Budget 2018 – जानिए क्यों बदल गया बजट पेश करने का समय

बजट-सत्र के दौरान कई ऐसे नियम हैं, जो परंपरागत रूप से चले आ रहे हैं।

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Jan 31, 2018

नई दिल्ली। फरवरी के पहले दिन पेश होने जा रहा भारत का आम बजट लोकतंत्र का एक अहम हिस्‍सा है। भारत में आधुनिक बजट प्रणाली की शुरुआत ब्रिटिश शासन के दौरान 7 अप्रैल 1860 को हुई। इसमें हर साल देश की जनता द्वारा चुनी गई सरकार हर साल देश के आय व्‍यय के ब्‍यौरा जारी करती है। उसके साथ ही अगले एक साल में देश के विकास के लिए योजनाओं की रूपरेखा पेश करती है।

बजट से जुड़ी हैं कई परंपराएं
बजट हमारे देश के संविधान का एक अहम हिस्‍सा है। बजट-सत्र के दौरान कई ऐसे नियम हैं, जो परंपरागत रूप से चले आ रहे हैं। जैसे बजट पर चर्चा से पहले होने वाली 'हलवा सेरेमनी' जिसमें वित्त-मंत्री खुद अपने हाथों से हलवा बना कर सभी का मुंह मीठा करवाते है । हलवा सेरेमनी वास्तव में बजट प्रक्रिया के अंतिम लेकिन सबसे अहम चरण की शुरुआत है। इसका अंत वित्त मंत्री के बजट भाषण से होता है। इसी तरह अधिकतर सरकारें इन्‍हीं तरह के परंपराओं का निर्वहन करते हुए बजट पेश करती हैं। लेकिन कई बार ऐसा भी होता है जब कुछ सरकार परंपराएं तोड़कर बजट की एक नई परंपरा की शुरुआत करती हैं। उदाहरण के लिए, 2016 तक फरवरी के अंतिम कार्य दिवस को बजट पेश किया जाता था। लेकिन पिछले साल से इसे बदलकर 1 फरवरी कर दिया गया। यह फैसला वित्‍तीय कामकाजों की सहूलियत को देखते हुए किया गया था। इस साल भी बजट 1 फरवरी को ही पेश होगा।

पहले शाम पांच बजे पेश होता था बजट
इसी तरह बजट से जुड़ी एक और अहम् परंपरा थी जो कुछ वर्षो पहले बदल दी गई। यह परंपरा बजट पेश करने के समय को लेकर थी, जिसमें 2001 में तत्‍कालीन वित्‍तमंत्री यशवंत सिन्‍हा ने बदलाव किया था। दरअसल वर्ष 2000 तक देश का आम बजट शाम 5 बजट पेश होता था। लेकिन बाद में इसे बदलकर सुबह के 11 बजे कर दिया गया।

यह था कारण
इस बजट परंपरा के पीछे भी एक इतिहास था जिसे तात्‍कालीन जरूरत के चलते बदल दिया गया। यह बात आजादी से 20 साल पहले 1927 की है, उस वक्त अंग्रेज अधिकारी भी भारतीय संसदीय कार्यवाही में हिस्‍सा लिया करते थे। भारत में बजट 5 बजे पेश करने का पीछे वजह यह थी कि दरअसल जब भारत में शाम के 5 बजते थे तो उस समय लंदन में सुबह के 11.30 बज रहे होते थे। लंदन के हाउस ऑफ लॉर्ड्स और हाउस ऑफ कॉमंस में बैठे सांसद भारत का बजट भाषण सुनते थे। आजादी के बाद भी कई सालों तक यह नियम जारी रहा। क्योंकि लंदन स्‍टॉक एक्‍सचेंज भी उसी समय खुलता था ऐसे में भारत में कारोबार करने वाली कंपनियों के हित इस बजट से तय होते थे।

यशवंत सिन्‍हा ने सबसे पहले सुबह 11 बजे बजट पेश किया
लेकिन देश में संविधान लागू होने के 50 साल बाद इस नियम को बदल दिया गया। इस परंपरा को तत्‍कालीन एनडीए सरकार ने तोड़ा। उस समय के वित्‍त मंत्री यशवंत सिन्‍हा ने सबसे पहले सुबह 11 बजे बजट पेश करना शुरू किया जो कि पूरी तरह से भारत के समयानुसार और भारत की परंपरा के अनुरूप था। और तभी से हर साल बजट पेश करने का समय सुबह के 11 बजे निर्धारित कर दिया।

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Published on:
31 Jan 2018 01:05 pm
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