन, किसी भी अंग में दर्द, नाक या मुंह से काले रंग का पदार्थ निकलना फिर इसके बाद सिर दर्द होना। सूजन और लालिमापन आ जाना मुख्य लक्षण है। धुंधला दिखाई देना, चेहरे का एक हिस्सा प्रभावित होता है। अगर इस तरह का लक्षण है तो तत्काल डॉक्टरों से संपर्क करें।
फंगस से बचने के लिए क्या करना चाहिए
सीएमएचओ डॉ. प्रमोद महाजन ने बताया जो कोरोना मरीज ऑक्सीजन सपोर्ट पर हैं उनके फेफड़ों को व्हाइट फंगस संक्रमित कर सकता है। ऐसी स्थिति में जो मरीज ऑक्सीजन या वेंटिलेटर पर हैं, उनके ऑक्सीजन या वेंटिलेटर उपकरण विशेषकर ट्यूब आदि जीवाणु मुक्त होने चाहिए। ऑक्सीजन सिलेंडर ह्यूमिडिफायर में स्ट्रेलाइज वाटर का प्रयोग करना चाहिए।