Arundhati Roy Berlin Film Festival: अरुंधति रॉय ने BFF 2026 (बेंगलुरु अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल 2026) का बॉयकॉट करने का ऐलान किया है, जिससे फिल्म और साहित्य जगत में हंगामा मच गया है।
Arundhati Roy Berlin Film Festival: भारत की फेमस लेखिका और बुकर पुरस्कार विजेता अरुंधति रॉय ने बर्लिन फिल्म फेस्टिवल से अपना नाम वापस लेकर सुर्खियों में आ गई हैं। गाजा को लेकर फेस्टिवल की जूरी द्वारा दिए गए बयानों से 'आहत और घृणित' महसूस करने की वजह से उन्होंने इस इवेंट में शामिल होने से साफ इनकार कर दिया। अरुंधति रॉय ने कहा कि गाजा पर जूरी की चुप्पी इतिहास के पन्नों में उनके खिलाफ दर्ज होगी।
अरुंधति रॉय को इस साल के बर्लिनाले 2026 में अपनी 1989 की फिल्म 'इन व्हिच एनी गिव्स इट दोज वन' के रिस्टोर वर्जन की स्क्रीनिंग के लिए आमंत्रित किया गया था। ये फिल्म खास इसलिए भी है क्योंकि इसमें बॉलीवुड के फेमस एक्टर शाहरुख खान ने अपना फिल्मी सफर शुरू किया था। हालांकि, उन्होंने अब अपने इवेंट में शामिल होने से खुद को अलग कर लिया है।
इस पर अरुंधति रॉय ने कहा कि जूरी की टिप्पणी अमानवीय और दिल दहला देने वाली थी, जिसके चलते उन्होंने अपनी भागीदारी वापस ली। उन्होंने जूरी सदस्यों द्वारा गाजा संकट और जर्मनी के इस मुद्दे पर इजरायल के सपोर्ट पर रिएक्ट किया और बेहद दुखद बताया।
इतना ही नहीं, बर्लिन फेस्टिवल की प्रेस कॉन्फ्रेंस में जूरी के अध्यक्ष और जाने-माने फिल्म निर्माता विम वेंडर्स ने कहा था कि सिनेमा को राजनीति से दूर रहना चाहिए। इस बयान पर अरुंधति रॉय ने कहा, "ये सुनकर आश्चर्य हुआ कि कला को राजनीति से अलग रखा जाना चाहिए। हमारे समय के महानतम कलाकारों को खड़ा होकर इजरायल के गाजा में फिलिस्तीनियों पर हो रहे नरसंहार का विरोध करना चाहिए। अगर वे ऐसा नहीं करते हैं, तो इतिहास कभी उन्हें माफ नहीं करेगा।"
बता दें, बर्लिन फिल्म फेस्टिवल ने अरुंधति रॉय के निर्णय का सम्मान करते हुए कहा कि हमें खेद है कि वे इस बार हमारे साथ नहीं होंगी, क्योंकि उनकी मौजूदगी हमारी चर्चा को समृद्ध करती है। बर्लिनाले लंबे समय से राजनीति के प्रति जागरूक प्रोग्रामिंग के लिए जाना जाता है, लेकिन इस साल कई फेमस हस्तियां गाजा संघर्ष पर सार्वजनिक रूप से कोई एक्शन नहीं ले रही हैं।
ये संघर्ष 7 अक्टूबर 2023 को इजराइल पर हमास के हमले के बाद शुरू हुआ। इजरायल के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, इस हमले में 1,221 लोग मारे गए, जबकि गाजा में हमास-शासित इलाके के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार कम से कम 7,100 मौतें हुई हैं, जिन्हें संयुक्त राष्ट्र भी एक्सेप्ट करता है।