
Naseeruddin Shah Dimagi Naxal: दिग्गज अभिनेता नसीरुद्दीन शाह का एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा में है, जिसमें वह सरकार और देश में चल रहे राजनीतिक-सामाजिक मुद्दों पर अपनी राय रखते नजर आ रहे हैं। इसी वीडियो में उन्होंने खुद को ‘दिमागी नक्सल’ कहे जाने से जुड़ी टिप्पणी भी की है। वीडियो सामने आने के बाद केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू समेत कई लोगों ने नसीरुद्दीन शाह की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया दी है। अब अभिनेता पुनीत इस्सर ने भी शाह के बयान पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए उन्हें चुनाव लड़ने की चुनौती दी है।
पुनीत इस्सर ने नसीरुद्दीन शाह को अपना वरिष्ठ और शिक्षक बताते हुए कहा कि वह उनका सम्मान करते हैं, लेकिन उनके मुताबिक किसी भी मुद्दे पर बात करते समय किसी व्यक्ति को एकतरफा या चयनात्मक तरीके से टिप्पणी नहीं करनी चाहिए।
आईएएनएस से बातचीत में पुनीत इस्सर ने कहा कि नसीरुद्दीन शाह को अपनी राय रखने और सरकार की आलोचना करने का पूरा अधिकार है। हालांकि, उन्होंने सवाल किया कि अगर शाह मौजूदा सरकार से सहमत नहीं हैं तो वह चुनाव क्यों नहीं लड़ते।
इस्सर ने कहा कि अगर किसी को सरकार पसंद नहीं है तो उसे चुनाव लड़ना चाहिए, जनता के बीच जाना चाहिए और अपनी विचारधारा को सामने रखना चाहिए। उनके मुताबिक अगर जनता उस विचारधारा का समर्थन करती है तो चुनाव जीतकर सरकार में बदलाव किया जा सकता है।
पुनीत इस्सर ने इसी संदर्भ में कहा, “चुनाव लड़िए, सरकार हराइए।” उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा सरकार लोगों द्वारा चुनी गई है और किसी की विचारधारा को सामने लाने का लोकतांत्रिक रास्ता चुनाव भी है।
पुनीत इस्सर ने अपने बयान की शुरुआत नसीरुद्दीन शाह के सम्मान के साथ की। उन्होंने कहा कि शाह उनके वरिष्ठ हैं, उन्होंने उनसे सीखा है और वह एक अच्छे कलाकार हैं।
हालांकि, इसके बाद उन्होंने शाह की राजनीतिक टिप्पणियों को लेकर असहमति जताई। इस्सर का कहना था कि नसीरुद्दीन शाह कई मुद्दों पर अपनी बात नहीं रखते और कुछ विशेष मुद्दों पर ही प्रतिक्रिया देते हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि शाह की टिप्पणियां उनकी नजर में एक विशेष राजनीतिक विचारधारा की ओर झुकी हुई दिखाई देती हैं। इस दौरान इस्सर ने जेएनयू, ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’, जेल में बंद लोगों और आतंकवाद से जुड़े लोगों का जिक्र भी किया। ये सभी बातें पुनीत इस्सर के आरोप और राजनीतिक नजरिया हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट के आधार पर नहीं हुई है।
पुनीत इस्सर ने नसीरुद्दीन शाह की आलोचना को लेकर मुख्य सवाल उनकी कथित ‘चयनात्मक प्रतिक्रिया’ पर उठाया। उन्होंने कहा कि देश और दुनिया में कई ऐसे मुद्दे हैं जिन पर शाह को अपनी राय रखनी चाहिए।
इस्सर ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति सरकार के किसी फैसले या नीति से असहमत है तो उसे अपनी बात रखने का अधिकार है। लेकिन उनके अनुसार एक ही दिशा में आलोचना करने के बजाय अलग-अलग मुद्दों पर समान रूप से बात की जानी चाहिए।
उन्होंने नसीरुद्दीन शाह को संबोधित करते हुए कहा कि वह उनका सम्मान करते हैं और उन्हें अपना शिक्षक मानते हैं, लेकिन किसी एक पक्ष पर ही बोलने को लेकर उनकी असहमति है।
IANS से बात करते हुए परेश रावल ने भी इस पर बात की। उन्होंने कहा, 'देखिए, मैं एक बात बता दूं आपको, नसीर भाई की अपनी राय है। मैं उसके बारे में कुछ नहीं बोल सकता। सबको सही है, अपना-अपना जो महसूस करते हैं, वो बोलने का। बस मैं इतना ही कहूंगा।' इसके साथ ही ये सवाल पूछे जाने पर अभिनेता ने कहा, 'मैं काफी देर से देख रहा था कि कब आ रहा है ये सवाल।'
विवाद की शुरुआत नसीरुद्दीन शाह के उस वायरल वीडियो से हुई, जिसमें वह सरकार और मौजूदा राजनीतिक माहौल को लेकर अपनी राय व्यक्त करते दिखाई दिए। इसी दौरान ‘दिमागी नक्सल’ शब्द का इस्तेमाल चर्चा में आया।
वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर नसीरुद्दीन शाह के बयान को लेकर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कुछ लोगों ने उनके विचारों का समर्थन किया, जबकि कुछ लोगों ने उनकी आलोचना की।
इस मामले में केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने भी नसीरुद्दीन शाह पर प्रतिक्रिया दी। रिजिजू ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि वह पहले शाह को एक सामान्य अभिनेता मानते थे और उनका सम्मान करते थे, लेकिन उन्हें नहीं पता था कि वह इतने ‘खतरनाक अर्बन दिमागी नक्सल’ हैं। रिजिजू की यह टिप्पणी भी सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी।
नसीरुद्दीन शाह के बयान पर बीजेपी नेता गौरव भाटिया ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने अभिनेता की फिल्म ‘सरफरोश’ के किरदार का संदर्भ लेते हुए उन पर राजनीतिक तंज कसा।
इससे पहले भी नसीरुद्दीन शाह अपने राजनीतिक और सामाजिक विचारों को लेकर सार्वजनिक बहस का हिस्सा रहे हैं। उनके बयानों पर अक्सर राजनीतिक दलों और सार्वजनिक हस्तियों की प्रतिक्रियाएं सामने आती रही हैं।
पुनीत इस्सर ने अपने बयान में यह स्पष्ट किया कि उनकी आलोचना व्यक्तिगत दुश्मनी के आधार पर नहीं है। उन्होंने नसीरुद्दीन शाह को अपना वरिष्ठ बताते हुए उनके अभिनय और अनुभव का सम्मान किया।
इस्सर ने कहा कि शाह उनके लिए सम्मानित व्यक्ति हैं और उन्होंने उनसे बहुत कुछ सीखा है। लेकिन राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर दोनों की सोच अलग हो सकती है। इसी असहमति को उन्होंने अपने बयान में सामने रखा।
उनका कहना था कि किसी व्यक्ति की विचारधारा चाहे जो भी हो, उसे लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने का अधिकार है। अगर कोई व्यक्ति सरकार बदलना चाहता है तो चुनाव एक संवैधानिक और लोकतांत्रिक माध्यम है।
नसीरुद्दीन शाह के ‘दिमागी नक्सल’ वाले वीडियो के बाद अब पुनीत इस्सर की प्रतिक्रिया ने इस पूरे मामले को बॉलीवुड के दो वरिष्ठ कलाकारों के बीच वैचारिक बहस का रूप दे दिया है। एक तरफ शाह की टिप्पणी को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं, वहीं दूसरी तरफ इस्सर ने चुनाव लड़कर सरकार को चुनौती देने की बात कही है।
हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि दोनों पक्षों की टिप्पणियां उनके व्यक्तिगत विचार और राजनीतिक नजरिए के तौर पर सामने आई हैं। मौजूदा विवाद का केंद्र किसी चुनावी प्रक्रिया से ज्यादा सार्वजनिक हस्तियों के राजनीतिक विचारों और सरकार की आलोचना के अधिकार को लेकर बहस है।
फिलहाल नसीरुद्दीन शाह की ओर से पुनीत इस्सर की इस ताजा प्रतिक्रिया पर कोई विस्तृत जवाब सामने नहीं आया है। अगर शाह इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हैं, तो विवाद और ज्यादा चर्चा में आ सकता है। सोशल मीडिया पर भी दोनों अभिनेताओं के बयानों को लेकर बहस जारी है।