
Rajpal Yadav (सोर्स- एक्स)
Rajpal Yadav Financial Crisis: कभी अपनी कॉमिक टाइमिंग से सिनेमाघरों में दर्शकों को हंसा-हंसा के लोट-पोट करने वाले अभिनेता राजपाल यादव आज कानूनी संकट के कारण सुर्खियों में हैं। 9 करोड़ रुपये के कर्ज और चेक बाउंस मामले में उन्हें दिल्ली की तिहाड़ जेल में आत्मसमर्पण करना पड़ा। साल 2010 में अपने निर्देशन प्रोजेक्ट 'अता पता लापता' के लिए लिया गया 5 करोड़ रुपये का कर्ज ब्याज और पेनाल्टी के साथ बढ़ता गया और आखिरकार ये मामला सजा तक पहुंच गया।
बताया जाता है कि उनकी कुल संपत्ति करीब 50 करोड़ रुपये के आसपास है, फिर भी वो भुगतान न कर पाने की स्थिति में आ गए। आखिर ऐसा क्या हुआ कि ‘छोटा डॉन’ के नाम से मशहूर कलाकार इस मोड़ पर पहुंच गए? आइए तीन मुख्य वजहों को समझते हैं।
साल 2003 से 2010 के बीच राजपाल यादव ने दर्जनों फिल्मों में काम किया और बड़े सितारों के साथ उनकी जोड़ी दर्शकों की पसंद बनी। लेकिन 2012 के बाद हिंदी सिनेमा का स्वाद बदलने लगा। जहां पहले तेज-तर्रार और ओवर-द-टॉप कॉमेडी पसंद की जाती थी, वहीं धीरे-धीरे कंटेंट आधारित और सिचुएशनल ह्यूमर को तरजीह मिलने लगी।
कई समकालीन कलाकारों ने खुद को नए ट्रेंड के मुताबिक ढाल लिया- ओटीटी प्लेटफॉर्म और कैरेक्टर रोल्स को अपनाया। लेकिन राजपाल की छवि लंबे समय तक एक ही तरह की भूमिकाओं तक सीमित रही। नतीजा ये हुआ कि काम के मौके कम होते गए और आमदनी का ग्राफ अस्थिर हो गया।
डिजिटल दौर में हर बयान और हर मंच पर की गई मौजदूगी तुरंत चर्चा का विषय बन जाती है। राजपाल यादव कई बार ऐसे आयोजनों और बयानों के कारण आलोचना के घेरे में आए, जिनसे उनकी सार्वजनिक छवि पर असर पड़ा। सोशल मीडिया के दौर में पुराने वीडियो और क्लिप्स बार-बार सामने आते रहे, जिससे उनकी स्टार इमेज को धक्का लगा। दर्शकों और निर्माताओं के बीच भरोसे की कमी भी काम के अवसरों को प्रभावित करती रही।
सबसे अहम पहलू आर्थिक अनुशासन का रहा। 5 करोड़ रुपये का लोन समय पर नहीं चुकाया गया तो वह बढ़कर 9 करोड़ रुपये हो गया। अदालत ने कई मौकों पर भुगतान का अवसर दिया, लेकिन किस्तें नियमित नहीं रहीं। हाल के सालों में उन्होंने कुछ फिल्मों के लिए अच्छी फीस भी ली, फिर भी कर्ज की अदायगी प्राथमिकता नहीं बन सकी।
वित्तीय सलाह और योजना की कमी ने स्थिति को और जटिल बना दिया। कानून के तहत चेक बाउंस गंभीर अपराध माना जाता है, और अंततः उन्हें छह महीने की सजा सुनाई गई।
मौजूदा समय में फिल्म इंडस्ट्री और कुछ सार्वजनिक हस्तियां उनके समर्थन में आगे आई हैं। अभिनेता सोनू सूद समेत कई लोग आर्थिक मदद की पेशकश कर चुके हैं। हालांकि सवाल ये है कि क्या ये सहानुभूति उनकी खोई हुई प्रतिष्ठा को वापस दिला पाएगी?
राजपाल यादव का मामला सिर्फ एक अभिनेता की कानूनी परेशानी नहीं, बल्कि ये भी याद दिलाता है कि सफलता के साथ वित्तीय अनुशासन और समय के अनुसार खुद को ढालना कितना जरूरी है। शोहरत और लोकप्रियता स्थायी नहीं होती, लेकिन जिम्मेदार फैसले किसी भी करियर को स्थिर बना सकते हैं।
Published on:
14 Feb 2026 02:48 pm
बड़ी खबरें
View Allबॉलीवुड
मनोरंजन
ट्रेंडिंग
